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आपातकाल को पूर्व मंत्री श्यामा शर्मा और विधायक डॉ राजीव बिंदल ने बयाँ की अपनी-अपनी दास्तान

नाहन । एएनएन (Action News Network)

25 जून की रात्रि 1975 में जब देश सोया था और अगली सुबह जब जगा तो हालात बदल चुके थे और देश में आपातकाल लग चूका था। इंदिरा गांधी देश की माननीय प्रधानमंत्री थीं। इलाहबाद उच्च न्यायालय ने प्रधानमंत्री के खिलाफ फैसला दिया और उनकी संसदीय सदस्यता समाप्त कर दी थी। इंदिरा गांधी को पद से त्यागपत्र देना चाहिए था, परन्तु ऐसा नहीं हुआ।

उन्होंने राष्ट्रपति महोदय से आदेश करवा कर देश में आंतरिक आपातकाल लागू कर दिया गया। अर्धरात्रि के मध्य देश के सभी बड़े-बड़े नेताओं को सोते-सोते उठा कर जेलों की काल कोठरी में डाल दिया गया।

इसी को लेकर गुरुवार को नाहन में विधायक डॉ राजीव बिंदल ने कहाकि वो समय बहुत कठिन था। समाचार पत्र आदि पर सेंसर था तथा जो भी सरकार के विरुद्ध बोलता था उसे जेल भेज दिया जाता था। वो खुद तब विद्यार्थी परिषद से जुड़े हुए थे और उन्हें भी जेल भेजा गया था। नाहन की पूर्व विधायक व् पूर्व मंत्री रही श्यामा शर्मा को आज हिन्दू जागरण मंच ने इस मौके पर सम्मानित भी किया और उनके अनुभवों को भी जाना।

इस मौके पर श्यामा शर्मा ने कहा कि वो आपातकाल का समय बहुत कठिन था और वो भी इस दौरान शांता कुमार के साथ नाहन केंद्रीय कारगर में रही परन्तु लोकतंत्र की बहाली को प्रयास जारी रहे।

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