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कोरोना आपदा : 500 गुना बढ़ा मास्क, सैनेटाइजर, ग्लब्स का कारोबार

कोरोना आपदा : 500 गुना बढ़ा मास्क, सैनेटाइजर, ग्लब्स का कारोबार
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मेरठ । एएनएन (Action News Network)

कोरोना आपदा के चलते लागू लाॅकडाउन में जहां तमाम कारोबार तबाह हो गए है, वहीं मास्क, ग्लब्स और सैनेटाइजर का कारोबार 500 गुना तक बढ़ गया है। होलसेल से लेकर रिटेल तक में यह आइटम बाजार में खूब बिक रहे हैं। इसके साथ खांसी, सर्दी-जुकाम, बुखार की दवाओं की बिक्री में भी बड़ा उछाल आया है।

लाॅकडाउन से पहले मेरठ में प्रतिदिन लगभग छह करोड़ रुपये का दवा कारोबार होता था। इनमें से लगभग पांच करोड़ रुपये का होलसेल और एक करोड़ रुपये का रिटेल कारोबार शामिल है। लाॅकडाउन की घोषणा के बाद से दवा खरीद का कारोबार नए दौर में प्रवेश कर गया है। अभी तक आम जनजीवन में उपेक्षित चल रहे मास्क, सैनेटाइजर, ग्लब्स की बिक्री में रिकाॅर्ड उछाल आया है। कोरोना वायरस के संक्रमण से बचने के लिए जिस तरह से इन सभी चीजों का उपयोग बताया गया। उससे लोगों में इन्हें खरीदने की होड़ लग गई है। एक समय आया कि बाजार से ग्लब्स, मास्क और सैनेटाइजर गायब हो गया। मेरठ के दवा बाजार में इन सभी सर्जिकल आइटम्स की डिमांड बेतहाशा बढ़ गई है।

महंगे दामों पर बेची गई सारी चीजें

आमतौर पर मास्क, सैनेटाइजर और ग्लब्स की मांग अस्पतालों और डाॅक्टरों के यहां होती थी। कुल दवा कारोबार का यह केवल दस फीसदी था। इसकी वजह आम लोगों के इन आइटम्स से दूरी बनाना थी। कोरोना वायरस के संक्रमण के बाद एकाएक बाजार में इन सभी चीजों की मांग बढ़ गई। दुकानदारों ने औने-पौने दामों पर इन्हें बेचा। होलसेल में एक से दो रुपये तक बिकने वाला सर्जिकल मास्क 50-70 रुपये तक में बेचा गया। डबल लेयर के मास्क 250 रुपये तक के बिके। डाॅक्टरों के लिए अनिवार्य एन-95 श्रेणी का मास्क भी मोटी कीमत पर बिका। ऐसी ही हालत सैनेटाइजर और ग्लब्स की हो गई। यह सारा सामान बाजार से गायब हो गया। पहले मांग कम होने के कारण बाजार में ज्यादा माल नहीं था। मुनाफाखोरों ने इसका जमकर फायदा उठाया।

दवा की बजाय चमक रहा ग्लब्स, मास्क, सैनेटाइजर का कारोबार

जिला मेरठ कैमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स एसोसिएशन के महामंत्री रजनीश कौशल रज्जन ने बताया कि कोरोना के कारण खैर नगर के होलसेल मार्किट और दूसरे मेडिकल स्टोरों पर खांसी, सर्दी-जुकाम, बुखार की दवाइयों की बिक्री बढ़ी है। जबकि अन्य दवाओं की बिक्री में कमी आई है। वहीं मास्क, ग्लब्स, सैनेटाइजर के कारोबार में लगभग 500 गुना तक बढ़ोतरी हो गई। खैर नगर के थोक सर्जिकल विक्रेता मनोज शर्मा का कहना है कि पहले इन सभी सामान का कारोबार गिना-चुना होता था। अब होलसेल और रिटेल में मास्क, सैनेटाइजर, हैंड ग्लब्स की बिक्री सबसे ज्यादा हो रही है। इस समय करोड़ों रुपये में इन चीजों का कारोबार पहुंच गया है।

सरकार के रेट तय करने से काबू में आए हालात

कोरोना आपदा के बाद शुरुआत में दुकानदारों ने मास्क, सैनेटाइजर व ग्लब्स की जमकर कालाबाजारी की और मुंहमांगें दामों पर सामान बेचा। इन सामान को बनाने वालों ने भी मनमानी एमआरपी डालकर लोगों से पैसे वसूले। जेनस्टार औषधि केंद्र के संचालक अंकुर सहारन का कहना है कि इस मामले की जानकारी मिलने पर केंद्र सरकार हरकत में आई और उसने सभी चीजों की अधिकतम कीमत तय कर दी। इसके बाद हालात काबू में आए और लोगों की जेब कटनी बंद हो गई।

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