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परेशान की मदद ने किया बूस्टर का काम और हो गया चुनौतियों से मुकाबला : जिलाधिकारी डॉ. पांडेय

परेशान की मदद ने किया बूस्टर का काम और हो गया चुनौतियों से मुकाबला : जिलाधिकारी डॉ. पांडेय
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  • अनलॉक की स्थिति से निपटने के लिए लोगों की स्वं की जागरूकता अनिवार्य

गाजियाबाद । एएनएन (Action News Network)

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली से सटे बेहद महत्वपूर्ण गाजियाबाद के जिलाधिकारी डॉक्टर अजय शंकर पांडेय ने जब से जिले का चार्ज संभाला है तब से उनके सामने एक से एक चुनौती सामने आकर खड़ी हुई है जिनका उन्होंने पुलिस व प्रशासनिक टीम के साथ उनका मजबूती के साथ ना केवल मुकाबला किया है, बल्कि जिले में अमन -चैन बरकरार रखा है।

पहले सिटीजन अमेंडमेंट एक्ट (सीएए) के खिलाफ आंदोलन इसके बाद दिल्ली में हुए दंगों के दौरान बॉर्डर पर रात -दिन डेरा डालकर मक्का की फ़सल की तरह रखवाली की और दिल्ली -गाजियाबाद की सीमा पर असमाजिक तत्वों को घुसने नहीं दिया।पिछले तीन महीनों के दौरान कोविड -19 (कोरोना संक्रमण ) से जिलाधिकारी डॉक्टर अजय शंकर पांडेय जिले की जनता को बचाने के लिए दिन -रात एक किए हुए हैं ।

हालत यह है कि पिछले तीन महीने के दौरान वह पूरी नींद भी नहीं ले पाए हैं । लेकिन वे हर हाल में अपने कर्तव्य का पालन निर्बाध रूप से कर रहे हैं । 'एक्शन इंडिया समाचार' ने बुधवार को जिलाधिकारी डा. पांडेय से कोविड -19 के संकटकाल के दौरान क्या -क्या चुनौतियां सामने आईं और उन्होंने किस तरह से उनका मुकाबला किया।

ऐसे अनेक सवालों पर उनसे विस्तृत बातचीत की। उनका कहना था कि वह ईश्वर में विश्वास रखने वाले इंसान हैं और उसी पर विश्वास करते हुए उन्होंने अपने कर्तव्य को अंजाम दिया जो लगातार जारी है। वे कहते हैं कि सीएए के विरोध में आंदोलन हो या फिर दिल्ली दंगों के दौरान जिले में सुरक्षा क़ायम रखने की चुनौती थी।

इन सब पर काबू पाना आसान था चूंकि प्रशासनिक अधिकारियों के सामने इस तरह की चुनौती आती ही रहती हैं, लेकिन कोरोना संकटकाल ऐसी चुनौती है जो पहले कभी नहीं आई। इस काल में पुरानी चुनौतियों से सीखने की कोई गुंजाइश भी नहीं है। इसमें रोजाना नई चुनौतियां सामने आती हैं और उन पर काबू पाना नई सोच और अमल से करना होता है।

जहां तक पिछले तीन महीने के दौरान आई चुनौतियों की बात करें तो उनमें कई ऐसे मामले थे जिन पर नियंत्रण पाना बेहद मुश्किल था, लेकिन सकारात्मक सोच के साथ जब प्रयास किए गए तो कामयाबी मिली। जिलाधिकारी डा. पांडेय कहते हैं कि इस दौरान सबसे बड़ी और बेहद मुश्किल चुनौती दिल्ली को लेकर थी।

दिल्ली में होम कोरोंटाइन (गृह एकांतवास) की व्यवस्था थी जबकि गाजियाबाद में कोरोंटाइन केंद्र में ही एकांतवास किए जाने का नियम था। इस स्थिति में दिल्ली के काफ़ी लोग गाजियाबाद आकर गृह एकांतवास में रहने लगे जिनको खोजना ही बड़ी चुनौती था।

यदि किसी को खोज लिया गया तो वह दिल्ली के नियमों की दुहाई देकर गृह एकांतवास में रहना चाहता था। इस स्थिति में उनको समझकर कोरोंटाइन केंद्र यानि एकांतवास कराना आसान काम नहीं था। लेकिन पुलिस, स्वास्थ्य विभाग व प्रशासनिक टीम के सहयोग से इसमें भी सफलता मिली।

खोड़ा व लोनी जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में स्थिति पर काबू पाना बड़ी चुनौती थी लेकिन वहां भी सभी लोगों ने मिलकर स्थिति काे बेहतर बनाये रखा। साथ ही प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी का करीब -करीब रोजाना किए जाने वाला उत्साहवर्द्धन भी इसमें बहुत काम आया और चुनौतियों से लड़ने में सभी को प्रेरणा मिली।

जिलाधिकारी डा.पांडेय कहते हैं कि इस स्थिति में कानून व्यवस्था को सुदृढ़ रखना भी बड़ी चुनौती थी, लेकिन उस पर भी कामयाबी मिली। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि जिस तरह से अनलॉक किए जाने का दौर शुरू हुआ है उसके बाद लोगों का आपस में सम्पर्क बढ़ा है। साथ ही कोरोना संक्रमण के और ज्यादा प्रसार होने की संभावना बढ़ गई है।

इस स्थिति में संक्रमण से बचाव करना पहले से भी बड़ी चुनौती है लेकिन मुझे पूरा भरोसा है कि जन सहयोग से इस चुनौती पर भी काबू पा लेंगे। अब आम जनमानस को स्व:अनुशासित होना होगा और सरकार ने जो नियम बनाये हैं उन पर शत-प्रतिशत अमल में लाना होगा।

बाजार या अन्य सार्वजनिक स्थानों पर जाने से पहले मास्क का प्रयोग व कम से कम दो गज की शारीरिक दूरी का पालन करना होगा। हाथों को साबुन से धोने या सेनेटाइजर से सेनेटाइज़ करने को अपनी आदत में शुमार करना होगा।

यदि हम ऐसा करेंगे तो निश्चित तौर पर कोरोना पर काबू पा लेंगे। जहां तक आने वाली चुनौतियों को लेकर तैयारी की बात है तो प्रशासन पूरी तरह से तैयारी में जुटा हुआ है। हाल ही में एक एक निर्णय यह लिया गया है कि जोखिम क्षेत्र (कंटेंमेंट जोन) में जहां पोलियो की तर्ज पर ब्लॉक लेबल अधिकारी (बीएलओ) घर -घर जाकर लोगों को जागरूक करेंगे जबकि बाकी स्थानों पर भी लोगों को इसको लेकर जागरूक किया जायेगा ।

यानि पूरी तरह से अनलॉक की स्थिति से निपटने के लिए पूरी तैयारी कर ली जाएगी। डीएम का कहना है कि इस दौरान सबसे खास बात यह रही कि सकारात्मकता और किसी परेशान की मदद में उनके अंदर बूस्टर का काम किया यानि उनकी एनर्जी को बढ़ाये रखा वरना इस दौरान उन्हें व अन्य अफसरों की नींद भी पूरी नहीं होती। लोगों को इस महामारी पर काबू पाने के लिए स्व:जागरूक होना होगा ।

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