Action India
दिल्ली

पांच साल बाद भी वादा पूरा नहीं कर पाए केजरीवाल

पांच साल बाद भी वादा पूरा नहीं कर पाए केजरीवाल
X
  • अल्पसंख्यकों के शैक्षिक पिछड़ेपन को दूर करने के लिए केजरीवाल सरकार ने की थी घोषणा
  • 2016 में वक्फ बोर्ड के साथ मिलकर पांच अंग्रेजी मीडियम स्कूल खोलने का हुआ था

नई दिल्ली। एक्शन इंडिया न्यूज़


अल्पसंख्यक समुदाय का शैक्षिक पिछड़ापन दूर करने के लिए दिल्ली की अरविंद केजरीवाल सरकार ने साल 2016 में एक अच्छी घोषणा की थी। इसके अनुसार दिल्ली वक्फ बोर्ड के साथ मिलकर उसकी खाली पड़ी जमीनों पर शुरूआत में 5 अंग्रेजी मीडियम स्कूल स्थापित किए जाने थे। दुर्भाग्य यह की पांच साल बीतने को आए पर अभी तक इन स्कूलों को खोलने के लिए कोई ठोस पहल शुरू नहीं हुई है। दूसरी तरफ वक्फ बोर्ड की तरफ से इन स्कूलों में तैनाती के लिए शिक्षकों और प्रधानाचार्य के चयन की प्रक्रिया भी पूरी कर ली गई है। साथ ही स्कूलों के संचालन के लिए सलाहकार और उपनिदेशक जैसे पदों पर भी नियुक्ति की जा चुकी है।


दिल्ली वक्फ बोर्ड ने अपनी जिन पांच सम्पत्तियों का इंग्लिश मीडियम स्कूलों के लिए चयन किया था, उसमें मस्जिद फतेहपुरी के नीचे खाली पड़ा स्थान भी है। वहां पर पहले नगर निगम का प्राथमिक स्कूल चलता था। इसके अलावा तिराहा बैरम खान स्थित कमरा बंगश की संपत्ति पर भी स्कूल बनाने का फैसला लिया गया है। इस संपत्ति पर पहले एक डिस्पेंसरी चलती थी, जिसे अब बंद कर दिया गया है। हजरत निजामुद्दीन स्थित तिकोना पार्क की वक्फ सम्पत्ति पर भी स्कूल बनाने का फैसला किया गया है। रिंग रोड स्थित मिलेनियम पार्क के कब्रिस्तान के पास स्थित वक्फ भूमि पर भी एक स्कूल बनाने का फैसला किया गया है। यहां पर आगे चलकर उच्च शिक्षा के लिए कॉलेज और विश्वविद्यालय बनाने की भी योजना के भी बुलंद दावे किए गए है।


इस योजना के तहत इन स्कूलों के निर्माण का पूरा खर्च दिल्ली सरकार को उठाना था जबकि इसको चलाने की जिम्मेदारी वक्फ बोर्ड को निभानी है। इन स्कूलों के निर्माण और रखरखाव आदि की योजना बनाने के लिए दिल्ली के उपमुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया के नेतृत्व में एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने हैदराबाद का दौरा भी किया था। इस दौरे के दौरान उन्होंने हैदराबाद में चलाए जा रहे शिक्षण संस्थानों के बारे में जानकारी एकत्र की थी और उसी की तर्ज पर दिल्ली में स्कूल बनाने का फैसला लिया गया था।

मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने पहली बार सत्ता में आने के बाद दिल्ली भर में 200 स्कूल खोलने का ऐलान किया था। इसी ऐलान पर अमलीजामा पहनाते हुए वक्फ बोर्ड ने अपनी भूमि पर फिलहाल पांच स्कूल बनाने का फैसला लिया था लेकिन पांच साल का अरसा गुजर जाने के बाद भी दिल्ली वक्फ बोर्ड के अंग्रेजी मीडियम स्कूल बनाने की यह योजना अभी तक हवा में ही नजर आ रही है। बोर्ड के जरिए आनन-फानन में चयनित शिक्षक इन स्कूलों में अपनी तैनाती के लिए बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।


इस सिलसिले में दिल्ली वक्फ बोर्ड के चेयरमैन अमानतुल्लाह खान कुछ भी बताने को तैयार नहीं हैं। इस सवाल पर वह फिलहाल कन्नी काट रहे हैं। दिल्ली में शिक्षा के क्षेत्र में काम कर रहे संगठन अल्लामा रफीक ट्रस्ट के अध्यक्ष मकसूद अहमद ने दिल्ली सरकार और दिल्ली वक्फ बोर्ड से स्कूल खोलने के अपने वादे को पूरा करने की मांग की है। उनका कहना है कि दिल्ली में स्कूल खुलने से अल्पसंख्यक समुदाय के छात्रों को काफी कम खर्च में अंग्रेजी माध्यम की शिक्षा प्राप्त करने का मौका मिलेगा। सामाजिक कार्यकर्ता अशफाक अहमद नगमी ने कहा है कि जिस समय दिल्ली सरकार ने यह फैसला लिया था, उस समय दिल्ली के अल्पसंख्यक समुदाय की तरफ से इसका जोरदार स्वागत किया गया था। इसको एक लंबा समय निकल जाने के बाद भी धरातल पर स्कूलों के बारे में कोई जानकारी मौजूद नहीं होने से निराशा पाई जा रही है। सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. मुफ्ती जावेद अनवर ने भी दिल्ली सरकार और दिल्ली वक्फ बोर्ड से जल्द से जल्द स्कूलों का निर्माण शूरू कराने की मांग की है। उनका कहना है कि दिल्ली में अल्पसंख्यकों के शैक्षिक पिछड़ेपन को दूर करने के लिए यह स्कूल मील का पत्थर साबित होंगे।

Next Story
Share it