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कोरोना काल में सरकारी शिक्षिका 'प्रतिमा' बनीं रोल मॉडल

कोरोना काल में सरकारी शिक्षिका प्रतिमा बनीं रोल मॉडल
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बलिया । एएनएन (Action News Network)

कोरोना काल में लॉकडाउन के कारण शैक्षणिक गतिविधियों पर लगे 'ग्रहण' को परिषदीय विद्यालय की शिक्षिका प्रतिमा उपाध्याय खत्म करने में जुटी हैं। अपने विद्यालय के बच्चों को शिक्षा से जुड़े रखने के लिए ऑनलाइन गतिविधियों का सहारा ले रहीं प्रतिमा पूरे जिले के लिए रोल मॉडल बन गई हैं।

जिला मुख्यालय से सटे दुबहड़ शिक्षा क्षेत्र अंतर्गत प्राथमिक विद्यालय अमृतपाली में बतौर प्रधानाध्यापक प्रतिमा उपाध्याय अपने विद्यालय में नामांकित बच्चों की प्यारी मैम हैं। विद्यालय में पठन-पाठन के लिए वर्षों से तकनीक का सहारा ले रहीं हैं। शिक्षा में नवाचार के जरिए उन्होंने अपने विद्यालय को प्राइवेट विद्यालयों को भी मात दिया है। नए शैक्षिक सत्र की ठीक से शुरूआत भी नहीं हुआ था कि कोरोना ने देश में दस्तक दे दिया। सभी शैक्षणिक गतिविधियों पर विराम लग गया। ऐसे में लंबे समय तक शैक्षणिक वातावरण से दूर रहकर बच्चों में शिक्षा के प्रति मोहभंग न हो, इसके लिए प्रतिमा उपाध्याय ने समय रहते कदम उठाए।

सरकारी फरमान आने से सप्ताह भर पहले से बच्चों को ऑनलाइन पढ़ाने में जुट गईं। उनके लिए बच्चों से ऑनलाइन जुड़ने में खास दिक्कत भी नहीं हुई। उन्होंने पहले से ही एक व्हाट्सएप ग्रुप बनाया हुआ था। जिस पर बच्चे उन्हें अक्सर गुड मॉर्निंग आदि मैसेज भेजते रहते हैं। लिहाजा उनकी ऑनलाइन क्लास चुटकियों में शुरू हो गई।

प्रधानाध्यापक प्रतिमा उपाध्याय के सामने अब चुनौती यह थी कि कैसे विद्यालय के सारे बच्चों को ऑनलाइन जोड़ा जाय। इसके लिए उन्होंने विद्यालय प्रबंधन समिति व अन्य अभिभावकों का सहारा लिया। इसके लिए उन्होंने विद्यालय प्रबंधन समिति व अन्य अभिभावकों का सहारा लिया। सभी से कहा कि जिन बच्चों के पास एंड्रायड फोन हैं और वे विद्यालय के ग्रुप से नहीं जुड़े हैं, उन्हें भी जोड़ने को कहें। इसके बाद एक-एक कर एंड्रायड फोन वाले ब​च्चे जुड़ते चले गए।

इसके बाद प्रतिमा उन्हें करीब दो घंटे ऑनलाइन पढ़ाती हैं। होमवर्क भी देती हैं। फिर दोपहर तीन बजे से बच्चे उन्हें होमवर्क पूरा कर भेजना शुरू करते हैं। जिन्हें चेक कर दोबारा भेजती हैं। इस तरह से विद्यालय में नामांकित करीब 30 से 35 प्रतिशत बच्चों को प्रतिमा ऑनलाइन पढ़ा रही हैं। इसके अलावा जिन बच्चों के पास एंड्रायड फोन नहीं है या वे एंड्रायड फोन वाले बच्चों से दूर रहते हैं, यदि उनके अभिभावकों के पास फीचर फोन हैं तो उन्हें वायस मैसेज भेजकर गणित के सवाल बताती हैं।

प्रतिमा उपाध्याय बताती हैं कि तकनीक के इस माध्यम से शत-प्रतिशत बच्चों तक तो नहीं पहुंच पा रही हूं, काफी हद तक मुझे सुकून मिलता है। बताया कि ऑनलाइन माध्यम से बच्चों को पढ़ाने का एकमात्र उद्देश्य उन्हें शिक्षा से जोड़े रखना है। कोर्स पूरा हो, मैं इसके पीछे नहीं भाग रही। उन्होंने बताया कि कोरोना के कारण विद्यालय में अध्ययनरत बच्चे घरों से बाहर ना निकलें, इसके लिए भी उन्हें प्रेरित करती हूं।

मास्क बनाने के घरेलू नुस्खे भी बताती हैं प्रतिमा

प्राथमिक विद्यालय अमृतपाली में चूंकि अधिकांश बच्चे गरीब परिवारों से पढ़ने आते हैं, लिहाजा प्रतिमा उपाध्याय मास्क बनाने के घरेलू नुस्खे भी बताती हैं। ऑनलाइन पढ़ाते समय अंत में रोजाना रुमाल से मास्क बनाने के घरेलू नुस्खे बताने के अलावा हाथ धोने व सफाई के तरीके भी बताती हैं। इसके लिए वे सोशल मीडिया का भी सहारा लेती हैं।

राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर हो चुकी हैं पुरस्कृत

शिक्षा में नवाचार के लिए पूरे जिले में प्रसिद्ध प्रतिमा उपाध्याय अनेकों पुरस्कार हासिल कर चुकी हैं। उनका विद्यालय किसी प्राइवेट स्कूल को भी मात देता दिखाई पड़ता है। यही कारण है कि उनके विद्यालय को उत्कृष्ट विद्यालय का राज्य पुरस्कार मिल चुका है। इसके अलावा खुद प्रतिमा को राष्ट्रीय स्तर के तीन व राज्य स्तर के दो पुरस्कार मिल चुके हैं।

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