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कोरोना काल में उम्मीद की किरण "आशा"

कोरोना काल में उम्मीद की किरण आशा
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हाथरस । एएनएन (Action News Network)

कोरोना ने स्थिति को बदहाल बना रखा है पर फिर भी कोरोना योद्धा बनकर आशा कार्यकर्ता लोगो को इस कठिन समय से उभरने में मदद कर रही हैं। माता और शिशु दोनों की देखभाल आशा कार्यकर्ता करती ही है। लेकिन कोरोना काल में लोगों को इस बीमारी से बचने के उपाय, अन्य राज्यों व जिलों से आए लोगों की सूचि, ठीक हुए लोगों की सहायता और कई अन्य कार्यों में आशा कार्यकर्ता अपना योगदान दे रहीं हैं। जिले की कुल 1241 आशाएं कोविड से लड़ाई में कोरोना योद्धा के रूप में कार्य कर रही हैं। शहरी क्षेत्र में 27 आशा और ग्रामीण क्षेत्र में 1214 आशा लगातार कोविड-19 से लड़ाई में जुटी हुई हैं।

सासनी ब्लॉक के गांव अमरपुरघना की आशा शिवानी चौहान भी इन्हीं आशाओं में से एक हैं। वह इन दिनों हर रोज सुबह उठकर अपने गांव के हर मोहल्ले में जाकर सर्वे करती हैं। वे यहां पर बाहर से आए हुए लोगों का ब्यौरा जुटाती हैं। इसके साथ ही वे सर्वे के दौरान घर के अन्य सदस्यों के हालचाल भी पता करती हैं। वे लगातार पूछती रहती हैं कि घर में किसी को बुखार, जुकाम या खांसी तो नहीं हैं। शिवानी का कहना है कि विपरीत परिस्थितियों में जरूरतमंद की मदद करने का कुछ अलग ही अनुभव होता है। वर्ष 2006 में शिवानी ने आशा के रूप में कार्य कर अपनी पहचान बनाने का निर्णय लिया। प्रशिक्षण के बाद काम पर पहुंची शिवानी को शुरुआती दिनों में कुछ दिक्कतों का सामना करना पड़ा। लेकिन बचपन के शौक और दृण इच्छा शक्ति से उन्होंने सारी दिक्कतों पर जीत हासिल कर अपनी अलग पहचान बनाई।

वह लोगों को याद भी दिलाती रहती हैं कि समय-समय पर साबुन से हाथ धोते रहें, मास्क लगाकर ही घर से बाहर निकलें और लोगों से सामाजिक दूरी बनाकर रखें। एक ओर जब सब लोग अपने घरों में रहकर कोरोना से बचाव कर रहे हैं, तब शिवानी घर-घर जाकर न केवल लोगों को कोविड के प्रति जागरुक कर रही हैं, बल्कि बाहर से आए हुए लोगों का ब्यौरा जुटा कर सरकार तक पहुंचा भी रही हैं। डीसीपीएम धर्मेंद्र कुमार ने बताया कि शहरी क्षेत्र में 27 आशा और ग्रामीण क्षेत्र में 1214 आशा कार्यरत हैं। उन्होंने बताया कि आशा काफी सराहनीय काम कर रही हैं, वे कोविड-19 से लड़ाई में कोरोना योध्दा के रूप में उभर कर सामने आई हैं।

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