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जनता का विश्वास बरकरार रखने और गलत परंपराओं से बचने के लिए विधायक जनता की आवाज सुनें : मुख्‍यमंत्री

जनता का विश्वास बरकरार रखने और गलत परंपराओं से बचने के लिए विधायक जनता की आवाज सुनें : मुख्‍यमंत्री
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जयपुर । Action India News

मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने प्रदेश में चल रहे सियासी संकट के बीच रविवार को विधायकों से अपील की है कि लोकतंत्र को बचाने, जनता का विश्वास बरकरार रखने और गलत परंपराओं से बचने के लिए आप जनता की आवाज सुनें। आप चाहे किसी भी राजनीतिक पार्टी के विधायक होे लेकिन मतदाताओं की भावना को समझ कर यह सुनिश्चित करें कि किस प्रकार प्रदेश के हितों के लिए जनता द्वारा चुनी हुई बहुमत प्राप्त सरकार मजबूती के साथ काम करती रहे और सरकार को अस्थिर करने के मंसूबे कामयाब नहीं हो सके।

गहलोत ने प्रदेश के समसत विधायकों को लिखे अपने पत्र में सरकार के विकास कार्यों और योजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकार ने संवेदनशील, पारदर्शी एवं जवाबदेह प्रशासन देते हुए शिक्षा, उच्च शिक्षा, चिकित्सा, बिजली-पानी, सड़क एवं आधारभूत सुविधाओं के विकास के साथ-साथ पंचायत समिति, उपखंड स्तर पर भी उल्लेखनीय फैसले किए हैं, जिनकी सर्वत्र प्रशंसा हुई है।

उन्होंने देश और प्रदेश में कोरोना संकट का जिक्र करते हुए कहा कि इस महामारी के कारण अचानक स्थितियां विकट हो गईं। कोरोना के खिलाफ हम सब मिलकर लड़ाई लड़ रहे हैं। हमने इस संकट के समाधान और जनता को राहत पहुंचाने के लिए सभी जनप्रतिनिधियों के सुझाव का सम्मान करते हुए उनके आधार पर कई फैसले भी किए हैं। आपके इस सहयोग से हम प्रदेश में कोरोना संक्रमण को आगे बढ़ने से रोकने में काफी हद तक सफल हुए हैं।

मुख्‍यमंत्री ने इस बात पर चिंता जाहिर की कि कोरोना महामारी इतना भयंकर रूप ले चुकी है कि यह किस रूप में जाकर रुकेगी और किस परिवार को उसका कहर झेलना पड़ेगा, इसके बारे में कुछ भी कहना मुश्किल है। ऐसी विकट परिस्थिति में भी हमारे कुछ साथी और विपक्ष के कतिपय नेता मिलकर लोकतांत्रिक तरीके से चुनी हुई हमारी सरकार को अस्थिर करने के षड्यंत्र में लगे हुए हैं, यह दुर्भाग्यपूर्ण है।

उन्‍होंने कहा कि यह 1993-96 के दौरान भी विधायकों की खरीद कर तत्कालीन मुख्यमंत्री भैरों सिंह शेखावत के सरकार को गिराने के प्रयास किए गए थे। उस समय भी मैंने केंद्रीय राज्य मंत्री एवं प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष होने के नाते तत्कालीन राज्यपाल बलिराम भगत एवं प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हा राव से मिलकर व्यक्तिगत विरोध किया कि चुनी हुई सरकार को गिराना लोकतांत्रिक मूल्यों के विरुद्ध है और मैं इसे राजनीतिक महापाप की श्रेणी में मानता हूं।

दल विरोधी कानून का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि राजस्थान में छह बसपा विधायकों ने इस कानून के दायरे में रहकर राज्य में स्थिर सरकार एवं अपने-अपने क्षेत्र में विकास कार्यों में सुविधा के लिए कांग्रेस विधायक दल में विलय का निर्णय लिया, जो की विधि सम्‍मत है, परंतु तोड़फोड़ एवं खरीद फरोख्त करके सरकार को अस्थिर करने को किसी भी दृष्टि में न्‍यायोचित नहीं माना जा सकता, यह स्वस्थ लोकतांत्रिक परंपराओं और मर्यादाओं के विरुद्ध है।

उन्होंने कहा कि चुनाव में हार-जीत होती रहती है। जनता का फैसला शिरोधार्य रहता है। यही परंपरा रही है। जनता से चुनकर जो नुमाइंदे आते हैं, चाहे वह किसी भी पार्टी के गुट के क्यों ना हों, हम सब उनका सम्मान करते हैं। हर उनके क्षेत्र की, हर जायज मांग को बिना भेदभाव के पूरा करने का प्रयास करते हैं। प्रदेश के सभी क्षेत्रों का चहुंमुखी विकास ही हमारा लक्ष्य है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि प्रदेश वासियों के व्यापक हित में सभी विधायक सच्चाई के साथ खड़े रहेंगे और राज्य के विकास और समृद्धि के लिए जनता से किए गए वायदे को पूरा करने में अपना सहयोग करेंगे।

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