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कोविड-19:लॉक डाउन के बीच बेबसी में 'सपेरों' को राहत का इंतजार

कोविड-19:लॉक डाउन के बीच बेबसी में सपेरों को राहत का इंतजार
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रायबरेली। एएनएन (Action News Network)

मंद पड़ी बीन की धुन, पिटारे में बंद पड़े है सांप, बड़ों की बेबसी और छोटे-छोटे बच्चों की निहारती आंख। यह सब बातें आपको मायूस कर सकती हैं, लेकिन लॉक डाउन में इस गांव का यही यथार्थ है। रायबरेली शहर से 12 किमी दूर सपेरों के गांव हंसा का पुरवा में लॉक डाउन की बेबसी साफ़ देखी जा सकती है, जिन्हें अब राहत का इंतजार है। क़रीब 250 आबादी वाले इस गांव में 30 परिवार रहते हैं। छोटे से लेकर बड़े तक सभी का एक ही पेशा है साँप दिखाना और घरों में जाकर साँप पकड़ना।

कोरोना के कारण किये गए लॉक डाउन से यह सब बंद हो गया। इस गांव के लोगों का जीवन ही अन्य लोगों पर आश्रित रहता है, लोग ही बाहर नहीं निकल रहे हैं, ऐसे में इनकी मदद भी नहीं हो पा रही है। बेहद गरीब ये सपेरे मायूस और पूरे गांव में एक अजीब सा सन्नाटा है। गांव के लोगों को सरकार से उम्मीद तो है लेकिन मायूस हैं, कोई सुनने वाला नहीं।

गांव के बुजुर्ग अलगरनाथ और केदारनाथ का कहना है साहब कोई भी राहत सरकार से अब तक नहीं मिली है। सारा काम धंधा चौपट हो चुका है। महत्वपूर्ण यह भी है कि इस पूरे गांव में केवल कुछ ही लोगों के अंत्योदय कार्ड बने हैं, जबकि इन सभी की स्थिति अत्यंत दयनीय है। लॉक डाउन में प्रशासन की तरफ से अब तक कोई भी राहत यहां नहीं पहुंची है।

सरकारी योजनाओं का लाभ इसलिए भी नहीं मिल पा रहा है कि इन सभी के नाम संबंधित सूचियों में दर्ज ही नहीं है। इन सभी का कहना है कि उनकी कोई सुध लेने वाला नहीं है। इस सम्बंध में जब प्रधान से बात की गई तो वह भी साफ़ जबाब नहीं दे सके। उपजिलाधिकारी शालिनी प्रभाकर ने हिन्दुस्थान समाचार को बताया कि वह इसे गंभीरता से देखेंगी और जल्द ही राहत उपलब्ध कराई जाएगी।

टूट रही है प्रियंका गांधी से बंधी आस पिछले वर्ष लोकसभा चुनाव के दौरान यह गांव सुर्खियों में तब आया था, जब मां सोनिया गांधी के प्रचार के दौरान प्रियंका गांधी यहां पहुंची थी। उन्होंने यहां साँप भी हाथ में पकड़ रखा था जिसकी फ़ोटो काफ़ी दिनों तक मीडिया में छायी रही। प्रियंका गांधी ने गांव के लोगों के राशन कार्ड न होने पर सरकार पर भी निशाना साधते हुए हर सम्भव मदद का भरोसा दिया था।जिससे लोगों में एक आस भी बंधी थी जो अब टूट रही है। पार्टी का कोई भी नेता यहां राहत देने नहीं पहुंचा है।

गांव के बल्लू बंगाली का कहना है कि प्रियंका गांधी के आने से लगा था कि कुछ भला होगा, लेकिन इस समय भी कोई सुध नहीं लेने वाला है। कांग्रेस के जिलाध्यक्ष पंकज तिवारी का कहना है कि राहत सामग्री गांव में कुछ लोगों को भेजी गई है, जिन्हें नहीं उपलब्ध हो पाई है उन्हें उपलब्ध कराई जाएगी। लेकिन इन सबके बीच सरदार गोल्डी सिंह व उनके साथी पिछले एक सप्ताह से गुरुद्वारा की तरफ से बिना किसी शोर शराबे के रोज यहां खाना उपलब्ध करवा रहे हैं, जो कि एक नजीर है तमाम उन राजनीतिक दलों, नेताओं के लिए जो आज भी ऐसी जगह नहीं पहुंच पाए हैं।

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