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बिहार में जांच सबसे कम और कोरोना केस की दर देश में सबसे ज़्यादाः तेजस्वी

बिहार में जांच सबसे कम और कोरोना केस की दर देश में सबसे ज़्यादाः तेजस्वी
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  • 11-17 जुलाई के आंकड़ों को देखें तो राज्य में नये केसों की दर 13 %

  • बिहार कोरोना का नेशनल हॉटस्पॉट ही नहीं, ग्लोबल हॉटस्पॉट बनने की ओर

पटना ।

नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने शनिवार को कहा कि बिहार में जांच सबसे कम और केस की दर देश में सबसे ज़्यादा है। आबादी और क्षेत्रफल के लिहाज से बिहार के समकक्ष राज्य 30-40 हजार जांच प्रतिदिन कर रहे हैं, लेकिन बिहार में बमुश्किल पिछले 3 दिनों से 10 हजार जांच की जा रही है। विगत 4 महीनों में बिहार में प्रतिदिन 4159 औसत जांच की गई है। नीतीश सरकार कितना भी छुपा ले, लेकिन इस बात की प्रबल आशंका हो गई है कि बिहार कोरोना का नेशनल हॉटस्पॉट ही नहीं, बल्कि ग्लोबल हॉटस्पॉट बनने की ओर अग्रसर है।

उन्होंने कहा कि पिछले एक हफ्ते में कम जांच के बावजूद प्रतिदिन एक हजार से ज्यादा नए केस पाये जा रहे हैं। 11-17 जुलाई के आंकड़ों को देखें तो नये केसों की दर 13 % है जो देश में सबसे ज्यादा है। यह इस बात का इशारा करती है कि संक्रमण के फैलाव के अनुपात में बिहार में जांच कहीं भी नहीं है।

तेजस्वी ने कहा कि जिस हिसाब से बिहार में केस बढ़ रहे हैं, अगर प्रतिदिन 30-35 हजार जांच हो तो रोज 4-5 हजार नये पॉजिटिव मरीज मिलेंगे और संक्रमण में बिहार देश में सबसे ऊपर आ जायेगा। बिहार के लगभग सभी जिलों को संक्रमण ने जकड़ लिया है। जहां घनी आबादी है वहां तो और भी बुरा हाल है। पटना का हाल देख लीजिये,100 से ज्यादा कंटेनमेंट जोन फ़िलहाल बनाये गए हैं।

उन्होंने कहा कि कोरोना संक्रमित मरीजों का इलाज कैसे हो रहा, आप सब उससे वाकिफ हैं। मरीज अस्पतालों की चौखट पर तड़प-तड़प कर मर जा रहे हैं, लेकिन उनका इलाज नहीं किया जा रहा। आईसीयू में भर्ती मरीजों का ऑक्सीजन, इंजेक्शन उनके परिजन लगा रहे हैं। मरीजों की देख-भाल करने वाला कोई नहीं है। सब भगवान भरोसे। लोग जांच के लिए लाइन में खड़े रह रहें, लेकिन उसमें भी पैरवी और पहुंच वालों की ही सुनी जा रही।

नीतीश ने पिछले लॉकडाउन में कुछ नहीं किया

तेजस्वी ने कहा कि पिछले लॉकडाउन के दौरान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कुछ नहीं किया। लॉकडाउन आपको सिर्फ वक़्त देता है इससे लड़ने की तैयारी के लिए। ये सिर्फ एक पाउस बटन है। अगर आपने जांच क्षमता नहीं बढ़ायी, व्यापक जांच नहीं की, अस्पतालों का क्षमतावर्धन नहीं किया तो फिर लॉकडाउन का कोई औचित्य ही नहीं है।

कोरोना संक्रमण की भयावहता देख आ रही केंद्रीय टीम

कोरोना के साथ-साथ बाढ़ से भी हमारे लोग परेशान हैं। लोगों के भरोसे का पुल और सब्र का बांध भी टूट रहा है। कोरोना संक्रमण की भयावहता और गंभीर स्थिति को देखते हुए केंद्रीय टीम आ रही है। मैं इन अधिकारीयों को धन्यवाद देता हूं कि उन्होंने बिहार सरकार और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की विफलता और निष्क्रियता को देखते हुए खुद ही कमान संभालने बिहार आ रहे हैं। मैं अनुरोध करूंगा की वस्तुस्थिति और जमीनी हकीकत को देखते हुए कदम उठाएं। आंकड़ों में पारदर्शिता लाने को निर्देशित करें। केंद्र सरकार से विशेष सहायता दिलाने का काम करें। ऑक्सीजन कॉसंट्रेटर, टेस्टिंग किटों की ज़्यादा से ज़्यादा आपूर्ति करें।

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