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कोरोना का कहर, चारधाम यात्रा का क्या होगा

कोरोना का कहर, चारधाम यात्रा का क्या होगा
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  • पर्यटन के लिहाज से की गई कई बुकिंग हो रहीं रद्द

  • चारधाम यात्रा में अभी महीने भर से ज्यादा का समय शेष

देहरादून। एएनएन (Action News Network)

उत्तराखंड के गढ़वाल क्षेत्र की एक हिसाब से लाइफ लाइन चारधाम यात्रा का कोरोना के कहर के बीच इस बार क्या होगा, यह सवाल फिजा में तैरने लगा है। हालांकि अभी एक महीने से ज्यादा का समय चारधाम यात्रा के श्रीगणेश में शेष है। वैसे चारधाम यात्रा से किसी न किसी रूप में जुडे़ लोग आशंकित होने लगे हैं। दरअसल पर्यटन, खास तौर पर साहसिक पर्यटन से जुडे़ कुछ इवेंट हाल के दिनों में निरस्त होने से यात्रा से जुड़े लोग आशंकित हैं।

तमाम पर्यटकों ने होटलों की अपनी अग्रिम बुकिंग निरस्त करा ली है। यह सारी स्थिति आशंका का माहौल बना रही है।इन स्थितियों के बीच तमाम लोगों के ये भी तर्क हैं कि केदारनाथ आपदा के बाद श्रद्धालुओं के कदम चारधाम आने से नहीं डगमगाए तो कोरोना वायरस का खतरा भी उन्हें नहीं रोक सकता। फिर यात्रा शुरू होने में अभी एक महीने से ज्यादा का समय है। तब तक स्थिति संभल जाएगी। इस बार यात्रा सीजन का श्रीगणेश 26 अप्रैल से हो रहा है।

दूसरी तरफ अभी तक की स्थिति यह है कि मार्च में लैंसडौन, मसूरी, रानीखेत, कौसानी जैसी जगहों पर होटलों की बुकिंग का जो रूझान मिलना शुरू हो जाता था, वह फिलहाल दिखाई नहीं दे रहा है। उत्तरकाशी और चमोली जिले में ट्रैकिंग के जो इवेंट पूर्व में प्रस्तावित किए गए थे, उनमें से कुछ के कोरोना के कारण रद्द होने की जानकारी है।कोरोना वायरस के खतरे को अलग रखते हुए बात की जाए तो इस बार भी चारधाम यात्रा में यात्रियों की संख्या को लेकर सरकार, खास तौर पर पर्यटन और धर्मस्व तीर्थाटन विभाग बहुत ज्यादा उम्मीदों से भरा रहा है।

इसकी वजह यात्रा की टाइमिंग रही है। पिछली बार मई के दूसरे सप्ताह में यात्रा शुरू हो पाई थी। अपेक्षाकृत जल्दी यात्रा के शुरू होने के कारण इससे जुडे़ हर वर्ग को लाभ मिलने की संभावना मानी जा रही है। पर्यटन और धर्मस्व तीर्थाटन मंत्री सतपाल महाराज का कहना है कि चारधाम यात्रा में पिछली बार की तुलना में इस बार ज्यादा लोग आएंगे। पिछले यात्रा सीजन में 30 लाख से ज्यादा श्रद्धालु चारधाम पहुंचे थे। केदारनाथ में तो यात्रियों की संख्या अप्रत्याशित रूप से दस लाख के करीब पहुंच गई थी।

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