Top
Action India

गांव में ही रहकर मनरेगा में तरक्की की इबारत लिख रहे 'श्रमिक'

गांव में ही रहकर मनरेगा में तरक्की की इबारत लिख रहे श्रमिक
X

आजमगढ़ । एएनएन (Action News Network)

सैकड़ों किलोमीटर का सफर तय कर अपने घरों को लौटे प्रवासीय श्रमिकों का जोश और जज्बा कहीं से कम नजर नहीं आ रहा । हर कोई गांव में ही रहकर तरक्की की इबारत लिखने के सपने बुन रहा है। आर्थिक तंगी से जूझ रहे श्रमिकों ने मनरेगा का हाथ थामा है तो कोई अपने बूते कुछ करने के लिए राह तलाश रहा है।

श्रमिकों को लॉकडाउन के कारण भारी परेशानियों से जूझना जरूर पड़ा। मगर, ये चुनौतियां इन मेहनतकशों की हिम्मत न डिगा सकी। वापस लौटे ये लोग फिर नए सिरे से अपने गांव में ही किस्मत आजमाने निकल पड़े हैं। मनरेगा में रोजगार तलाश रहे ये मजदूर भविष्य की नई गाथा लिखने को बेताब है। जिले में अब तक पंजीकरण के माध्यम से जिले में करीब 65 हजार श्रमिक गैर प्रांतों से अपने घर लौट चुके हैं। वही निजी साधनों, पैदल और अन्य साधनों से करीब 50 हजार से अधिक श्रमिक घर लौटे हैं। जिले में लौटे ये श्रमिक 21 दिनों की क्वारंटीन होने के बाद जिले में ही काम की तलाश में है। लेकिन इनके लिए सबसे सुखद स्थिति यह है अब गांव में ही मनरेगा के तहत इनको काम मिल रहा है। यही श्रमिक जो लाॅक डाउन तक दूसरे प्रांतों का रूख कर रहे थे वे अब गांव में ही काम को धार देकर अपनी आर्थिक स्थित को सुधारने में लगे हैं।

सरकारी रिकार्ड के मुताबिक 25 मई तक जिले के 1767 ग्राम पंचायतों में रिकार्ड एक लाख, 221 श्रमिक मनरेगा के तहत कार्य कर रहे हैं। अभी तक जनपद में 10,01,707 मानव दिवस का सृजन किया गया है। जो वार्षिक लक्ष्य का 14.27 प्रतिशत है। तथा आज तक के लक्ष्य के सापेक्ष 91 प्रतिशत है। यह आंकडे बता रहे है। श्रमिकों जोश और जज्बा कहीं से भी कम नहीं हुआ है।
सगड़ी तहसील के ग्राम पंचायत चेंवता में मनरेगा के तहत पोखरे की खुदाई में लगे सैकड़ो श्रमिको में अधिकतर प्रवासी श्रमिक ही है। मुम्बई में टीशर्ट बनाने वाले कंपनी में काम करने वाले चन्द्रमोहन 3 मई को पैदल और ट्रक के माध्यम से किसी तरह से अपने घर पहुंचे। 21 दिन होम क्वारंटाइन रहने के बाद वे भी मनरेगा में कार्य कर रहे है।

Next Story
Share it