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धर्म और जात से ऊपर उठकर पिछले 35 सालों से गरीबों को भोजन करा रहा है एक सन्यासी

धर्म और जात से ऊपर उठकर पिछले 35 सालों से गरीबों को भोजन करा रहा है एक सन्यासी
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  • गुप्त दानवीरों के सहारे चल रहा है यह मिशन

गाजियाबाद । एएनएन (Action News Network)

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली से सटे गाजियाबाद के सेवा नगर में 75 वर्षीय एक बुर्जुग सन्यासी पिछले 35 सालों से धर्म और जात पात से ऊपर उठकर , गरीब और बेसहारा लोगों को निशुल्क भोजन करा रहा है। हालांकि लाॅकडाउन में कुछ सामाजिक संगठन यह काम जरूर कर रहे हैं ,लेकिन इस सन्यासी के लिए पूरे साल परिस्थितियां समान हैं।

उनके आश्रम में भोजन वितरण का कार्य कभी खत्म नहीं हुआ है, वह निर्वाद्ध रूप से इस मिशन को 35 साल से चला रहे हैं। दिल्ली मेरठ रोड के समीप सेवानगर में बालनाथ आश्रम स्थित है इस आश्रम की स्थापना सन 1975 में इलाहाबाद से आए सन्यासी स्वामी बालनाथ ने की।

इस आश्रम में वृद्धों को विशेष रूप से अपनाया जाता है जिन्हें उनके परिजनों ने ठुकरा कर दर-दर भटकने के लिए सड़कों पर छोड़ दिया। स्वामी बाल नाथ लॉकडाउन में गरीबों को विशेष रूप से तैयार भोजन वितरण का कार्य कर रहे हैं।

यही नही जब से 22 मार्च से देश में लॉकडाउन लागू हुआ है तभी से अनवरत रूप से बालनाथआश्रम में पहले से भी ज्यादा बड़ी संख्या में गरीबों को प्रतिदिन भोजन कराया जा रहा है खास बात यह है कि प्रचार प्रसार और मीडिया की सुर्खियों से दूर इस सन्यासी ने कभी यह अपेक्षा नहीं की कि उनके इस कार्य को प्रचार प्रसार मिले।

इस पुण्य कार्य के लिए उन्हें सरकार या प्रशासन से किसी भी प्रकार का कोई आर्थिक सहयोग आज तक नहीं मिला है और ना ही वह लेना चाहते हैं। स्वामी बाल नाथ से इस संबंध में एक्शन इंडिया समाचार ने बातचीत की।

उन्होंने बताया कि अर्थला में बहुत वर्ष पहले एक दंपत्ति ने भूख से पीड़ित होकर अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली थी उसी से प्रेरित होकर स्वामी बालनाथ ने गरीब और बेसहारा लोगों को निशुल्क भोजन वितरित कराने और अपने यहां आश्रय देने का अभियान शुरू कराया जो आज तक अनवरत रूप से चल रहा है।

स्वामी जी ने बताया कि इस आश्रम में भोजन वितरणए वृद्धों को रहने और इनका निशुल्क इलाज कराने के अलावा और भी कई अन्य प्रोजेक्ट पर कार्य चल रहा है। स्वामी जी ने बताया कि भोजन सामग्री हमें दानवीरों से मिल रही है जो अपना नाम भी गुप्त रखना चाहते हैं दानी नहीं चाहते कि उनका नाम सार्वजनिक हो उन्होंने कहा कि वह दान ही क्या जो सार्वजनिक हो गुप्त दान ही महादान होता है।स्वामी बाल नाथ ने आम जनता से अपील की है कि शहर में कोई भी निराश्रित भूखा हो तो वह सीधे बालनाथ आश्रम में आकर शरण ले सकता है यहां किसी प्रकार का कोई शुल्क नहीं लिया जाता है।

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