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कोरोना योद्धा बने शिक्षकों में हौसले के लिए कवि बन गए बलिया बीएसए

कोरोना योद्धा बने शिक्षकों में हौसले के लिए कवि बन गए बलिया बीएसए
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  • शिक्षकों के लिए कविता लिख कर निभाया टीम लीडर का फर्ज

बलिया । एएनएन (Action News Network)

बलिया में बेसिक शिक्षक फ्रंट लाइन पर कोरोना से दो-दो हाथ कर रहे हैं। ऐसे में उनका हौसला न टूटे, बीएसए ने कविता के जरिए उनका उत्साहवर्धन किया है। कोरोना के संकट के बीच देश के बड़े शहरों से आने वाले श्रमिकों की भारी संख्या को देखते हुए जिलाधिकारी ने बेसिक शिक्षा विभाग की मदद ली। उन्होंने पहले ही दिन से रोडवेज और रेलवे स्टेशन पर बेसिक शिक्षा विभाग के खण्ड शिक्षाधिकारियों, शिक्षकों, जिला समन्वयकों व अन्य कर्मचारियों को तैनात कर दिया।
ऐसे में जबकि कोरोना से हर कोई डर रहा था, पढ़ाई-लिखाई वाले विभाग ने सामने आयी दूसरे किस्म की चुनौती को हाथों-हाथ लिया। विभाग से जुड़े लोग रोडवेज और रेलवे स्टेशन पर आने वाले श्रमिकों का लेखा-जोखा रखना शुरू किया। श्रमिकों को दो गज दूरी समेत कोरोना से बचाव के अन्य जरूरी उपायों से शिक्षित किया।

इसमें सर्वाधिक समय तक ड्यूटी एमडीएम के जिला समन्वयक अजीत पाठक ने किया। वे लगातार रेलवे स्टेशन पर डटे रहे। उनके साथ ही अलग-अलग शिक्षा क्षेत्रों के शिक्षक भी विभाग के मुखिया के निर्देश का पालन करते रहे। भीषण गर्मी में अग्रिम मोर्चे पर डटे शिक्षकों व अन्य कर्मियों का उत्साह बढ़ाने के लिए बीएसए शिवनारायण सिंह ने कविता लिख डाली।

सलाम है उस जज्बे को,जिसे विश्वास है हम जीतेंगे!नहीं हारेंगे चाहे कुछ भी करना पड़े!नहीं हटेंगे, डटे रहेंगे !देखा है मैंने, उन निगाहों को,जो ताड़ती रहती हैं कि, ट्रेन आने वाली है!भीड़ में तड़पते लोगों को, संभालना होगा !कुछ तो उन्हें ढांढस बंधाना होगा!तभी अचानक खयाल आता है कि, बस भी आने वाली है बस अड्डे पर,वहां भी तांडव होगा, भीड़ को संभालना होगा! सलाम है उस शख्सियत को,जिसने यह बनाया होगा कि,आई यह किस तरह की आपदा,हमें अपनी इंसानियत को जगाना होगा, तैयार करना होगा,युद्ध की तरह ही हमें निपटना होगा!मन में जज्बात पैदा करके, हर संभव, इस लड़ाई को जीतना होगा!तभी हम गाथा गा पाएंगे कि, हमने कुछ किया है, कुछ खोया है !उन हालातों में भी, बिना किसी सुरक्षा के, अपना आपा भी नहीं खोया !चाहे दिन हो या रात, किसी ने नहीं देखा ऐसे हालात!डटे रहे, बिना किसी परवाह के, निडर होकर!सिर्फ अपना फर्ज निभाया!मर मिटने को, जंग जीत जाने को!मन में उत्साह लिए, ऐसे जाबांजों को मेरा सलाम है,जो बेसिक शिक्षा की शान हैं।

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