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जम्मू में हिरासत में रखे गए रोहिंग्याओं के मामले पर सुप्रीम कोर्ट कल सुनाएगा फैसला

जम्मू में हिरासत में रखे गए रोहिंग्याओं के मामले पर सुप्रीम कोर्ट कल सुनाएगा फैसला
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एक्शन इंडिया न्यूज़

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नई दिल्ली, 07 अप्रैल (हि.स.)। सुप्रीम कोर्ट जम्मू में हिरासत में रखे गए रोहिंग्याओं के मामले पर कल यानी 8 अप्रैल को फैसला सुनाएगा। चीफ जस्टिस एसए बोब्डे की अध्यक्षता वाली बेंच ने पिछले 26 मार्च को फैसला सुरक्षित रख लिया था।

सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने कहा था कि म्यांमार सरकार की पुष्टि के बाद ही 168 लोगों को वापस भेजा जाएगा। केंद्र सरकार ने कहा कि रोहिंग्या देश की सुरक्षा के लिए खतरा हैं। देश को दुनियाभर के घुसपैठियों की राजधानी नहीं बनने दिया जा सकता है।

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से वकील प्रशांत भूषण ने इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस (आईसीजे) के फैसले का हवाला देते हुए कहा था कि म्यांमार में रोहिंग्याओं की जान को खतरा है। उन्होंने कहा था कि आईसीजे की 15 जजों की बेंच का ये सर्वसम्मत फैसला है।

उन्होंने कहा था कि आईसीजे का फैसला तब आया था जब वहां चुनी हुई सरकार थी। अब तो हालात और खराब हो गए हैं। इस पर मेहता ने कहा था कि इसमें कोई शक नहीं कि म्यांमार में अशांति है लेकिन हम अपने देश में इन शरणार्थियों का क्या करें।

चीफ जस्टिस ने प्रशांत भूषण से पूछा था कि आईसीजे के आदेश की इस मामले में क्या प्रासंगिकता है। तब प्रशांत भूषण ने कहा था कि सरकार ने डेढ़ सौ से ज्यादा रोहिंग्या शरणार्थियों को पकड़कर हिरासत में रखा है। उनमें से अधिकांश के पास संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी उच्चायोग का पहचान पत्र है। तब चीफ जस्टिस ने कहा था कि क्या इस मामले में धारा 32 का इस्तेमाल किया जा सकता है।

धारा 32 भारतीय नागरिकों के लिए लागू होता है। तब प्रशांत भूषण ने कहा था कि हम धारा 21 के इस्तेमाल की मांग कर रहे हैं। धारा 32 में भी ये कहीं नहीं लिखा है कि वह केवल देश के नागरिकों पर ही लागू होता है।

याचिका रोहिंग्या शरणार्थी मोहम्मद सलीमुल्ला ने दायर किया है। याचिका में कहा गया है कि जम्मू में होल्डिंग सेंटर में डाले गए रोहिंग्या शरणार्थियों को म्यांमार नहीं भेजा जाए। याचिका में मांग की गई है कि कोर्ट इस मामले में संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार आयोग से दखल के लिए कहे। याचिका में मांग की गई है कि कोर्ट केंद्र सरकार को निर्देश दे कि वो पूरे भारत में रह रहे रोहिंग्या लोगों को शरणार्थी का दर्जा दे।

याचिका में उन खबरों को आधार बनाया गया है, जिनके मुताबिक पिछले 7 मार्च को करीब 150-170 रोहिंग्या शरणार्थियों को जम्मू में हिरासत में लिया गया। इन रोहिंग्या शरणार्थियों को होल्डिंग सेंटर यानी उपजेल में रखा गया है। उन्हें म्यांमार वापस भेजने की तैयारी की जा रही है।

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