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लॉकडाउन में छत को बनाया खेत, दस हजार स्क्वायर फीट में की गई जैविक खेती

लॉकडाउन में छत को बनाया खेत, दस हजार स्क्वायर फीट में की गई जैविक खेती
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बेगूसराय। एएनएन (Action News Network)

कोरोना वायरस के कहर से बचने के लिए जारी जारी लॉकडाउन मजदूरों के लिए अभिशाप बनकर सामने आया है। अपना ही घर लोगों को जेल का अनुभव करा रहा है लेकिन यह सब कुछ मानसिकता पर निर्भर करता है। बच्चे का रुझान ऑनलाइन पढ़ाई तथा पुराने खेलों की ओर है। कभी खेत और मवेशी से दूर रहने वाले लोग भी घर में रहने के दौरान इससे जुड़े हुए हैं। कुछ लोग सृजनशीलता की नई गतिविधि को अंजाम दे रहे हैं।

इसी कड़ी में बेगूसराय के एक स्कूल संचालक ने अपनी पूरी छत पर ही जैविक सब्जी की खेती शुरू कर दी। उनके पूरे परिवार के लोग भी इसमें सहयोग कर रहे हैं। मामला बेगूसराय शहर मुख्यालय के भारद्वाज गुरुकुल का है जहां कि करीब दस हजार स्क्वायर फीट में सब्जी की खेती की गई है। अलकतरा के खाली प्लास्टिक ड्रम में मिट्टी और वर्मी कंपोस्ट डालकर छत पर पिलर के समीप रख दिया गया। हर ड्रम में कद्दू या झींगा का बीज बोया गया।

एकेडमिक ब्लॉक, हॉस्टल ब्लॉक एवं रिसेप्शन के करीब दस हजार स्क्वायर फीट की छत पर सबसे पहले अलान बनाया गया। इसके बाद पुराने कपड़़ेे, बिजली के बेकार तार एवं लोहे के तार से इसे जाल बना लिया गया, जिस पर सब्जियां फलेंंगी। निदेशक शिव प्रकाश भारद्वाज ने बताया कि अब विद्यालय की कंक्रीट की छत सब्जी की खेती के लिए तैयार है।कद्दू, झींगा, परवल, टमाटर, करेला, लालमी एवं अन्य कई तरह की सब्जियों की खेती जारी रहेगी। इससे बाजार से जहरीला इंजेक्शन वाले कद्दू से मुक्ति मिलेगी।

ऑर्गेनिक सब्जी का आनंद ही कुछ और है। टॉप फ्लोर की छत गर्म नहीं होगी तो आराम के साथ-साथ बिजली की बचत भी होगी। छत की खेती के बहाने हर रोज छत पर जाने का मौका और बहाना मिलेगा। सुबह के सूर्य के दर्शन के साथ-साथ सैकड़ों सीढ़ियां चढ़ने और उतरने का मौका मिलेगा जो स्वास्थ्य के लिए बढ़िया है। जब अपने पास छत है तो फिर सब्जी के लिए सिर्फ बाजार पर निर्भर क्यों रहें। हरीभरी छत सिर्फ खूबसूरत ही नहीं लगेगी, यह भरपूर ऑक्सीजन देगा और छत पर ही वर्षा जल जमा कर इन पौधों में उपयोग किया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि इससे घर के बच्चों को प्रेरित कर पौधे की सेवा का संस्कार सिखाया जा सकता है। छत की परिलक्षित गर्मी के कारण ही वायुमंडलीय तापमान काफी बढ़ जाता है। अगर सबों की छत हरीभरी हो जाय तो वायुमंडलीय तापमान कम किया जा सकता है। शेड नेट जो आमतौर पर नर्सरी में लगा होता है उसको अलान पर डालकर गमला, थर्मोकोल बॉक्स और कैरेट बॉक्स एवं अन्य टूटे- फूटे बर्तन में भी सब्जी की खेती की जा सकती है।

हर वर्ष चावल, दाल, गेंहू, चीनी, नमक, खाद्य तेल एवं दूध की कीमत में मामूली बढ़त होती है या फिर मूल्य स्थिर होता है। लेकिन सब्जी, मसाला और फल की कीमत सबों को चुभती है क्योंकि यह स्थानीय स्तर पर उपलब्ध होने के साथ बाहर से भी आती है और जल्दी खराब हो जाती है। उन्होंने कहा कि हम सब अगर किताबी ज्ञान को थोड़ा प्रैक्टिकल रूप दे दें तो बड़ा बदलाव लाया जा सकता है।

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