Top
Action India

चीन को मिला करारा सबक, पहले ऐसा राजनीतिक नेतृत्व नहीं था : ब्रिगेडियर सान्याल

चीन को मिला करारा सबक, पहले ऐसा राजनीतिक नेतृत्व नहीं था : ब्रिगेडियर सान्याल
X

कोलकाता । Action India News

ब्रिग्रडियार प्रबीर सान्याल का साफ तौर पर मानना है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के सशक्त नेतृत्व में भारत सरकार की सख्त नीतियों और शानदार कूटनीतिक पहल की वजह से चीन को इस बार करारा सबक सीखने को मिला है।

मंगलवार को "एक्शन इंडिया समाचार" से विशेष बातचीत में सेवानिवृत्त ब्रिगेडियर सान्याल ने चीन विस्तारवादी नीतियों से भारत की रक्षा का बडी साफगोई से विश्लेषण किया। उनका मानना है कि 1962 के युद्ध के समय तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू हर एक मोर्चे पर कमजोर पड़ गए थे।

उनकी विदेश से लेकर रक्षा नीति तक कमजोर थी। चीन ने अक्साई चीन पर कब्जा कर लिया, लेकिन उन्होंने देश से यह बात छुपा कर रखी। चीन तिब्बत के अंदर प्रवेश करता गया लेकिन नेहरू शांत बने रहे। इस वजह से चीन का मनोबल इतना बढ़ा कि 1962 के बाद से लेकर आज तक भारत की सीमा में घुसता रहता है।

चीन समस्या का स्थायी समाधान कैसे हो, इस बारे में पूछने पर ब्रिगेडियार सान्याल ने कहा कि इसका अंतिम विकल्प सैन्य कार्रवाई है लेकिन उसके पहले चीन पर आर्थिक, कूटनीतिक और राजनीतिक दबाव बनाए जाने की जरूरत है।

उन्होंने कहा कि वर्तमान केंद्र सरकार काफी ठोस रणनीति के साथ आगे बढ़ रही है, जिसकी वजह से चीन के हौसले पस्त हैं। उन्होंने कहा कि गलवान घाटी में हमारे जवानों ने जिस तरह से चीनी सैनिकों को मौत के घाट उतार कर सबक सिखाया है, उससे उसका मनोबल गिरा हुआ है।

इसके अलावा चीन आंतरिक तौर पर भी काफी परेशान है और वहां के राजनीतिक, आर्थिक तथा सामाजिक हालात भी अस्थिर हैं। इसके अलावा चीन विवाद में अमेरिका खुलकर भारत का साथ दे रहा है। जापान भी भारत् के साथ खड़ा है और जर्मनी भी।

दुनिया के अन्य देश भी चीन की विस्तारवादी नीतियों की वजह से खफा है और इस टकराव में भारत के पक्ष में खड़े हैं। इसकी वजह से चीन पर चौतरफा दबाव बना है और इस बार वह हद में रहना सीख जाएगा।

ब्रिगेडियर सान्याल ने कहा कि जब 62 की लड़ाई हुई थी उसी समय अगर चीन के खिलाफ आज जैसे सख्त तेवर अपनाए गए होते तो उसकी दोबारा हिम्मत ही नहीं पड़ती। उसके बाद से लेकर आज तक भारत का शीर्ष नेतृत्व कमजोर रहा है और हमारी नीतियां भी काफी ढीली ढाली रही है। इसके कारण उसका मनोबल बढ़ा हुआ था।

अब पहले डोकलाम में और अब गलवान में जैसे भारतीय सेना ने चीनी सैनिकों को जवाब दिया है और चीन पर चौतरफा कूटनीतिक दबाव बन रहा है, उससे यह तय है कि चीन को भारत की ताकत का अहसास भी हो गया है और भारतीय सेना का मनोबल भी बढ़ा है।

Next Story
Share it