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गांधीवादी हेम भराली ने जीएमसीएच को जीते-जी दान किया था शरीर

गांधीवादी हेम भराली ने जीएमसीएच को जीते-जी दान किया था शरीर
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गुवाहाटी । एएनएन (Action News Network)

प्रसिद्ध गांधीवादी, स्वतंत्रता सेनानी, पद्मश्री पुरस्कार प्राप्त हेम भराली का निधन 102 वर्ष की अवस्था में बुधवार को हो गया। उन्होंने मरने से पहले ही अपने शरीर को गुवाहाटी मेडिकल कालेज अस्पताल (जीएमसीएच) को दान में दे दिया था। उनके निधन के बाद पूरी रश्में निभाने के पश्चात उनके पार्थिव शरीर को चिकत्सकीय उपयोग के लिए जीएमसीएच को प्रदान कर दिया गया। उल्लेखनीय है कि बढ़ती उम्र के चलते उनकी तबीयत खराब रहने लगी थी। जिसकी वजह से उन्हें लगभग एक माह पूर्व गुवाहाटी के एक निजी नर्सिंग होम में इलाज के लिए भर्ती कराया गया था। प्रसिद्ध गांधीवादी नेत्री हेम भराली वर्ष 1942 के स्वराज आंदोलन में हिस्सा लिया था।

उन्होंने पद्मश्री समेत विभिन्न पुरस्कारों से सम्मानित किया गया था। 1942 के आंदोलन में कई बार जेल में भी बंद हो चुकी थी। विनोवा भावे के भूदान आंदोलन में भी उन्होंने सक्रियता के साथ हिस्सा लिया था। हेम भराली प्रारंभिक शिक्षा ग्रहण करने के पश्चात गुवाहाटी के पूर्व शरणिया स्थित कस्तूरबा आश्रम के स्थापना में हिस्सा लिया। साथ ही गांधी जी के बुनियादी शिक्षा के प्रसाचर और प्रसार में मुख्य भूमिका निभाई। कस्तूरबा आश्रम में रहते हुए लंबे समय तक समाज के सुधार के लिए काम करती रहीं। उन्होंने समाज के विभिन्न श्रेणियों की महिलाओं को एक जुटकर आत्मसहायक गुट स्थापित करने में अपनी भूमिका निभाई थी। जिसके चलते महिलाओं के सामने आत्मनिर्भर बनने के नए रास्ते खुल गए थे।

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