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मनुष्य, पशु-पक्षी, आयु की रक्षा के लिए आयुर्वेद एवं योग की सेवा में जुटे डा. दुर्गेश वैद्य

मनुष्य, पशु-पक्षी, आयु की रक्षा के लिए आयुर्वेद एवं योग की सेवा में जुटे डा. दुर्गेश वैद्य
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सुल्तानपुर ।

जड़ी बूटियां प्रकृती के साथ हर जीवन के लिए विशेष रूप से मनुष्य के लिए संजीवनी है। इससे लाइलाज बीमारी को भी आसानी से ठीक किया जाता है। वैद्य परम्परा हमारे ऋषि मुनियों की देन है। पिछले सात साल से निःशुक सेवा कर रहे डॉ दुर्गेश वैद्य ने एक्शन इंडिया समाचार से बात की।

नगर के पतञ्जलि चिकित्सालय गभड़िया के माध्यम से सेवा का कार्य कर रहे डॉ दुर्गेश मिश्रा आयुर्वेद के साथ योग भी सीखने का काम करते हैं। योग के प्रति लोगों को जागरूक किया जा रहा है। उन्होंने ने कहा कि कोरोना महामारी के दौरान जब पूरा विश्व इस अदृश्य बीमारी से लड़ने में अपने को कमजोर महसूस कर रहा है, तो ऐसे समय में सबकी निगाहें हिन्दुस्थान पर है।

बताया कि योग और आयुर्वेद हमारे ऋषि मुनियों की देन है। सृष्टि उत्पत्ति के साथ अथर्ववेद के रूप में मनुष्य, पशु पक्षी, आयु की रक्षा के लिए इस मूलांक में अवतरित हुआ है। जो अपने प्रथम प्रयोजन "स्वस्थ, स्वास्थ्य, रक्षणम" के माध्यम से प्राणियों की रोगों से रक्षा करता है।

आयुर्वेद अपने अद्वितीय चिकित्सा पद्धति से पंचकर्म पद्धति की जड़ी-बूटी, आहार-विहार, योगासन-प्राणायाम आदि के रूप की मूल कारण को दूर कर रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ा देता है, जिसके द्वारा मनुष्य स्वस्थ रह पाता है। आयुर्वेद पद्धति एवं योग के माध्यम से अपने आप को बचा सकते हैं। आयर्वेद स्वास्थ्य की रक्षा करता है। ऋतु के अनुसार अपने आहार विहार से स्वास्थ्य को बनाये रखा जा सकता है। रोग प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ती है। हर व्यक्ति दिनचर्या से भी अपने को मजबूत बना सकता है।

कोरोना संक्रमण से बचाव

शरीर में प्रतिरोधक क्षमता अन्य देशों की तुलना में अपने देश में अधिक है। कफ जैसे विकार के लिए दालचीनी, कालीमिर्च, गुड़, तुलसी से बने काढ़े का सेवन करना चाहिए। गर्म पानी पीने से गले में होने वाले विकार नहीं होते हैं। प्रोटीन का अधिक से अधिक सेवन करना चाहिए। दूध का भी सेवन फायदेमंद हैं।

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