Top
Action India

कोरोना महामारी: शिक्षा मंत्रालय ने बच्चों को सीखने में मदद के लिए माता-पिता के वास्ते जारी किए दिशा निर्देश

कोरोना महामारी: शिक्षा मंत्रालय ने बच्चों को सीखने में मदद के लिए माता-पिता के वास्ते जारी किए दिशा निर्देश
X
  • घर पहला स्कूल होता है, माता-पिता पहले शिक्षक: निशंक
  • घर पर बच्चों के लिए सकारात्मक वातावरण बनाने के कई सरल सुझाव

नई दिल्ली। एक्शन इंडिया न्यूज़

कोरोना महामारी के कारण पिछले डेढ़ साल से देशभर में स्कूल बंद हैं और विद्यार्थी ऑनलाइन शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। इस व्यवस्था को अधिक जीवंत बनाने के लिए केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने माता-पिता और अभिभावकों के लिए दिशा-निर्देश जारी कर बच्चों को घर पर सीखने में मदद करने को कहा है। मंत्रालय ने इस संबंध में अभिभावकों को जानकारी मुहैया प्रदान करने के लिए दिशा-निर्देशों का मसौदा तैयार किया है।

मंत्रालय की ओर से शनिवार को जारी विज्ञप्ति में कहा गया है कि यह समझा जाता है कि स्कूल शिक्षकों, समुदाय और स्वयंसेवकों के अलावा माता-पिता एवं देखभाल करने वालों की भूमिका उनके बच्चों के लिए घर-आधारित शिक्षा का समर्थन करने में महत्वपूर्ण है। इसे ध्यान में रखते हुए स्कूल बंद होने के दौरान और उसके बाद होम-बेस्ड लर्निंग में माता-पिता की भागीदारी के लिए दिशानिर्देश तैयार किए गए हैं, चाहे उनका स्वयं का साक्षरता स्तर कुछ भी हो।

केंद्रीय शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल 'निशंक' ने अपने ट्विटर पर लिखा है, "मुझे दृढ़ता से लगता है कि एक घर पहला स्कूल होता है और माता-पिता पहले शिक्षक होते हैं। इस महामारी में बच्चों के विकास और सीखने में माता-पिता की भूमिका महत्वपूर्ण है।"

इन दिशा-निर्देशों का उद्देश्य माता-पिता और देखभाल करने वालों के साक्षरता स्तर के बावजूद स्कूल बंद होने के दौरान बच्चों को सहयोग करने में भागीदारी और जुड़ाव की 'क्यों', 'क्या', और 'कैसे-कैसे' के बारे में जानकारी प्रदान करना है।

दिशा-निर्देश न केवल माता-पिता के लिए, बल्कि देखभाल करने वालों, परिवार के अन्य सदस्यों, दादा-दादी, समुदाय के सदस्यों, बड़े भाई-बहनों के लिए भी हैं, जो सभी बच्चों के कल्याण को बढ़ावा देने में लगे हुए हैं।इसमें बच्चों को घर-आधारित शिक्षा में सुविधा प्रदान करने और एक सुरक्षित, आकर्षक और सकारात्मक वातावरण बनाने के लिए कई सरल सुझाव हैं।

दिशा-निर्देशों में ये विचारोत्तेजक गतिविधियां स्कूली शिक्षा के विभिन्न चरणों के अनुसार हैं। फाउंडेशन चरण (आयु 3-8 वर्ष), प्रारंभिक चरण (आयु 8-11 वर्ष), मध्य चरण (उम्र 11-14 वर्ष) और माध्यमिक चरण किशोर से वयस्क आयु (उम्र 14-18 वर्ष)।

शिक्षा मंत्रालय ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से आम जनता के बीच दिशा-निर्देशों का प्रसार करने और विभिन्न गतिविधियों को साझा करने का आग्रह किया है जो घर पर आयोजित की जा सकती हैं। बयान में कहा गया है कि यह अनुरोध किया जाता है कि इन दिशा-निर्देशों को सभी हितधारकों को व्यापक पैमाने पर प्रसारित किया जाए। साथ ही, ग्रेड-वार गतिविधियों को माता-पिता के लिए दृश्यों और चित्रों के साथ सरल पैम्फलेट के रूप में प्रसारित किया जा सकता है।


Next Story
Share it