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कुशीनगर में हुआ था गौतम बुद्ध की अस्थियों का बंटवारा, बौद्धों ने की विशेष पूजा

कुशीनगर में हुआ था गौतम बुद्ध की अस्थियों का बंटवारा, बौद्धों ने की विशेष पूजा
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  • द्रोण ब्राह्मण ने मध्यस्थता कर टाली युद्ध की स्थिति

कुशीनगर । एएनएन (Action News Network)

आज ही के दिन यानी ज्येष्ठ माह की शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को कुशीनगर में गौतम बुद्ध के देहावसान के बाद उनकी अस्थियों का बंटवारा हुआ था। अस्थियों को लेकर शिष्यों में युद्ध की नौबत आ गई थी। किंतु द्रोण ब्राह्मण ने हस्तक्षेप कर न केवल युद्ध को टाला बल्कि समान रूप से अस्थियों का वितरण भी किया। द्रोण ने राजगिरि के अजातशत्रु, वैशाली के लिच्छवी, कपिलवस्तु के शाक्य, अलकप्प के बुली, रामग्राम के कोलिय, वेठदीप के ब्राह्मण, पावा और कुसीनारा के मल्लों को अवशेष बांटा था। सभी लोग अपने-अपने हिस्से का अस्थि अवशेष लेकर अपने राज्य लौटे और धातु अवशेष पर स्तूप बनाकर बुद्ध की पूजा शरू की।

इस ऐतिहासिक दिवस का स्मरण करते हुए बुधवार को बौद्ध अनुयाइयों ने लाकडाऊन के दायरे में रहकर विशेष पूजा कर मानवता के कल्याण की कामना की। अंतरराष्ट्रीय बौद्ध शोध संस्थान के पूर्व अध्यक्ष डॉ. भिक्षु नंद रतन व भिक्षु महेंद्र ने आज के तिथि की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहाकि लगभग ढाई हजार वर्ष पूर्व बुद्ध का वैशाख पूर्णिमा को कुशीनगर में निर्वाण प्राप्त हुआ था। मल्ल राजाओं व उनके गणों ने एक सप्ताह तक उनके शरीर की पूजा की। उसके बाद हिरण्यवती नदी के किनारे रामाभार में उनका अंतिम संस्कार हुआ। सप्ताह भर चिता जलती रही। चिता के शांत होने पर धातु अवशेष को मल्लों के संस्थागार में एक सप्ताह रखकर पूजा किया गया।

इस दौरान उत्तर भारत के तत्कालीन गणराज्यों के राजा या उनके प्रतिनिधि सेना के साथ कुशीनगर पहुंच गए। उनका कहना था कि धातु अवशेष हमें चाहिए। इस पर केवल हमारा अधिकार है। इसको लेकर युद्ध की स्थिति उतपन्न हो गई। द्रोण ब्राह्मण ने धातु अवशेष को आठ बराबर भागों में बांटकर तनाव को समाप्त किया था। दिवस की याद में विशेष पूजा श्रीलंका बुद्ध विहार कुशीनगर में हुई। साथ ही कोरोना महामारी की समाप्ति के लिए रतन सुत्त का पाठ भी हुआ। पूजा में भंते आलोक, भंते मुलायम, भंते सुमित, भंते खेमाचारा, भंते नन्दी,भंते यशपाल, भंते तेजेंद्र, भंते गांधी, सुबोध कुमार, बृजेश कुशवाहा, आदित्य, गौतम आदि ने सक्रिय भूमिका का निर्वाह किया।

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