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जोशीमठ में मकान बनाने के लिये विकास प्राधिकरण की बाध्यता समाप्त करने की मांग

जोशीमठ में मकान बनाने के लिये विकास प्राधिकरण की बाध्यता समाप्त करने की मांग
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  • जोशीमठ बचाओ संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने एसडीएम कार्यालय पर दिया धरना

गोपेश्वर । Action India News

सीमांत क्षेत्र जोशीमठ में भवन निर्माण के लिए विकास प्राधिकरण की बाध्यता समाप्त किये जाने की मांग को लेकर गुरुवार को जोशीमठ बचाओ संघर्ष समिति के बैनर तले क्षेत्रीय जनता ने उपजिलाधिकारी के कार्यालय पर धरना देकर एक ज्ञापन मुख्यमंत्री को भेजा।

जोशीमठ बचाओ संघर्ष समिति के संयोजक अतुल सती ने बताया कि कोरोेना काल में वैसे ही लोगों का सारा व्यवसाय ठप पड़ा है। ऐसे में यदि कोई बेरोजगार होम स्टे योजना के तहत अपना व्यवसाय चलाना चाहता है तो उसे विकास प्राधिकरण के पेंच में फंसा कर तमाम कागज बनाने में छह माह से अधिक का समय लग रहा है।

ऐसे में बेरोजगार रोजगार चलाने के बारे में सोच भी नहीं सकता है। उन्होंने कहा कि अपना स्वयं का भवन बनाने के लिए भी हजारों रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं, जो इस कोरोना काल में संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि व्यावसायिक अथवा निजी भवन बनाने के लिए जो नियम प्राधिकरण की ओर से बनाये गये हैं, उसमें पहाड़ों पर भवन बनाना संभव नहीं है। उनका कहना था कि चमोली जिले में हर साल आपदा आती रहती है।

ऐसे में यदि किसी का भवन क्षतिग्रस्त हो जाता है तो उसे भवन निर्माण के लिए इतनी प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ रहा है कि उतना भवन बनाने में खर्चा नहीं आ रहा है जितना उसका कागजात तैयार करने में व नक्शा पास करवाने में लग रहा है। उन्होंने सरकार से मांग की है कि पहाड़ी जनपदों में प्राधिकरण की नियमों के अनुसार भवन बनायाा जाना संभव नहीं है। लिहाजा सरकार को इसको समाप्त करना चाहिए।

इसी संबंध में धरने के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेज कर प्राधिकरण की बाध्यता समाप्त करने की मांग की गई है। धरना देने वालों में अतुल सती, कमल रतूड़ी, जयप्रकाश भट्ट, शैलेंद्र पंवार, मीना डिमरी, देवेश्वरी शाह, हरीश भंडारी, दिनेश पोखरियाल आदि शामिल रहे।

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