Action India
अन्य राज्य

प्रतिबंध के बावजूद सूअर मांस की खरीद-बिक्री राज्य में जारी

गुवाहाटी । एएनएन (Action News Network)

राज्य सरकार द्वारा सूअर के मांस की खरीद बिक्री पर प्रतिबंध लगाए जाने के बावजूद रविवार को राज्य भर में धड़ल्ले से सुअर मांस की बिक्री होते देखी गयी। हालांकि, इस सिलसिले में लोग गिरफ्तार भी हुए हैं। इसे गोपनीय तरीके से बेचा जा रहा है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार रविवार की सुबह पुलिस ने राज्य के जोरहाट शहर के निकटवर्ती तीताबर बोकाहोला चाय बागान इलाके में सूअर का मांस बेच रहे एक व्यक्ति को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। साथ ही भारी मात्रा में सूअर का मांस भी बरामद किया।

उल्लेखनीय है कि असम के छह जिलों में बीमार होकर 1964 सूअरों की मौत हो चुकी है तथा राज्य भर में बड़ी संख्या में सूअर बीमार हुए हैं। हालांकि, सूअरों की इस बीमारी के बारे में अबतक जांच का ठोस रिपोर्ट सामने नहीं आया है। फिर भी ऐसी आशंका व्यक्त की जा रही है कि स्वाइन फ्लू की वजह से सूअरों की मौत हो रही है।

इस बाबत शनिवार को मुख्यमंत्री सर्वानंद सोनोवाल के सरकारी आवास पर मुख्यमंत्री, राज्य के कृषि एवं पशुपालन मंत्री अतुल बोरा, राज्य के मुख्य सचिव, कृषि विश्वविद्यालय के चिकित्सकों एवं विशेषज्ञों की एक 15 सदस्यीय टीम की विशेष बैठक आयोजित की गयी। बैठक के बाद सूअर के मांस की खरीद-बिक्री पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया गया था।

मुख्यमंत्री के साथ हुई बैठक के बाद यह सैंपल नेशनल हाई सिक्योरिटी लेबोरेटरी (एनएचएसएल) भोपाल भेजने का निर्णय लिया गया। साथ ही सबसे प्रभावित इन छह जिलों को कंटेंनमेंट जोन के रूप में घोषित कर दिया गया। जहां लोगों के आवाजाही पर रोक लगा दी गई है। वहीं, सूअर फार्म से जुड़े सभी लोगों को बाहर निकलने से मना कर दिया गया है। सूअर फार्म में सेनिटाइजेशन का काम शुरू हो गया है। उल्लेखनीय है कि सूअर पालन पूर्वोत्तर की अर्थव्यवस्था की एक मजबूत कड़ी है। सूअर के मांस के निर्यात से पूर्वोत्तर को प्रत्येक वर्ष तीन हजार करोड़ रुपए की आमदनी विदेशों से होती है। वहीं, राज्य के बड़ी संख्या में बेरोजगार सूअर पालन के कार्य में लगे हुए हैं।

ऐसे में सूअर के मांस पर प्रतिबंध लगाने से निश्चित ही इस कारोबार को धक्का लगेगा। लेकिन, इस बीमारी को अधिक फैलने से रोकने के लिए यह करना फिलहाल आवश्यक हो गया है। सूअर पालन से जुड़े लोगों से अपील की गई है कि वे बीमारी से मर रहे सूअरों को छह फीट गहरे गड्ढे में दफनाएं, जिससे उसका वायरस निकल कर बाहर नहीं आ सकेगा।

Next Story
Share it