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हैपीनेस क्लास में शामिल हुए सिसोदिया, कहा- छात्रों को टीचर बनता देख अच्छा लगा

हैपीनेस क्लास में शामिल हुए सिसोदिया, कहा- छात्रों को टीचर बनता देख अच्छा लगा
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नई दिल्ली । एक्शन इंडिया न्यूज़

उप-मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने शुक्रवार को दिल्ली सरकार के स्कूलों के बच्चों की हैपीनेस क्लास में शामिल होकर इस बार बाल दिवस अनोखे तरीके से मनाया। उन्होंने कहा कि बाल दिवस इसलिए मनाया जाता है ताकि हमारे अभिभावक और अध्यापक अपनी भूमिका के बारे में विचार कर सकें। सिसोदिया ने बच्चों से जाना कि लॉकडाउन के दौरान हैपीनेस क्लासेज ने किस तरह से उनकी भावनाओं पर सकारात्मक प्रभाव डाला। इस ऑनलाइन स्पेशल क्लास का संचालन बच्चों ने स्वयं किया।

सिसोदिया ने कहा कि दो साल पहले हैपीनेस क्लासेज शुरू हुई थीं। कोरोना महामारी के दौरान भी यह जारी रहीं, जो कि छात्रों के लिए बहुत मुश्किल समय था। जिस तरह से हमारे छात्र हैपीनेस क्लासेज को अनोखे तरीके से अभिभावकों और दोस्तों के साथ साझा करते हैं, ऐसे में हमारे छात्रों को हैपीनेस करिकुलम का टीचर बनते देख बहुत खुशी होती है।

इस दौरान बच्चों ने उप-मुख्यमंत्री के साथ अपने अनुभव साझा किए।एसकेवी, विनोद नगर पश्चिम की छात्रा हर्षिता रावत ने कहा कि वह रोज अपनी मां और बहन के साथ तीन मिनट मेडिटेशन करती है। उसने कहा कि लॉकडाउन के दौरान घर पर रहते हुए हैपीनेस क्लासेज सबसे बड़ी प्रेरणा का स्रोत थी। एक अन्य छात्र पीयूष गुरुरानी ने कहा कि माइंडफुल क्लासेज ने मुझे निराशा के दौर से दूर करके मेरे मन को शांत करने में बहुत मदद की।

स्पेशल क्लास का संचालन बीपीएसकेवी, देवली की गुलशपा और जीसीएसवी, द्वारका के निखिल ने किया। एक अन्य स्टूडेंट गुरमीत ने छात्रों और अध्यापकों के लिए माइंडफुल क्लास के निर्देश दिए। सभी ने निर्देशों को सुनते हुए अपने मन को शांत करने के लिए मेडिटेशन किया।

इसके बाद कहानी सुनाने का सत्र चला जिसमें छात्रों ने किसी स्थिति विशेष पर कहानियां पढ़ी और उन पर चर्चा की। इस दौरान छात्रों ने भौतिकता और पारिवारिक मूल्यों तथा रिश्तों को लेकर भी चर्चा की। कई स्टूडेंट्स ने अपने जीवन से जुड़े अनुभवों तथा स्थितियों पर चर्चा की। अंत में सभी बच्चों को तरह-तरह की भाव भंगिमा बनाकर यह बताने के लिए कहा गया कि वह कैसा महसूस कर रहे हैं। इसके बाद एक बार फिर माइंडफुलनेस का सेशन हुआ।

उल्लेखनीय है कि दिल्ली सरकार के स्कूलों में जुलाई 2018 में नर्सरी से आठवीं कक्षा तक हैपीनेस करिकुलम लागू किया गया था। इसके अंतर्गत माइंडफुलनेस, कहानी सुनाना, गतिविधियों तथा अभिव्यक्ति पर जोर दिया जाता है। इन कक्षाओं को काफी खुला और संवाद केंद्रित बनाया जाता है।

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