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स्कूलों में औषधि किट के लिए डीएमसी ने नियम विरुद्ध जारी की निविदा

स्कूलों में औषधि किट के लिए डीएमसी ने नियम विरुद्ध जारी की निविदा
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  • बड़े व्यापारी को लाभ पहुंचाने खनिज न्यास मद में भ्रष्टाचार की आशंका

कोरबा। एएनएन (Action News Network)

कोरबा जिले का शिक्षा विभाग इन दिनों विवादों में घिरता नज़र आ रहा है। अधीनस्थ कर्मियों की अनुशासनहीनता इतनी कि कामकाज को लेकर विभागीय अधिकारी तक को जानकारी नहीं दी जा रही है। यहां शिक्षा विभाग के समग्र शिक्षा में जिला मिशन समन्वयक (डीएमसी) एस के अम्बस्ट ने जिला खनिज न्यास मद से प्राथमिक स्वास्थ्य औषधि किट प्रदान करने के लिए एक निविदा जारी कर दी है।

शिक्षा विभाग से जुड़े जानकारों की मानें तो डीएमसी को किसी भी प्रकार की निविदा जारी करने का अधिकार नहीं है। डीएमसी केवल फाइल में अनुमोदन लेकर जिला शिक्षाधिकारी या उच्चाधिकारी के हस्ताक्षर से निविदा निकाल सकते हैं लेकिन यहां डीएमसी एस के अम्बस्ट ने खुद ही अपने हस्ताक्षर से निविदा जारी कर दी। यहां तक कि निविदा से संबंधित जानकारी जिले के बेवसाइट में भी प्रदर्शित नहीं की गई है।

विभागीय सूत्र बताते हैं कि डीएमएफ की सामान्य निविदा जारी होने की सूचना एक ही पत्र में कलेक्टर सह अध्यक्ष प्रबंधकारिणी समिति जिला खनिज न्यास व जिला सूचना एवं विज्ञान अधिकारी (एनआईसी) को दी जाती है किंतु राज्य में यह संभवत: पहला मामला है जब एक डीएमसी ने निविदा जारी की हो, इससे पहले समग्र शिक्षा के किसी भी डीएमसी ने कोरबा में निविदा जारी नहीं की है।

गुपचुप तरीके से नियम विरुद्ध किया जा रहा यह कार्य कई सवालों को जन्म दे रहा है। जानकारी के मुताबिक प्राथमिक स्वास्थ्य औषधि किट विभिन्न स्कूलों में प्रदाय किया जाना है जबकि राष्ट्रीय स्वास्थ्य योजना (मिशन) के तहत स्वास्थ्य विभाग बच्चों की सेहत से जुड़े कई कार्यक्रम चला रहा है जिसमें चिकित्सक स्वयं स्कूल पहुंच कर बच्चों की जांच सहित उनको नि:शुल्क उपचार देते हैं।

ऐसे में प्राथमिक स्वास्थ्य औषधि किट की खरीद डीएमएफ के पैसों के दुरुपयोग के अलावा कुछ नहीं है। दिलचस्प बात यह भी है कि शिक्षा विभाग के अधीन होने के बाद भी डीईओ को ही इस निविदा के बारे में जानकारी नहीं है। इससे पहले भी कोरबा में समग्र शिक्षा के तहत पदस्थ डीएमसी, डीईओ के माध्यम से ही फ़ाइलें बनाते थे लेकिन अम्बस्ट एक समानांतर लाइन बनाने की कोशिश कर रहे हैं, ऐसा लगता है।

इस मामले में जिला शिक्षाधिकारी सतीश पाण्डेय का कहना है कि निविदा के संबंध में उनको कोई जानकारी नहीं है। वहीं डीएमसी को शिक्षा विभाग के अधीन सौंपे गए प्रोजेक्ट की निविदा जारी करने का अधिकार नहीं है। अगर ऐसा किया गया है तो इसकी जानकारी ली जावेगी। डीएमसी अम्बस्ट का पक्ष जानने उनके मोबाइल नंबर पर संपर्क करने का प्रयास किया गया जो कवरेज से बाहर मिला। सूत्र बताते हैं कि इस निविदा के जरिए बड़े व्यापारी को उपकृत करने बनाई योजना बनाई गई है।

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