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शासकीय कर्मचारी बस्तर में कोरोना के संवाहक बने तो सरकार जिम्मेदार होगी : केदार कश्यप

शासकीय कर्मचारी बस्तर में कोरोना के संवाहक बने तो सरकार जिम्मेदार होगी : केदार कश्यप
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  • लॉकडाऊन के नियमों की उड़ायी जा रही धज्जियां, नियम सबके लिए बराबर

जगदलपुर । एएनएन (Action News Network)

प्रदेश के पूर्व मंंत्री एवं भाजपा नेता केदार कश्यप ने कहा कि विभागीय कामकाज निपटाने के नाम पर यहां से रायपुर, दुर्ग और भिलाई जा रहे अधिकारी-कमर्चारी वापस लौटने के बाद परीक्षण करवाए बगैर दफ्तरों में काम करने पहुंच रहे हैं। लॉक डाऊन के नियमों की खुले तौर पर धज्जियां उड़ायी जा रही हैं और प्रशासन केवल आम लोगों को ही नियमों का पाठ पढ़ाने तक सीमित हैं। ऐसे में कोरोना के बढ़ते संक्रमण के बीच यदि बस्तर में भी पॉजीटिव प्रकरण सामने आ जाएं तो आश्चर्य नहीं। सर्वाधिक चिंता की बात यह है कि विभागीय काम निपटाने के नाम पर अधिकतर अधिकारी-कमर्चारी और बैंक के लोग रायपुर, दुर्ग और भिलाई आना-जाना कर रहे है, जहां पहले से कोरोना संक्रमितों की संख्या सैकड़ों में है।

केदार कश्यप ने कहा कि बस्तर के अधिकारी-कर्मचारी एवं बैंक के कर्मचारी विभागीय कामकाज निपटाने के बहाने रायपुर, दुर्ग, बिलासपुर और भिलाई जाकर अपने कार्य के साथ अपने रिश्तेदारों एवं परिजनों से मिलकर वापस बस्तर आ रहे हैं। वापस आने के बाद उनकी जांच भी नहीं की जा रही है। कोरोना वायरस का संक्रमण किसी शासकीय अधिकारी-कर्मचारी या व्यक्ति को पहचान कर नहीं होता है। यदि बस्तर में कोरोना के संवाहक बनने का काम अधिकारी-कर्मचारी या बैंक के कर्मचारी करते हैं, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी कांग्रेस सरकार की होगी। उन्होंने कहा कि बस्तर में कोरोना संक्रमण पॉजिटिव का एक भी मामला नहीं होने का कारण प्रकृति के साथ सामंजस्य बनाकर रहने की जीवन शैली के कारण ऐसा परिणाम हमें देखने को मिल रहा है।

कश्यप ने कहा कि सर्वाधिक चिंताजनक बात यह है कि वापस लौटने के बाद इनका किसी तरह का स्वास्थ्य परीक्षण नहीं करवाया जा रहा है। आश्चर्य तो इस बात का है कि इनके द्वारा वापस लौटने की विधिवत सूचना भी नहीं दी जा रही है। इधर प्रशासनिक अधिकारी थोक में सरकारी नुमाइंदों को एक से दूसरे जिले में जाने की अनुमति दे रहे हैं, जिनके वापस लौटने के बाद इनका भी किसी तरह का स्वास्थ्य परीक्षण नहीं करवाया जा रहाहै। उन्होंने कहा कि सामान्य लोगों में से यदि किसी को अनुमति दी भी रही है, तो वापस लौटने के बाद प्रशासन नियमों का पाठ पढ़ाकर 14 दिन के लिए होम आइसोलेशन की शर्त थोपी जा रही है। नियम सबके लिए बराबर होना चाहिए, कोरोना किसी से विभेद नहीं करता है।

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