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राजधानी पर हारी बाजी जीतने को कांग्रेस बेचैन

राजधानी पर हारी बाजी जीतने को कांग्रेस बेचैन
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देहरादून। एएनएन (Action News Network)

गैरसैंण ग्रीष्मकालीन राजधानी के मामले में बाजी हारने के बाद कांग्रेस खासी बेचैन है। वह किसी भी तरह से हारी बाजी जीतने की कोशिश में है। यही कारण है कि 2017 के चुनाव घोषणापत्र में गैरसैंण मसले पर पूरी तरह से अस्पष्ट रही कांग्रेस अब स्थायी राजधानी का राग अलापने लगी है। उसके बडे़ नेताओं ने कहना शुरू कर दिया है कि कांग्रेस सत्ता में आई तो वह गैरसैंण को स्थायी राजधानी बना देगी।

देखा जाए, तो कांग्रेस राजधानी मसले पर अपनी समीक्षा जब भी करेगी, वह इस बात को जरूर मानेगी कि बहुगुणा और हरीश रावत सरकार के जमाने में मिली बढ़त का वह लाभ नहीं ले पाई। 2012 में विजय बहुगुणा सरकार बनने के कुछ समय बाद ही वहां पर पहली कैबिनेट बैठक आयोजित की गई थी। हालांकि तब भी कांग्रेस ने राजधानी पर कुछ नहीं कहा था, लेकिन गैरसैंण राजधानी के मसले पर पार्टी की तरफ से सकारात्मक संकेत जरूर चला गया था।

इसके बाद हरीश रावत सरकार के जमाने मेें तो कांग्रेस सरकार और संगठन के प्रयास काफी आगे तक गए। वहां पर सत्र आयोजित किए गए और विधान भवन बनकर तैयार हो गया। एक समय गैरसैंण राजधानी के सवाल पर कांग्रेस की भाजपा पर काफी बढ़त दिखाई दे रही थी, लेकिन सरकार से बेदखल होते होते तक कांग्रेस कोई ऐलान नहीं कर पाई।2017 के विधानसभा चुनाव के दौरान भाजपा ने जहां अपने घोषणापत्र में ग्रीष्मकालीन राजधानी की बात की, वहीं कांग्रेस ने गैरसैंण के मसले को छुआ तो सही लेकिन सिर्फ वहां के विकास की बात की और किसी तरह की राजधानी के वादे से खुद को अलग रखा।

अब यह कांग्रेस की रणनीतिक चूक मानी जा रही है, जिसकी क्षतिपूर्ति के लिए पूरी पार्टी नए सिरे से जुट गई है। कांग्रेस अध्यक्ष प्रीतम सिंह, नेता प्रतिपक्ष इंदिरा हद्येश औैर मुख्यमंत्री हरीश रावत के सत्ता में आने पर स्थायी राजधानी बनाने के बयान सामने आए हैं। अब इस पर जनता कितना भरोसा कर पाती है, यह देखने वाली बात है। कांग्रेस के प्रदेश महामंत्री नवीन जोशी का कहना है कि गैरसैण में स्थायी राजधानी ही बननी चाहिए, जो कांग्रेस ही बना सकती है।

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