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नौकरी से निष्कासित कर दिया गया कोरोना वीर योद्धाओं को सम्मान, 5वें दिन भी धरना प्रदर्शन जारी

कठुआ। एएनएन (Action News Network)

पिछले 5 दिन से लगातार जीएमसी कठुआ परिसर में धरने पर बैठे एसआरओ 24 के तहत उनकी सेवाओं से निष्कासित किए गए कांट्रेक्चुअल वर्कर्स की सुध लेने कोई नहीं पहुंचा। वहीं मंगलवार को भी स्वास्थ्य कर्मचारियों ने जिला प्रशासन व जीएमसी कठुआ प्रशासन के खिलाफ सोशल डिस्टेंसिंग को ध्यान में रखते हुए धरना प्रदर्शन किया। वहीं मंगलवार को धरना प्रदर्शन पर बैठे कुछ स्वास्थ्य कर्मचारियों का शिष्टमंडल जिला उपायुक्त से मिलने जिला सचिवालय पहुंचे, लेकिन डीसी कठुआ द्वारा बड़ा अटपटा सा जवाब दिया गया।

डीसी कठुआ से मिलने गए शिष्टमंडल में पूजा मेहरा ने बताया कि डीसी ने कहा कि अब आपको इस तरह की आदत डाल लेनी चाहिए, क्योंकि एसआरओ 24 की गाइडलाइन के तहत कॉन्ट्रैक्ट बेस पर नौकरी करने वालों की समय अवधि पूरी होने के बाद उन्हें उनकी सेवाओं से निष्कासित किया जाएगा। हैरानगी की बात यह है कि एक तरफ देश के प्रधानमंत्री इस आपदा घड़ी में जिस वक्त कोरोना वायरस महामारी पूरे विश्व में अपने पैर पसार चुकी है। उस दौरान देश के प्रधानमंत्री ने अपील की थी कि इस आपदा समय में कोई भी सरकारी व निजी संस्था अपने मुलाजिम को नौकरी से नहीं निकालेगा, बल्कि घर बैठे उन्हें तनख्वाह भी देंगे।

वहीं दूसरी ओर जीएमसी कठुआ प्रशासन ने पीएम मोदी की अपील की धज्जियां उड़ाते हुए 47 के करीब जूनियर स्टाफ कर्मचारियों को उनकी सेवाओं से निष्कासित कर दिया है। वहीं पिछले 5 दिन से धरने प्रदर्शन पर बैठे स्वास्थ्य कर्मचारियों का कहना है कि इस वक्त जीएमसी प्रशासन को कौन सी ऐसी मजबूरी आ गई कि इस मुश्किल घड़ी में जब देश को इन युद्ध वीरों की जरूरत है। इस कठिन घड़ी में अस्पतालों में इन स्वास्थ्य कर्मचारियों की ज्यादा जरूरत है और जीएमसी कठुआ को क्या आन पड़ी उसने इस कोरोना वायरस महामारी की आड़ में इनको इनकी सेवाओं से तत्काल निष्कासित कर दिया। हालांकि एसआरओ 24 की गाइडलाइन यह भी बताती है कि 1 साल से लेकर 6 साल तक एसआरओ 24 के तहत नौकरी कर सकते हैं।

लेकिन मात्र 1 साल के बाद ही इन्हें इनकी सेवाओं से हटा दिया। वहीं कुछ स्वास्थ्य कर्मचारियों ने बताया कि जीएमसी कठुआ के प्रिंसिपल का कहना है कि इस वक्त आर्थिक स्थिति बहुत तंग है, जिसकी वजह से वह इन कर्मचारियों को तनख्वाह नहीं दे पाएंगे इसलिए इन्हें निकाला गया है। लेकिन हैरानी की बात यह है कि एक तरफ प्रधानमंत्री इस आपदा स्थिति में किसी को भी नौकरी से ना निकालने और घर बैठे तनख्वाह देने की अपील कर रहे हैं लेकिन जीएमसी कठुआ प्रशासन ने इन 47 कांट्रेक्चुअल कर्मचारियों को इनकी सेवाओं से तत्काल निष्कासित कर दिया है। वहीं इन कोरोना वीर योद्धाओं का कहना है कि जब तक इनकी सेवाओं को जारी नहीं रखा गया तब तक इनका धरना प्रदर्शन जारी रहेगा।

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