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सरोकार : घर की दीवारों पर उगाएं सब्जियां, सजावट के साथ होगी पैसे की बचत

  • केन्द्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान के बने विशेष माडल लोगों को कर रहा आकर्षित

लखनऊ । एएनएन (Action News Network)

बाजार से कुछ भी लाने में कोविड-19 के संंक्रमण का डर, न लाएं तो भूख का डर। ऐसे में केन्द्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान द्वारा दीवारों पर सब्जी उगाने के साथ ही उसकी सजावट की विकसित डिजाइन लोगों को ज्यादा भा रही है। इस विधि से बिना खेत के घर में भी पूरे परिवार के लिए आराम से खाने भर की मन पंसद सब्जियां आराम से उगाई जा सकती है। इससे घर की सजावट भी हो जाएगी और प्रकृति के नजदीक रहने का अच्छा मौका भी मिलेगा। यह बिना मिट्टी की खेती लोगों को काफी पसंद भी आ रही है।

इस संबंध में केन्द्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान रहमानखेड़ा, लखनऊ के निदेशक डाक्टर शैलेन्द्र राजन ने सोमवार को बताया कि कोविड-19 का भय, खेती के लिए सिकुड़ती जमीन, रसायनों के अंधाधुंध प्रयोग से स्वास्थ्य पर बुरे प्रभाव के कारण स्वयं के उपभोग के लिए सब्जी घर पर उगाने में दिलचस्पी बढ़ रही है। कई लोग उत्साहित होने के वावजूद सब्जी उत्पादन के लिए समुचित जगह के उपलब्ध न होने के कारण शौक पूरा नहीं कर पाते हैं, परन्तु आज एक छोटे से स्थान का उपयोग करके यह संभव है।

उन्होंने हिन्दुस्थान समाचार से विशेष वार्ता में कहा कि हालांकि, लौकी, खीरा, कद्दू, सेम जैसी लता वाली सब्जियाँ उगाना कम जमीन में संभव है, लेकिन हरी सब्जियों के लिए अधिक जगह की ज़रूरत होती है। ऐसी स्थिति में केन्द्रीय उपोष्ण् द्वारा विकसित डिज़ाइन किए गए मॉडलों में सीमित स्थान में बिना मिट्टी के सब्जी उगाना सरल हो गया है।

पालक, धनिया, मिर्च आदि उगा सकते हैं घर में

उन्होंने कहा कि अधिकांश घरों में दीवार के साथ-साथ एक फीट की पट्टी पर इस कार्य के लिए मिलने की गुंजाइश होती है। पौधों के लिए मिट्टी की आवश्यकता होती है जो ज्यादातर छतों और आधुनिक घरों में नहीं होती है। फर्श भी सीमेंट का होता है। केन्द्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान ने कुछ मॉडल विकसित किए हैं और उनका उपयोग करके विभिन्न प्रकार की सब्जियों को उगाना संभव है, वह भी बिना मिट्टी के। प्याज (साग के लिए), पालक, धनिया, चौलाई, मिर्च, पुदीना इत्यादि को सफलतापूर्वक उगाया जा सकता है। मिट्टी के अधिक वजन के कारण छत पर पौधें उगने के लिए हल्के वजन वाले मिश्रण का उपयोग किया जा सकता है।

कीटनाशकों का प्रयोग न के बराबर

डाक्टर राजन ने कहा कि इस प्रकार के खेती के मॉडल में रोग और कीट के प्रबंधन के लिए कीटनाशकों के प्रयोग की आवश्यकता लगभग न के बराबर होती है। डॉ एस.आर. सिंह, संस्थान के प्रधान वैज्ञानिक, ने कई मॉडल विकसित किए, जिन्हें उपलब्ध स्थान के अनुसार समायोजित किया जा सकता है। उन्हें बालकनी में या दीवार के साथ पक्के फर्श पर रख सकते हैं।

छत या दीवारों पर कोई सीलन का खतरा नहीं

उन्होंने कहा कि ज्यादातर लोग सजावटी पौधों का उपयोग दीवारों को सजाने के लिए उपयोग करते हैं। इन पौधों को उगाने के लिए कई रेडीमेड प्लास्टिक के कंटेनर उपलब्ध हैं, लेकिन दीवार के साथ उगने वाली सब्जियां विशेष डिजाइन के कंटेनर बाज़ार में उपलब्ध नहीं हैं, जिन्हें दीवार के साथ खड़ा किया जा सके। ये संरचनाएं छत पर मिट्टी को छत से छूने नहीं देते हैं। फलस्वरूप छत में सीलन का खतरा नहीं होता है। संसथान के इस प्रयास ने कई शहरी उद्यमियों को परिवार के लिए सुरक्षित भोजन उपलब्ध कराने के साथ-साथ घरेलू उपयोग के लिए सब्जी उगाने के लिए इस तकनीक का उपयोग करने के लिए प्रेरित किया है।

बेमौसम सब्जियों का भी हो सकता है उत्पादन

उन्होंने कहा कि कई फसलों को तो बेमौसम भी उगाया जा सकता है। बरसात में सब्जियों को खुले में नहीं उगाया जा सकता है, वे अधिक पानी के कारण सड़ सकती हैं, लेकिन इस पद्धति से मूसलाधार बारिश में भी पौधों को आसानी से बचाया जा सकता है। जब बाजार में सब्जियां अधिक कीमत पर मिलती हैं, तो खुद की उगाई गई सब्जियां उत्पादकों को विशेष संतुष्टि देती हैं। ये संरचनाएं पुदीना (पुदीना), बेसिल, पत्तेदार सब्जियों जैसे धनिया तथा हर्ब्स जिनका उपयोग थोड़ी मात्रा के लिए विशेष रूप से अत्यधिक उपयुक्त हैं।

उन्होंने हिन्दुस्थान समाचार से कहा कि इस तरह के पद्धति में चिकोरी, पार्सले और बान्चिंग प्याज जैसी विदेशी सब्जियां भी अच्छी होती हैं। लेट्यूस, चिकोरी, पालक, स्विस चार्ड छोटी सी जगह पर शानदार पत्ते विकसित करते हैं। इन नवीन तरीकों को अपनाकर एक छोटे परिवार के लिए काफी सब्जियां उगाई जा सकती हैं।

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