Action India
अन्य राज्य

चार धाम यात्रा परिषद का रहेगा अलग वजूद

चार धाम यात्रा परिषद का रहेगा अलग वजूद
X

  • देवस्थानम बोर्ड के गठन के बाद परिषद को लेकर चर्चाएं

  • चार धाम के विकास के लिए सहयोग करती रहेगी परिषद

देहरादून । एएनएन (Action News Network)

उत्तराखंड के चारों धामों के विकास के लिए एनडी तिवारी सरकार में गठित चार धाम यात्रा विकास परिषद का वजूद फिलहाल बना रहेगा। चारों धामों समेत 51 मंदिरों के संचालन के लिए बनाए गए देवस्थानम बोर्ड के कारण परिषद के भविष्य पर हाल-फिलहाल तो कोई संकट नहीं है। परिषद धामों के विकास के लिए सरकार को सहयोग करती रहेगी।बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री के साथ ही 51 अन्य मंदिरों को एक छतरी के नीचे लाते हुए सरकार ने देवस्थानम बोर्ड का गठन किया है। इससे पहले, वर्ष 2004 में चारों धामों की व्यवस्था को एक छतरी के नीचे लाने की मंशा के चलते ही एनडी तिवारी सरकार ने चार धाम यात्रा विकास परिषद का गठन किया था।

तब भी कोशिश ये ही थी कि चारों धामों की तमाम व्यवस्थाओं का संचालन एक केंद्रीयकृत बाॅडी करे, ताकि यात्रा व्यवस्थित रूप से संचालित होती रहे। मगर ऐसा हो नहीं सका। सीएम की अध्यक्षता वाली परिषद का ढांचा ही खड़ा ही नहीं हो पाया। परिषद सिर्फ सत्ताधारी दल के किसी नेता को उपाध्यक्ष की कुर्सी प्रदान कर उपकृत करने का जरिया ही बनकर रह गई। हरीश रावत सरकार ने अपने कार्यकाल में किसी को इस पद पर नियुक्त भी नहीं किया। त्रिवेंद्र सरकार ने जरूर इस पद पर नियुक्ति की।देवस्थानम बोर्ड को चारों धामों के अलावा 51 और मंदिरों के संचालन की जिम्मेदारी देते हुए उसके लिए सरकार ने ठोस विधायी इंतजाम किए हैं।

बकायदा एक्ट पास किया गया है। इसलिए अब यह तय है कि चारों धामों और 51 मंदिरों में जो कुछ भी होगा, वह देवस्थानम बोर्ड ही करेगा। अन्य किसी एजेंसी के लिए कोई गुंजाइश नहीं रह जाएगी। इन स्थितियों के बीच, नौकरशाही की तरफ से यह सुझाव भी सामने आए कि परिषद के काम को किसी तरह से बोर्ड के साथ जोड़ दिया जाए, लेकिन सरकार ने फिलहाल इसे खारिज कर दिया है। चार धाम यात्रा विकास परिषद के उपाध्यक्ष आचार्य शिव प्रसाद ममगांई के अनुसार, सरकार का साफ मानना है कि परिषद एक अलग इकाई के रूप में काम करती रहेगी। वह चार धाम के विकास के संबंध में सरकार को सहयोग करेगी।

Next Story
Share it