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गंगोत्री हाइवे पर भारी भूस्खलन, तीन दिन से रास्ता बंद

गंगोत्री हाइवे पर भारी भूस्खलन, तीन दिन से रास्ता बंद
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सीमा सड़क संगठन वैकल्पिक मार्ग बनाने में जुटा, लग सकता है चार दिन का समय, रसद सामग्री से लदे ट्रक बीच में फंसे

उत्तरकाशी । एएनएन (Action News Network)

सामरिक और पौराणिक दृष्टि महत्वपूर्ण और बेहद संवेदनशील गंगोत्री हाइवे में भूस्खलन की वजह से आवाजाही रुक गई है। धरासू के पास भारी भूस्खलन होने से शुक्रवार से हाइवे बंद है। मार्ग में दोनों ओर बड़ी संख्या में ट्रक और अन्य वाहन फंसे हुए हैं। ज्यादातर वाहनों में रसद सामग्री है। उत्तरकाशी जिले की सीमा चीन से लगती है। उत्तरकाशी के जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने 'हिन्दुस्थान समाचार' से कहा कि सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) की मदद से नया वैकल्पिक मार्ग तैयार किया जा रहा है।

इसे तैयार करने में कम से कम दो और अधिकतम चार दिन का वक्त लग सकता है । इस हाइवे पर ऑल वेदर सड़क का निर्माण हो रहा है। कोरोना वायरस की वजह से लॉक डाउन है। रास्ते में आवश्यक रसद सामग्री के अलावा फल और सब्जियों से भरे ट्रक फंस गए हैं। उन्होंने कहा कि भूस्खलन लगातार हो रहा है। इस वजह से सीमा सड़क संगठन की मशीनें ठीक से काम नहीं कर पा रही हैं। उधर, आसपास के लोगों का कहना है कि भूस्खलन की वजह से हाइवे पर मलबा आ गया है। आसपास डंपिंग जोन न होने से मलबा जहां-तहां पड़ा है। इस काम में वन विभाग के कानून भी आड़े आ रहे हैं।

लोगों का कहना है कि सामने भागीरथी नदी पूरे वेग से बह रही है। इस वजह से भी डंपिंग जोन के निर्माण में दिक्कत आ रही है। भूस्खलन से चिन्यालीसौड़ की पेयजल लाइन क्षतिग्रस्त हो गई है। इससे नगर पालिका क्षेत्र में पेयजल का संकट बढ़ गया है। जिलाधिकारी डॉ. चौहान ने बताया है कि रास्ते में फंसे कुछ ट्रकों को रविवार को वनचौवरा से ब्रह्मखाल होते हुए रवाना किया गया। इन वाहनों को करीब 90 किलोमीटर की अतिरिक्त दूरी तय करनी होगी। आसपास के ग्रामीणों का कहना है कि हाइवे बंद होने से गर्भवती महिलाओं और बीमार लोगों को देहरादून पहुंचाना सबसे बड़ी चुनौती है। उधर, रास्ते में फंसे ट्रक चालक और उनके सहयोगी सुबह आसपास के बाजार खुलने पर बमुश्किल खिचड़ी बनाने की सामग्री जुटा पाए।

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