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जिलों का प्रभार, संकट से पार पाने के बढ़े आसार

जिलों का प्रभार, संकट से पार पाने के बढ़े आसार
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  • कोरोना पर सरकार ने बनाए हैं जिलों के प्रभारी मंत्री

  • कौशिक, यशपाल और सतपाल के हिस्से संवेदनशील जिले

देहरादून । एएनएन (Action News Network)

कोरोना संकट से निपटने के लिए त्रिवेंद्र सरकार ने अपने सभी मंत्रियों को जिलों की कमान सौंपी हैं। कुछ जिले संवेदनशील हैं। इस वजह से यहां के प्रभारी मंत्रियों को ज्यादा पसीना बहाना पड़ रहा है। तमाम जिले ऐसे भी हैं, जहां पर कोरोना का खतरा या तो है नहीं, या फिर बहुत कम है। ऐसे में संबंधित प्रभारी मंत्री बहुत हद तक राहत महसूस कर रहे हैं। सरकार की यह पहल रंग लाई है। प्रभारी मंत्रियों के माध्यम से सरकार हर जिले की स्थिति पर सीधी नजर रख रही है। उसे अफसरशाही पर आश्रित नहीं होना पड़ रहा और संकट से पार पाने के आसार बढ़ गए हैं।
उत्तराखंड में अभी तक कोरोना पाॅजिटिव के 37 मामले सामने आए हैं। यह राहत की बात है कि कोरोना से किसी की जान नहीं गई।

इन स्थितियों के बीच, देहरादून, हरिद्वार, उधमसिंह नगर और नैनीताल जिले कोरोना संक्रमण के लिहाज से सबसे ज्यादा संवेदनशील होकर उभरे हैं। इनमें भी देहरादून सबसे ज्यादा हाॅट स्पाट हैं। यहां पर 18 मामले निकले हैं। इसके बाद नैनीताल जिले का नंबर है, जहां पर आठ मामले हैं। हरिद्वार जिले में अभी तक पांच कोरोना पाॅजिटिव पाए गए हैं। उधमसिंह नगर में चार मामले मिले हैं। वैसे, अल्मोड़ा और पौड़ी जिले में भी एक-एक मामले सामने आए हैं, लेकिन उन्हें अपेक्षाकृत कम संवेदनशील माना जा रहा है।

मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने जिस वक्त मंत्रियों को जिलों का प्रभार सौंपा था, उस वक्त कोरोना संकट के लिहाज से जिलों की संवेदनशीलता तय नहीं हुई थीं। मगर एक के बाद एक जमातियों के सामने आने और उनकी धरपकड़ के सरकार के प्रयासों के बाद स्थिति बदल गई। आज की बात करें, तो रेड जोन में शामिल देहरादून जिले में 18 मामले सामने आए हैं। इस जिले का प्रभार मदन कौशिक पर है। कौशिक के हिस्से में उधमसिंह नगर जिला भी है, जहां पर कोरोना पाॅजिटव चार मामले सामने आए हैं। दोनों संवेदनशील जिलों की समीक्षा कौशिक कर रहे हैं। इसी तरह, यशपाल आर्य के सामने भी चुनौती बड़ी है।

उनके पास नैनीताल और अल्मोड़ा जिले हैं। इन दोनों ही जिलों में कोरोना पाॅजिटिव मिले हैं। इसमें नैनीताल जिला ज्यादा संवेदनशील बना हुआ है। कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज के जिम्मे सिर्फ एक हरिद्वार जिला है, लेकिन वहां भी कोरोना के अभी तक पांच मामले सामने आ चुके हैं।दूसरी तरफ, अरविंद पांडेय, सुबोध उनियाल, धन सिंह रावत, रेखा आर्या जैसे प्रभारी मंत्रियों के जिलों में कोरोना का एक भी मामला सामने नहीं आया है।

इस लिहाज से ये मंत्री काफी हद तक फ्री हैं। कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत के प्रभार वाले जिले पौड़ी में एक मामला सामने आया है, लेकिन वहां की स्थिति को बहुत संवेदनशील नहीं माना जा रहा है।शासकीय प्रवक्ता मदन कौशिक का मानना है कि उत्तराखंड की स्थिति अन्य राज्यों के मुकाबले काफी हद तक बेहतर है। सरकार के प्रयास और जनता का सहयोग रंग ला रहा है। मंत्रियों को कामकाज के लिहाज से जिलों का प्रभार दिया गया है। पूरी सरकार एक टीम की तरह काम कर रही है।

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