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कोरोना से जंग : अपनों को घर में छोड़कर काम पर पहुंच रहीं अनुपमा और कामिनी

कोरोना से जंग : अपनों को घर में छोड़कर काम पर पहुंच रहीं अनुपमा और कामिनी
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  • फूड कंट्रोल रूम का सारा दारोमदार इन महिलाओं के कंधों पर

रायपुर। एएनएन (Action News Network)

कोरोना के कहर से छत्‍तीसगढ़वास‍ियों को बचाने के लिए अपनों की परवाह किए बिना अवंती विहार की अनुपमा तिवारी और कृष्णा नगर की डाॅ. कामिनी बावनकर जिला प्रशासन के फूड कंट्रोल रूम में अपनी सेवाएं दे रही हैं। ये दोनो महिलाएं घर में बच्चों और बूढ़े मां-बाप की परवाह को दरकिनार करते हुए अपने देश और शहर की चिंता में डूबी हुई हैं। दोनों महिलाओं का कहना है कि, कोरोना के कहर से हम न केवल अपने घर को, बल्कि अपने शहर के एक-एक घर को बचाएंगे।

अनुपमा के दिन की शुरुआत होती है अलसुबह 3:30 बजे

घर में 82 वर्ष की सासू मां और बेटा सागर, बेटी सुरभि व भतीजी स्तुति को छोड़कर कोरोना को हराने के लिए घर से निकलने वाली अनुपमा कहती हैं कि वे अब 5 बजे की जगह 3:30 बजे ही अपने दिन की शुरुआत कर लेती हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें सुबह कंट्रोल पहुंचना होता है और इसके लिए वे सुबह जल्दी उठकर पहले घर वालों के चाय-नाश्ते व खाने-पीने की तैयारी करती हैं। इसके बाद समय पर कंट्रोल रूम पहुंचकर अपने शहर के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाती हैं। अनुपमा ने बताया कि, उनकी दिनचर्या में काफी बदलाव हुआ है, लेकिन उन्हें दिनचर्या की नहीं अपने शहर व देश की चिंता सता रही है। अब तो उनके घर में सुबह का खाना शाम 4 बजे के बाद बनता है।

वहीं मंदिर हसौद के स्कूली छात्र डोमेश साहू ने सोमवार को फूड सेल से मदद मांगी जिसके बाद जिला पंचायत सी.ई.ओ. डॉ. गौरव कुमार सिंह के निर्देश पर 10 मिनट में राहत सामग्री पहुंच गई।
उल्‍लेखनीय है कि, छत्तीसगढ़ शासन द्वारा लॉकडाउन के दौरान प्रदेश में 12 हजार 306 उचित मूल्य दुकानों के माध्यम से लोगों के लिए खाद्यान्न उपलब्ध कराया जा रहा है। इन दुकानों में 65 लाख 37 हजार राशनकार्डधारी परिवारों के दो करोड़ 44 लाख पंजीकृत सदस्यों को खाद्यान्न प्रदान किया जा रहा है। राशनकार्डधारी परिवारों को अप्रैल एवं मई 2020 का दो माह का चावल एक साथ निःशुल्क प्रदान किया जा रहा है। इसके अलावा 2 माह का शक्कर और नमक का एकमुश्त वितरण कराया जा रहा है।

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