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पोस्टर मामले में योगी सरकार ने दिखायी हठधर्मिता, पूरे देश के लिए मान्य होगा सुप्रीम कोर्ट का फैसला-जिलानी

पोस्टर मामले में योगी सरकार ने दिखायी हठधर्मिता, पूरे देश के लिए मान्य होगा सुप्रीम कोर्ट का फैसला-जिलानी
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लखनऊ। एएनएन (Action News Network)

नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के खिलाफ लखनऊ में प्रदर्शन के दौरान हिंसा फैलाने वालों के पोस्टर हटाने संबंधित इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ योगी आदित्यनाथ सरकार के सुप्रीम कोर्ट पहुंचने को वरिष्ठ अधिवक्ता जफरयाब जिलानी ने हठधर्मिता करार दिया है।

ऑल इंडिया पर्सनल लॉ बोर्ड के सदस्य जिलानी ने मामले में गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट की चल रही सुनवाई को लेकर कहा कि किसी फैसले के खिलाफ उसके ऊपर की अदालत में जाना हर किसी का अधिकार है, लेकिन योगी सरकार का यह कदम हठधर्मिता को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि हालांकि एक तरह से देखा जाए तो योगी सरकार का सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल करना अच्छा है, क्योंकि हाईकोर्ट का जजमेंट सिर्फ उत्तर प्रदेश तक था, लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट का जजमेंट पूरे देश के लिए हो जाएगा।

जिलानी ने कहा कि हाईकोर्ट में सरकार की ओर से होर्डिंग्स लगाने को लेकर कोई सम्बन्धित कानून के बारे में नहीं बताया जा सका। होर्डिंग्स मामले से सम्बन्धित लोग सिफर आरोपित हैं। अदालत से उन्हें जमानत मिल चुकी है। उनके साथ किसी फरार अपराधी की तरह व्यवहार नहीं किया जा सकता। इसलिए सुप्रीम कोर्ट में सरकार की दलीलें नहीं चलेंगी। वहीं सुप्रीम कोर्ट का फैसला पूरे देश के लिए नजीर बन जाएगा, यह बेहतर होगा। सरकार केवल अपनी हठधर्मिता के कारण सुप्रीम कोर्ट पहुंची है।

इसी बीच मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से पूछा है वह अधिकार कहां है, जिसके तहत उत्तर प्रदेश सरकार ने लखनऊ में सीएए के खिलाफ कथित आगजनी करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि निजता के अधिकार के कई आयाम हैं। मामले की सुनवाई जारी है।

बीते वर्ष 19 दिसम्बर को लखनऊ में सीएए के खिलाफ हुए हिंसक प्रदर्शन के मामले में प्रशासन ने थाना हसनगंज, हजरतगंज, ठाकुरगंज और कैसरबाग क्षेत्र से उपद्रवी व्यक्तिों को चिह्नित किया। इनमें 57 उपद्रवियों से 1.55 करोड़ की रिकवरी की जानी है। इन लोगों के नाम, पते और तस्वीरे जाहिर करते हुए होर्डिंग्स लगायी गई हैं।

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने बीते दिनों अपने आदेश में कहा कि बिना कानूनी उपबंध के हिंसा में हुए नुकसान की वसूली के लिए लखनऊ में कथित आरोपितों का सड़कों पर होर्डिंग्स व फोटो लगाना अवैध है। कोर्ट ने माना कि राज्य सरकार द्वारा इस तरह के होर्डिंग्स लगाना लोगों की निजता में दखल और संविधान के अनुच्छेद 21 का उल्लंघन है।

हाईकोर्ट ने जिला मजिस्ट्रेट और पुलिस कमिश्नर को निर्देश दिया कि 16 मार्च तक हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल के पास इस आदेश के संबंध में अनुपालन रिपोर्ट जमा की जाए। इसके खिलाफ उत्तर प्रदेश सरका सुप्रीम कोर्ट पहुंची है।

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