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पुलिस अधिकारी ही जांच के दस्तावेज लीक करेगा तो जांच फेल हो जाएगी: सीबीआई

पुलिस अधिकारी ही जांच के दस्तावेज लीक करेगा तो जांच फेल हो जाएगी: सीबीआई
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नई दिल्ली। एक्शन इंडिया न्यूज़


सीबीआई ने पूर्व गृहमंत्री अनिल देशमुख के खिलाफ जांच के दौरान सीबीआई के दस्तावेज लीक करने के लिए रिश्वत लेने के मामले के आरोपित और सीबीआई के सब-इंस्पेक्टर अभिषेक तिवारी की जमानत याचिका का विरोध किया। सीबीआई ने कहा कि अगर पुलिस अधिकारी ही जांच से संबंधित दस्तावेज और रणनीति को लीक करने लगेगा तो जांच फेल हो जाएगी। सीबीआई ने अभिषेक तिवारी की जमानत याचिका का जवाब देते हुए दिल्ली हाईकोर्ट में ये दलील दी।


सीबीआई ने कहा कि इस मामले में एक वकील और एक पुलिस अधिकारी ने अपराध किया है। दोनों से देश के न्यायिक व्यवस्था की स्वच्छता की उम्मीद की जाती है। ये मामला काफी गंभीर है। सीबीआई ने कहा कि अगर वकील और पुलिस को ऐसे अपराध करने की आजादी दी जाएगी तो पूरा अपराध न्यायशास्त्र ही खत्म हो जाएगा। अभिषेक तिवारी की जमानत याचिका का विरोध करते हुए सीबीआई ने कहा कि जांच अभी प्रारंभिक चरण में है और अगर उसे जमानत दी जाती है तो ये निष्पक्ष जांच पर असर डालेगा।

16 सितंबर को कोर्ट ने सीबीआई को नोटिस जारी किया था। उल्लेखनीय है कि राऊज एवेन्यू कोर्ट ने 8 सितंबर को अभिषेक तिवारी और अनिल देशमुख के वकील आनंद डागा की जमानत याचिका खारिज कर दी थी। सुुुनवाई के दौरान सीबीआई ने कहा था कि अभिषेक तिवारी ने आनंद डागा से जांच की जानकारी देने के लिए आईफोन 12 प्रो और दूसरे महंगे गिफ्ट लिए थे। सीबीआई ने कहा था कि जांच के सिलसिले में अभिषेक तिवारी पुणे गए थे, जहां उसे रिश्वत के रूप में महंगे गिफ्ट दिए गए। दस्तावेज लीक करने की एवज में तिवारी डागा से कई बार गिफ्ट ले चुका है।

सीबीआई की ओर से दर्ज एफआईआर के मुताबिक देशमुख के खिलाफ जांच के लिए जांच अधिकारी और सीबीआई के डीएसपी आरएस गुंजियाल और तिवारी 6 अप्रैल को मुंबई गए। इस दौरान दोनों ने 14 अप्रैल को देशमुख समेत कई गवाहों के बयान दर्ज किए थे। अभिषेक तिवारी के पास संवेदनशील दस्तावेज थे। तिवारी ने डागा से कई संवेदनशील दस्तावेज व्हाट्स ऐप के जरिये साझा किया था। उसके बाद सीबीआई के वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर अनिल देशमुख के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई।

सीबीआई ने कहा था कि अभिषेक तिवारी ने साजिश के तहत दस्तावेजों को लीक किया और उसके बदले में रिश्वत ली। ये लगातार होता रहा है। तिवारी और डागा को 1 सितंबर की रात में गिरफ्तार किया गया। 18 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि अनिल देशमुख के खिलाफ सीबीआई जांच जारी रहेगी। सुप्रीम कोर्ट ने अवैध उगाही समेत दूसरे आरोपों का सामना कर रहे देशमुख के खिलाफ दर्ज एफआईआर रद्द करने से इनकार कर दिया था।

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