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कोरोना संकट में डाकिए देवदूत की भूमिका में

शिमला । एएनएन (Action News Network)

कोरोना संकट काल में डाकिए हजारों लोगों के लिए देवदूत साबित हो रहे हैं। फिर चाहे वह बीमार दवा का इंतजार कर रहे बीमार हों अथवा सामाजिक सुरक्षा पेंशन की इंतजार में बैठे वृद्ध व विकलांग, आवश्यक सामान की प्रतीक्षा कर रहे आमजन, डाक विभाग के डाकिए लोगों को आवश्यकता की प्रत्येक सामग्री पहुंचा कर मदद कर रहे हैं। इंडिया पोस्ट देश का अहम विभाग है। पहाड़ों में मनी ऑर्डर अर्थव्यवस्था खत्म होने के बावजूद पोस्टल सर्विस को एसेंशियल सर्विसेज में रखा गया है। लॉकडाउन में भी यह विभाग पुलिस, सेना और मेडिकल क्षेत्र की तरह ही अपनी सेवाएं दे रहा है। आम दिनों की तरह इस समय हर एक पोस्ट ऑफिसेज में दवाईयों को भेजने का ज्यादा काम हो रहा है। लोगों के लिए इससे बेहद राहत मिल रही है। अगर आपने किसी को दूसरे शहर या राज्य में दवाई भेजनी है तो उसके लिएआप पो रजिस्टर्ड पार्सल या स्पीड पोस्ट से दवाई भेज सकते है।

सीनियर पोस्टमास्टर हरदेव शर्मा ने बताया कि डाक विभाग लॉकडाउन में लोगो की सुविधा के लिये बेहतरीन कार्य कर रहा है। शिमला में डाक विभाग के कर्मचारी अपनी जान की परवाह किए बिना बुजुर्गों की पेंशन , दवाइयां और अन्य सामान की डिलीवरी कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि शिमला पोस्ट आफिस में 450 एसेंशियल आईटम बुक हुई है जो हिमाचल ओर देश के दूसरे राज्यो में मेल शेड्यूल के माध्य्म से भेजी गई है। उन्होंने बताया कि शिमला जीपीओ में 780 लोगो को हमारे डाकियों द्वारा आवश्यक सामग्री बांटी गई।

हरदेव शर्मा ने बताया कि रविवार वाले दिन हमारे तीन पोस्टमेन और एक पब्लिक रिलेशन इंस्पेक्टर लोगो को घर जाकर पूरे शिमला में दवाइयां ओर अन्य एसेंशियल आईटम बांट रहे है और सोमवार से शनिवार तक हम 33 से 40 फीसदी स्टाफ के साथ घर घर जाकर लोगो को सुविधा दे रहे है। पार्सल को पहले सेनिटाइज किया जाता है फिर पार्सल की डिलवरी की जाती है। यहां तक कर्मी अपना बॉल पेन भी डिलीवरी के समय लोगों के साथ शेयर नहीं करते। लॉकडाउन में जब लोगों का घरों से निकलना बंद है तो डाक विभाग के कर्मी मरीजों की सेहत का ध्यान रखते हुए जितना जल्दी हो सके दवाइयों के पार्सल लोगों के घर द्वार प्राथमिकता से पहुंचा रहे हैं।

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