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बच्चे कहते हैं पहले नहाओ, तब करना मुझे प्यार

बच्चे कहते हैं पहले नहाओ, तब करना मुझे प्यार
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  • खुद के साथ परिजनों की सुरक्षा का रखती है

  • ख्यालसफाई महिला कर्मियों की जिंदाजिली ने दी मिसाल

अनूपपुर। एएनएन (Action News Network)

कर्तव्य की पराकाष्ठा इतनी मजबूत होती है कि उसका निर्वहन करने वाला भी कर्तव्यपराण हो जाता है, जिसमें लाभ और नुकसान की सकरी रेखा गुम जाती है। उसके कार्य के प्रति लगन को देखकर दूसरे भी प्रोत्साहित करते हैं। कुछ ऐसा ही सफाई महिला कर्मियों की जिंदाजिली मिसाल सामने आई है, जहां कोरोना संक्रमण के बढ़ते प्रकोप और घरों में कैद लोगों के बाद प्रतिदिन सफाई पर निकलने वाली सफाईकर्मियों को नगरवासी ने अंत में खुद ही कह डाला सभी लोग इस संक्रमण में घरों में है, तुम अभी काम पर मत आओ, हमलोग आसपास का हिस्सा खुद ही साफ कर लेंगे, लेकिन सफाईकर्मी भी कहती है, यह तो हमारा रोज का काम है।

हमें कुछ नहीं होगा। पसान नगरपालिका में कार्यरत समस्त महिला पुरुष सफाईकर्मी नगर को साफ सुथरा रखने में अपनी व अपने परिवार की सुरक्षा को भी त्याग कर जुटी है। नगर के लोगों को कोई परेशानी ना हो उन्हें कोई बीमारी ना हो, रोज नगर की सफाई कर रही है। सफाई के दौरान अनेक लोग ऐसे भी हैं जो शिकायत भी करते हैं तो कुछ इन सफाई कर्मियों का सम्मान भी करते हैं। हालांकि वर्तमान में पूरे देश में सफाईकर्मियों का सम्मान लोगों में बढ़ा है। सफाईकर्मी उर्मिला बताती है कि उसे सफाई करना अच्छा लगता है, उसके सफाई से नगर साफ दिखता है, लोगों को संक्रमण से बचाने में उनका योगदान मददगार साबित हो रहा है। वहीं प्रीतू मलिक कहती है आज बच्चा बच्चा कोरोना को लेकर जागरुक है।

काम के दौरान उन्हें किसी बात का भय नहीं होता। लेकिन जब घर पहुंचते हैं तो बच्चे व परिवार के लोग जरूर कहते हैं कि देश में करोना की बीमारी है कहीं आपको ना हो जाए। हम अपने बच्चों व परिवार को समझाते हैं कि कोई भी बीमारी गंदगी से होती है हम लोग तो गंदगी की ही सफाई करते हैं तो हमें बीमारी कैसे होगी। बच्चे कहते हैं मां काम से आने से बाद पहले नहाओं तब मुझे प्यार करों, तबतक दूर रहे। इसी तरह अंजना कहती है सफाई के दौरान स्वयं का भी ख्याल रखते हैं। वर्तमान में गम्भीर बीमारी फैली है, उसके लिए मुंह में मास्क लगाते हैं।

नगरपालिका द्वारा भी समझाइश दी गई है। काम के बाद घर जाकर पहले साबुन से हाथ मुंह धोकर नहा कर ही घर के अंदर जाते हैं। इसी प्रकार घर के लोगों को भी बार बार साबुन से हाथ धोने व सफाई से रहने के लिए कहते हैं। फिलहाल 21 दिनों तक लॉकडाउन के दौरान घर के बच्चें व परिवार के लोगों को घर से बाहर नहीं जाने देते और कुछ कार्य के लिए जब भी जाते हैं तो इस बात का हम स्वयं भी ख्याल रखते हैं कि लोगों से हमारी दूरियां बनी रहें, क्योंकि इस महामारी का सिर्फ एक ही इलाज है और वह है स्वयं का बचाव।

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