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ड्रिल थेरेपी से फोबिया, मनोग्रस्तता बाध्यता के रोगी हो रहे ठीक : डॉ राकेश

ड्रिल थेरेपी से फोबिया, मनोग्रस्तता बाध्यता के रोगी हो रहे ठीक : डॉ राकेश
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जौनपुर । एएनएन (Action News Network)

वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय जौनपुर के व्यावहारिक मनोविज्ञान विभाग द्वारा “उन्नत मनोवैज्ञानिक स्वास्थ्यः मनोचिकित्सा के क्षेत्र में नवीन प्रगति“ पर तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय वेबीनार के समापन पर मानसिक स्वास्थ्य संस्थान एवं चिकित्सालय आगरा के वरिष्ठ नैदानिक मनोवैज्ञानिक डॉ. राकेश जैन ने कहा कि संज्ञानात्मक ड्रिल थेरेपी से फोबिया, मनोग्रस्तता बाध्यता के रोगियों को ठीक किया जा रहा है।

डॉ. राकेश जैन ने शुक्रवार को अंतरराष्ट्रीय बेविनार के अंतिम दिन कॉग्निटिव ड्रिल थेरेपी पर अपना व्याख्यान दिया। जो डॉ. जैन द्वारा स्वयं विकसित किया गया है। उन्होंने बताया कि इस चिकित्सा पद्धति में रोगी को अपने संवेगों को शब्दों के रूप में अभिव्यक्त करना होता है। जिसके द्वारा उसके संज्ञानात्मक क्षमता को परखा जाता है। रोगी जब शब्दों को बार-बार दोहराता है तो वह अपने भय का सामना करने के लिए अपने आपको तैयार पाता है।

गौतम बुद्धा विश्वविद्यालय नोएडा के मनोविज्ञान एवं मानसिक स्वास्थ्य विभाग के डॉ. आनंद प्रताप सिंह ने न्यूरोफीडबैक थेरेपी के लाभों पर अपनी बात रखते हुए कहा कि यह चिकित्सा पद्धति बिना किसी साइड इफेक्ट के मरीजों में घबराहट की बीमारी दूर करने में कारगर साबित हो रही है। घबराहट की बीमारी को दूर करने के लिए दवाइयों का सेवन या अन्य चिकित्सा पद्धति में साइड इफेक्ट का खतरा रहता है और समय भी अधिक लगता है। जबकि न्यूरोफीडबैक थेरेपी कम समय में मरीज को पूरी तरह ठीक कर रही है।

इसी प्रकार एमिटी विश्वविद्यालय दुबई की डॉ. अनुमेहा रॉय ने वर्तमान परिवेश में तनाव प्रबंधन की युक्तियों पर चर्चा की। बताया कि हम हास्य को एक चिकित्सा पद्धति की तरह प्रयोग कर सकते हैं। तनाव प्रबंधन की बहुत सारी मनोवैज्ञानिक युक्तियां हैं जो मनोविज्ञान के सिद्धांतों पर आधारित हैं। इनमें मुख्य रूप से डिसोसिएशन तकनीक, ध्यान एवं योग, योग निद्रा, समय प्रबंधन आदि प्रमुख हैं। कोई भी व्यक्ति इन तकनीकों का प्रयोग करके अपने तनाव का बेहतर समाधान कर सकता है। सेमिनार की संयोजक व्यावहारिक मनोविज्ञान विभाग की असिस्टेंट प्रो. अन्नू त्यागी ने संचालन एवं ज्योत्सना गुलाटी ने धन्यवाद ज्ञापन किया। सेमिनार के आयोजन समिति में डॉ. मनोज मिश्र, प्रो. अजय प्रताप सिंह, डॉ. जान्हवी श्रीवास्तव, डॉ. मनोज पांडेय आदि शामिल रहे।

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