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एलएसी पर चीन से हुए पहले 'संघर्ष' का एक साल पूरा, गतिरोध बरकरार

एलएसी पर चीन से हुए पहले संघर्ष का एक साल पूरा, गतिरोध बरकरार
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  • ​ इतिहास में दर्ज हुई गलवान घाटी की घटना, 45 साल में पहली बार दोनों देशों के सैनिक मारे गए
  • विवाद शुरू होने के एक साल बाद चीन अब फिर कर रहा है अपने सैन्य ठिकानों को और मजबूत

नई दिल्ली। एक्शन इंडिया न्यूज़

पूर्वी लद्दाख की सीमा पर भारत और चीन के बीच शुरू हुए गतिरोध का बुधवार को एक साल पूरा हो गया। आज ही के दिन एलएसी पर पैन्गोंग झील के उत्तरी किनारे पर दोनों देशों के सैनिकों में पहला संघर्ष हुआ था। इसके डेढ़ माह बाद 15/16 जून को गलवान घाटी में हुए खूनी संघर्ष ने तो इतिहास लिख दिया क्योंकि 45 साल में यह पहली घटना थी जिसमें दोनों देशों के सैनिक मारे गए थे। इस हिंसक वारदात में भारत ने अपने 20 जवान खोये थे। पूर्वी लद्दाख में पैन्गोंग झील के उत्तरी तट पर झड़प होने के एक साल बाद चीन अब फिर अपने सैन्य ठिकानों को और मजबूत कर रहा है।

पूर्वी लद्दाख की सीमा पर ​भारत और चीन के सैनिकों की पहली झड़प पिछले साल 5 मई को पैन्गोंग झील के उत्तरी किनारे पर हुई थी। इसके बाद भारतीय और चीनी सैनिक 9 मई को पूर्वी सिक्किम इलाके में नाकू ला में भिड़ गए थे, जिसमें दोनों पक्षों के कई सैनिक घायल हुए। इतिहास में दर्ज हुई घटना 15/16 जून को गलवान घाटी में हुई जिसमें भारत ने अपने 20 जवान खोये थे। एलएसी पर 45 साल में यह पहली घटना थी जिसमें दोनों देशों के सैनिक मारे गए थे। इसके बाद दोनों देशों के बीच तनाव इतना बढ़ा कि भारत के साथ लंबी लड़ाई के लिए युद्ध जैसी स्थिति बन गई। सीमा पर भले ही आज शांति दिख रही हो लेकिन यह दोनों देशों के बीच गतिरोध खत्म होने का भरोसा दिलाने लायक नहीं है।

इसी साल की शुरुआत में भारत के साथ हुए समझौते के बाद पैन्गोंग झील के दोनों किनारों से विस्थापन प्रक्रिया पूरी हुई थी। चीन के साथ 09 अप्रैल, 2021 को हुई 11वें दौर की वार्ता के बाद सीमा की ऊंची पहाड़ियों की बर्फ पिघलने लगी है और पैन्गोंग झील का लगभग 97% हिस्सा पिघल गया है। सीमा पर शीतकालीन तैनाती खत्म होने के शुरुआती दिनों में ही चीन फिर से पैन्गोंग झील के उन इलाकों में सक्रिय हो गया है जहां विस्थापन होने के बाद गतिरोध खत्म होने की उम्मीद बंधी थी। सैन्य टकराव इसलिए भी जारी है, क्योंकि चीन सीमा के अन्य विवादित क्षेत्रों गोगरा, हॉट स्प्रिंग्स, डेमचोक और डेप्सांग के मैदानी इलाकों से पीछे हटने को तैयार नहीं है। इसके विपरीत अक्साई चिन के उत्तर में कांग्ज़िवर और रुडोक के बीच तिब्बत के लद्दाख सीमांत में बने नए स्थायी चीनी आवास ने खतरे का अलार्म बजा दिया है।

पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) ने तेजी के साथ अस्थायी संरचनाओं को बारूद के हेलिपैड और सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल की स्थिति में परिवर्तित किया है, जिसे पिछले साल एलएसी से 25 से 120 किमी. तक की गहराई वाले क्षेत्रों में स्थापित किया गया था। ​पीएलए ने विवादित क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर सैन्य बलों की तैनाती जारी कर रखी है और सीमा के साथ सैन्य चौकियों को भी मजबूत किया है।​ पैन्गोंग झील से लगभग 100 किमी. दूर रुतोग क्षेत्र में हाल के दिनों में चीनी गतिविधियां देखी गई हैं। बेहतर सड़क और अन्य कनेक्टिविटी के कारण पीएलए एलएसी पर अपने इलाके में तेजी से सैन्य बलों को स्थानांतरित करने में सक्षम है।​ भारत में कोरोना संकट और जारी सैन्य वार्ता के बीच चीनी सेना ने पूर्वी लद्दाख के गहराई वाले क्षेत्रों में स्थायी आवास और डिपो का निर्माण करके अपनी उपस्थिति फिर से मजबूत करनी शुरू कर दी है।


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