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कोरोना के साथ बारिश के मौसम में बढ़ी डायरिया फैलने की आशंका

कोरोना के साथ बारिश के मौसम में  बढ़ी डायरिया  फैलने की  आशंका
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बेगूसराय । Action India News

कोरोना संक्रमण के बीच बरसात के मौसम में डायरिया का खतरा बढ़ गया है। इसलिए कोरोना के साथ इससे बचने के लिए अधिक सावधान रहने की जरूरत है। विशेषकर नवजातों एवं बच्चों में डायरिया का खतरा अधिक होता है एवं उनकी उचित देखभाल भी समान रूप से जरुरी होती है।

इससे बचाव के लिए डायरिया की रोकथाम एवं इसके प्रबंधन के प्रति सजगता से ही अस्पताल जाने से निजात मिल सकती है। डॉ. रमण झा ने बुधवार को बताया कि बदलते मौसम में डायरिया का प्रकोप फैलने की प्रबल आशंका हो जाती है, इससे कोई भी ग्रसित हो सकता है।

डायरिया के कारण अत्यधिक निर्जलीकरण (डिहाइड्रेशन) होने से समस्याएं बढ़ जाती हैंं और उचित प्रबंधन के अभाव में यह जानलेवा भी हो जाता है। शिशु मृत्यु दर के कारणों में डायरिया भी एक प्रमुख कारण है।इसके लिए डायरिया के लक्षणों के प्रति सतर्कता एवं सही समय पर उचित प्रबंधन कर बच्चों को डायरिया जैसे गंभीर रोग से आसानी से सुरक्षित किया जा सकता है।

बचाव के लिए बच्चों का रखें विशेष ख्याल-

डॉक्टर के अनुसार डायरिया से बचाव के लिए नवजात बच्चों का विशेष ख्याल रखना जरूरी है। उन्हें नियमित रूप से छः माह तक सिर्फ स्तनपान कराएं, इससे डायरिया जैसी बीमारी से बचाव होता है।

डायरिया के लक्षण का पता चलते ही तुरंत चिकित्सकों से दिखा कर चिकित्सा परामर्श के अनुरूप उचित इलाज कराएं। घर एवं आसपास के परिसर, भोजन बनाने और खाने के समय साफ-सफाई रखने के अलावा शुद्ध जल का सेवन अनिवार्य है। ओआरएस एवं जिंक घोल निर्जलीकरण से वचाव करता है। हमेशा ओआरस एवं जिंक की गोली घर पर जरुर रखना चाहिए।

शरीर में नहीं होने दें पानी की कमी-

बारिश के मौसम में डायरिया का खतरा सबसे अधिक रहता है। डॉक्टर बताते हैं कि दस्त के कारण पानी के साथ जरूरी एल्क्ट्रोलाइट्स (सोडियम, पोटैशियम, क्लोराइड एवं बाईकार्बोनेट) का तेजी से ह्रास होता है।

बच्चों में इसकी कमी को दूर करने के लिए ओरल रीहाइड्रेशन सलूलन (ओआरएस) एवं जिंक घोल दिया जाता है। विश्व स्वास्थ संगठन के अनुसार बच्चों में 24 घंटे के दौरान तीन या उससे अधिक बार पानी जैसा दस्त आना डायरिया है।

शरीर में पानी की कमी से यह बीमारी होती है। इसलिए बच्चों को इससे बचाने के लिए सजग रहना चाहिए। ध्यान रहना चाहिए कि बच्चों में पानी की कमी नहीं हो। यदि संभव हो तो ओआरएस का घोल नियमित तौर पर बच्चे को देना चाहिए।

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