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कोरोना, बरसात और विरोध, चारधाम यात्रा पर बड़े अवरोध

कोरोना, बरसात और विरोध, चारधाम यात्रा पर बड़े अवरोध
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  • सभी की निगाहें 30 जून पर, धामों के कपाट खुले महीने भर से ज्यादा का समय हो गया

देहरादून । एएनएन (Action News Network)

चारधाम यात्रा पर 30 जून के बाद क्या स्थिति होगी ? इस पर सभी की निगाहें टिक गई हैं। यात्रा की राह में कोरोना, बरसात और तीर्थ पुरोहितों का विरोध बड़ी अड़चन बनकर खडे़ हुए हैं। ऐसे में सरकार बीच का कौन सा रास्ता निकालती है, यह देखने वाली बात होगी।

वैसे यात्रा की राह में तमाम चुनौतियों के अब भी खडे़ होने के बावजूद सरकार इस कोशिश में है कि कम से कम राज्य के श्रद्धालुओं के वहां पहुंचने की स्थिति बनाई जाए।

उत्तराखंड के चार धाम बदरीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री के कपाट खुले एक महीने से ज्यादा का समय हो चुका है, मगर कोरोना काल में चारधाम यात्रा की रौनक गुम है। लाॅक डाउन के बाद अनलाॅक की प्रक्रिया में सरकार के कदम आगे बढे़, तो मामूली प्रगति हुई है।

अभी सिर्फ इतना भर हो पा रहा है कि चारों धामों में संबंधित जिले के चुनिंदा यात्री ही वहां आ-जा पा रहे हैं। उत्तराखंड के आम नागरिक के लिए भी अभी तक चारों धामों की राह खुल नहीं पाई है। हालांकि सरकार इसके लिए पूरी गंभीरता से सोच रही है।

लोगों को 30 जून का इंतजार है।वैसे, चारधाम यात्रा की राह में अब भी कोरोना संक्रमण सबसे बड़ी अड़चन बना हुआ है। कोरोना के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। जुलाई में जिस तरह कोरोना संक्रमण का चरम बताया जा रहा है, सरकार को उसका भी ध्यान रखना है।

इसके बाद, दूसरी अड़चन बरसात है। मानसून उत्तराखंड में दस्तक दे चुका है और जुलाई के महीने में बारिश की चुनौती अपने अंदाज में परीक्षा लेगी। इसके अलावा, देवस्थानम् बोर्ड के विरोध करने वाले तीर्थ पुरोहितों ने अपना दायरा बढ़ा लिया है।

वह कोरोना के संकट को देखते हुए 30 जून के बाद यात्रा संचालित न करने पर जोर दे रहे हैं। इन स्थितियों के बीच शासकीय प्रवक्ता मदन कौशिक का कहना है कि यात्रा संचालन के लिए कोई भी फैसला करते वक्त सरकार सारे पहुलओं पर ध्यान देगी। इसके बाद, जो उचित होगा, वही किया जाएगा।

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