Top
Action India

कोरोना : ईद पर नहीं सिले जा सकेंगे पठानी सूट-कुर्ते

कोरोना : ईद पर नहीं सिले जा सकेंगे पठानी सूट-कुर्ते
X

गोरखपुर । एएनएन (Action News Network)

रमजान के पाक महीने के अगले दिन मनाई जाने वाली ईद के पर्व पर नए कपड़े यानी पठानी सूट और कुर्ते पहनने की परंपरा है, लेकिन कोरोना की वजह से हुए लॉकडाउन ने मुस्लिम समुदाय की इस परंपरा पर कैंची चला दी है। दर्जियों की बन्द पड़ी दुकानों में सिलाई बन्द है और तकरीबन 80 हजार पठानी सूट और लाखों कुर्तों के ऑर्डर खटाई में पड़ते नजर आ रहे हैं।

दरअसल, कोरोना वायरस की लड़ाई में शहर में दर्जियों की सभी दुकानें लॉकडाउन की वजह से बंद हैं। ऐसे में अगर तीन मई को लॉकडाउन खुल भी जाए तो टेलर महज 20 से 25 फीसदी लोगों के कपड़े सिल पाएंगे। इतना ही नहीं, लॉकडाउन बढ़ने पर महानगर की तकरीबन 03 लाख मुस्लिम आबादी के लिए समय भी पर्याप्त नहीं बचेगा।

80 हजार पठानी शूट पर कोरोना की कैंची

महानगर की इतनी मुस्लिम आबादी में से महज 15 से 20 प्रतिशत लोग अपनी कमजोर आर्थिक स्थिति की वजह से नए कपड़े नहीं बनवाते हैं। इधर, अधिकांश लोग रेडीमेड कपड़े पहनने से परहेज भी करते हैं। बावजूद इसके एक अनुमान के मुताबिक करीब एक लाख लोग कुर्ता सिलवाते है। 80 हजार के आसपास पठानी सूट पहन अपनी शान बढाते हैं और ईद पर्व में चार चांद लगते हैं। लेकिन इनकी यह परंपरा कोरोना वायरस की चपेट में है और इनकी परंपरा को तोड़ने पर आमादा है।

150 हैं टेलर की दुकानें

महानगर में छोटी-बड़ी 150 से अधिक टेलर की दुकानें बताईं जा रही हैं। रमजान में एक दुकान पर औसतन एक दिन में 20 से 25 कपड़े सिले जाते हैं। महिलाओं-पुरुषों और बच्चों के कपड़े शामिल हैं। जानकारों की मानें तो दो महीने में एक टेलर मुश्किल से 04 हजार कपड़े सिल सकता है। इस तरह कुल मिलाकर सवा दो लाख आबादी के लिए ही कपड़ा सिल पाएंगे। इस हिसाब से अगर 03 मई को लॉकडाउन खुलता है तो 80 हजार लोगों के लिए सिले-सिलाए कपड़े तैयार हो सकेंगे।

गोलघर के टेलर संचालक बोले

गोलघर स्थित बशीर टेलर्स के संचालक याशिर के मुताबिक उनके यहां रमजान के दिन से डेढ़ महीने पहले से कपड़े आने लगते हैं। इतना काम होता है कि सामान्य कपड़े सिल ही नहीं पाते हैं। कारीगरों की संख्या भी दो गुनी करनी पड़ती है। लेकिन इस बार लॉकडाउन ने सब कुछ बंद कर दिया है। 03 मई को दुकानें खुल भी जाएं तो अधिकतर लोगों का कपड़ा नहीं सिला जा सकेगा।

बख्शीपुर के संचालक की सुनें

बक्शीपुर स्थित लड्डू टेलर्स के संचालक लड्डू मियां बताते हैं कि वह रमजान के सर्वाधिक लोग पठान सूट और कुर्ता ही सिलवाते हैं। सभी दुकानों को मिला दें तो करीब 80 हजार पठान सूट और एक लाख से अधिक कुर्तों की सिलाई होती है। डेढ़ महीने मे अकेले ही 04 हजार लोगों के लिए हमारे यहां कपड़ा सिलकर तैयार होता रहा है। लेकिन अब 03 मई से दुकानें खुल भी जाएं तो 02 हजार लोगों को भी कपड़ा सिल पाना मुश्किल होगा।

Next Story
Share it