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धान की जब्ती कार्रवाई से शहर की मंडियों में फसल लाने से डर रहे किसान

धमतरी। एएनएन (Action News Network)

जिले में धान की अवैध परिवहन पर लगातार हो रही कार्रवाई से अंचल के किसानों में हड़कंप मचा हुआ है। धान जब्ती व जेल भेजने की कार्रवाई की आशंका से किसान चिंतित हैं। इसलिए कटाई-मिंजाई के बाद किसान धान बेचने ट्रैक्टर-ट्राली से मंडी तक नहीं ला पा रहे हैं, क्योंकि उन्हें नियमावली मालूम नहीं है। कई किसानों की मांग है कि वे अपना कुछ धान मंडी में बेचना चाहते हैं, इसके लिए खाद्य विभाग नियमावली जारी करें।

छत्तीसगढ़ प्रदेश में धान के समर्थन मूल्य बढ़ने से यहां ओड़िशा व आंध्रप्रदेश के धान खपाए जाने की आशंका है, इसलिए जिला प्रशासन खरीदी शुरू होने से पहले विशेष निगरानी रखे हुए हैं। माहभर पहले राजस्व विभाग, मंडी, खाद्य विभाग समेत विभिन्न विभागों के अधिकारियों की संयुक्त टीम बनाकर शहर पहुंच सीमा क्षेत्रों में टीम तैनात की गई है, जो वाहनों में भरकर लाए जा रहे धान की जांच कर रही है।

पिछले दिनों टीम ने अवैध परिवहन कर रहे ग्राम सूराके 150 कट्टा धान जब्त की। सिहावा- कोलियारी मार्ग में भी धान जब्ती की कार्रवाई की। लगातार धान के अवैध परिवहन पर हो रही कार्रवाई से अंचल के किसानों में दहशत है। कटाई-मिंजाई के बाद कई किसान धान बेचना चाहते हैं, लेकिन धान के अवैध परिवहन पर हो रही कार्रवाई से किसान दहशत में है।

ग्राम खरतुली, लोहरसी, मुजगहन, रत्नाबांधा, भानपुरी, खपरी, देमार,अर्जुनी के किसान रज्जू साहू, खिलानंद, धनेश्वर कुमार साहू, पोटियाडीह, भोज कुमार, अंजोर राम का कहना है कि समर्थन मूल्य में धान खरीदी शुरू होने में अभी समय है। इस संबंध में जिला खाद्य अधिकारी संतोष दुबे ने बताया कि धान बेचने मंडी आने वाले किसान वाहनों में जब धान भरकर लाते हैं तो साथ में ऋण पुस्तिका व मंडी से जारी अनुज्ञा प्रमाण पत्र दिखाएं ताकि उनका धान वैध माना जाए। यह दस्तावेज नहीं होने पर अवैध परिवहन माना जाएगा।

मंडी में बेचना चाहते हैं अतिरिक्त धान कटाई-मिंजाई के बाद किसान अपना अतिरिक्त धान मंडी में बेचना चाहते हैं, लेकिन दहशत के चलते धान मंडी तक नहीं ला पा रहे हैं । उन्हें मालूम नहीं है कि वाहन में धान लाने के लिए कौन-कौन से दस्तावेज साथ लेकर आना है। दस्तावेज में कमी होने पर कार्रवाई होने का डर है। यही वजह है कि किसान अपना धान घर व खलिहान में रखे हुए है। धान के अवैध परिवहन पर हो रही कार्रवाई के कारण गांवों में धान खरीदने वाले कोचिया भी धान नहीं खरीद रहे हैं।

धान की कटाई- मिंजाई के बाद किसानों को मजदूरी भुगतान, मड़ई व सगाई जैसे अन्य कई कार्यों के लिए रूपये की जरूरत है। लेकिन धान नहीं बिकने के कारण उनके पास रूपये की तंगी है। किसानों की मांग है कि जिला खाद्य विभाग यह बात सार्वजनिक करें कि किसानों को बेचने के लिए वाहन में धान के साथ खेती जमीन के कौन से दस्तावेज लेकर आना पड़ेगा, ताकि उनका धान अवैध परिवहन न माना जाए और कार्रवाई न हो। विभाग के अधिकारी यह आदेश जारी किए बगैर सीधे कार्रवाई कर रहे हैं, जो किसान हित में नहीं है।

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