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स्टाक मार्केट में भारी गिरावट : 33 वर्ष पुराना रिकॉर्ड पीछे छोड़ दिया

स्टाक मार्केट में भारी गिरावट : 33 वर्ष पुराना रिकॉर्ड पीछे छोड़ दिया
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न्यूयॉर्क। एएनएन (Action News Network)

फ़ेड रिज़र्व की ओर से बैंकों को सस्ती दरों पर डेढ़ ख़रब डालर के आश्वासन के बावजूद न्यूयॉर्क वाल स्ट्रीट स्टाक मार्केट में चौथे दिन गुरुवार को भी गिरावट का सिलसिला बना रहा। कोरोना वायरस के ज़बरदस्त असर के कारण अमेरिकी निवेशकों में दिन भर भगदड़ मची रही, जिसका क़हर यूरोपीय और एशियाई मार्केट पर देखा जा रहा है। जानकारों का मत है कि इसे पिछले 33 वर्षों में गुरुवार के दिन को एक ‘काले अध्याय’ के रूप में याद किया जाएगा। उल्लेखनीय है कि 19 अक्टूबर, 1987 को डाव जोंस में एक साथ 22.6 प्रतिशत की गिरावट हुई थी। तब उसे काले दिन के रूप में याद किया गया था।

एस एंड पी 500 इंडेक्स में 1987 के पश्चात पहली बार 9.5 प्रतिशत की गिरावट रही। इस से एस एंड पी 500 इंडेक्स के शेयर 2480.84 अंक लुढ़क गए जिस से यह अपनी सहन क्षमता से नीचले स्तर पर आ गए। डाव जोंस इंडेक्स में भी 9.99 प्रतिशत की गिरावट हुई तो नस्डेक 9.43 प्रतिशत गिरे। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की ओर से मार्केट में स्थिरता लाने के सभी प्रयास उस समय विफल हो गए जब फ़ेड रिज़र्व के डेढ़ खरब डालर के सटे ऋणों के निर्णय के पश्चात थोड़ी देर तो स्टाक मार्केट में स्थिरता का संदेश गया, लेकिन साँझ ढलने से पहले गिरावट का जो सिलसिला चला, वह मार्केट बंद होने तक जारी रहा।

ब्रिटेन को छोड़ कर यूरोपीय देशों के नागरिकों के अमेरिका आने जाने पर प्रतिबंध की घोषणा का स्टाक मार्केट पर प्रतिकूल असर पड़ा है। कच्चे तेल और ऊर्जा शेयरों के साथ बोईंग सहित एयरलाइनों के शेयर भी रसतल की ओर बढ़ चले। जानकारों का मत है कि व्हाइट हाउस की यह घोषणा स्टाक मार्केट के लिए बूमरेंग सिद्ध हुई।

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