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'कागजों तक सीमित मुख्यमंत्री सेप्टिक टैंक सफाई योजना'

कागजों तक सीमित मुख्यमंत्री सेप्टिक टैंक सफाई योजना
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  • दिल्ली सरकार मोलरबंद में सेप्टिक टैंक सफाई के दौरान जिन दो मजदूरों की मृत्यु हुई है उनके परिजनों को एक-एक करोड़ रुपए का मुआवजा दें: आदेश

नई दिल्ली Action India News

दक्षिणी दिल्ली के बदरपुर विधानसभा क्षेत्र के मोलड़बंद में सेप्टिक टैंक साफ करने के दौरान दो मजदूरों की मृत्यु हो गई और एक युवक अस्पताल में जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहा है, लेकिन केजरीवाल सरकार की ओर से न तो संवेदनाएं व्यक्त की गई है और न ही उनके परिवारों को किसी प्रकार का मुआवजा दिया गया।

इस पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए दिल्ली भाजपा अध्यक्ष आदेश गुप्ता और दिल्ली विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष रामवीर सिंह बिधूड़ी ने प्रदेश कार्यालय में आयोजित प्रेसवार्ता को संबोधित किया। इस अवसर पर प्रदेश मीडिया प्रमुख नवीन कुमार, प्रदेश प्रवक्ता ऋचा पांडे मिश्रा एवं मोहन लाल गिहारा उपस्थित थे।

प्रेस वार्ता के पश्चात आदेश गुप्ता और रामवीर सिंह बिधूड़ी ने मृतक मजदूरों के परिजनों से मिलकर संवेदनाएं प्रकट की और उन्हें आश्वस्त किया कि दिल्ली भाजपा इस दुख की घड़ी में उनके साथ खड़ी है।

आदेश गुप्ता ने कहा कि यह सोचकर भी बहुत दुख होता है कि मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल कितनी सफाई से झूठ बोलकर लोगों को उनके हितों के नाम पर गुमराह करते हैं। मोलरबंद में हुई घटना मुख्यमंत्री केजरीवाल द्वारा शुरू की गई मुख्यमंत्री सेप्टिक टैंक सफाई योजना पर प्रश्नचिन्ह खड़ा करता है, असल में योजना सफाई से झूठ बोलो योजना थी।

नवम्बर 2019 में मुख्यमंत्री केजरीवाल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में मुख्यमंत्री सेप्टिक टैंक सफाई योजना का बड़े जोर-शोर से शुभारंभ किया था, कहा था कि 80 टैंक लाए जाएंगे और सेप्टिक टैंक की सफाई दिल्ली सरकार मुफ्त में करवायेगी, इसके विज्ञापनों पर करोड़ों खर्च किए गए, लेकिन वास्तविकता ढाक के तीन पात ही रही।

जिसका दुखद परिणाम है कि सेप्टिक टैंक की सफाई के दौरान दो युवकों की मृत्यु हुई और एक अन्य युवक गंभीर अवस्था में अस्पताल में भर्ती है, इसके जिम्मेदार मुख्यमंत्री केजरीवाल हैं। गुप्ता ने कहा कि केजरीवाल सरकार लोगों की सहूलियत के लिए जो घोषणाएं करती है वह सिर्फ एक चुनावी स्टंट होता है।

घोषणाओं के विज्ञापन पर केजरीवाल सरकार करोड़ों खर्च करने से नहीं हिचकिचाती है, लेकिन उन घोषणाओं को जमीन पर लागू करने के लिए 1 रूपया भी खर्च नहीं करती है। अगर अपनी ही की गई घोषणाओं को जमीन पर लागू नहीं करवा सकते हैं तो मुख्यमंत्री केजरीवाल को इस्तीफा दे देना चाहिए।

मुख्यमंत्री केजरीवाल ने लोगों को आश्वस्त किया था कि मुख्यमंत्री सेप्टिक टैंक सफाई योजना के तहत एक फोन कॉल पर उनके घरों के सेप्टिक टैंक की सफाई हो जाएगी, अब सेफ्टी टैंक की सफाई के दौरान किसी भी मजदूर की मौत नहीं हुयी लेकिन आज तक दिल्ली सरकार कच्ची कॉलोनियों के एक भी घर के सेप्टिक टैंक की सफाई नहीं करवाई है।

जल बोर्ड के चेयरमैन होने के बाद भी मुख्यमंत्री केजरीवाल की लापरवाही के कारण यमुना नदी में गंदगी फैल रही है। दिल्ली सरकार से हम यह मांग करते हैं कि सेप्टिक टैंक सफाई के दौरान जिन दो युवकों की मृत्यु हुई है उनके परिजनों को एक-एक करोड़ रुपए का मुआवजा दिया जाए और जो युवक अस्पताल में भर्ती है उसे 50 लाख का मुआवजा दें और उसके इलाज का सारा खर्च वहन करें। कागजों में सीमित मुख्यमंत्री सेप्टिक टैंक सफाई योजना को प्रत्यक्ष रूप से जमीन पर तत्काल प्रभाव से लागू किया जाए।

सफाई से झूठ बोलो योजना या विज्ञापनों से दिल्ली के लोगों का भला नहीं होगा बल्कि इसके लिए जमीन पर उतर कर काम करना होगा।

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