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राज्यपाल ने कहा, प्राइवेट एजेंसी चला रही है बंगाल सरकार

राज्यपाल ने कहा, प्राइवेट एजेंसी चला रही है बंगाल सरकार
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  • मंत्रियों और सांसदों का ट्विटर भी हैंडल करती है सरकार

  • शवों से बर्बरता मामले में मुख्यमंत्री को मांगनी होगी माफी

  • इस बार हर हाल में सुनिश्चित करेंगे शांतिपूर्वक मतदान

कोलकाता । एएनएन (Action News Network)

पश्चिम बंगाल के राज्यपाल जगदीप धनखड़ ने दावा किया है कि पश्चिम बंगाल सरकार को प्राइवेट एजेंसी चला रहे हैं। इसके साथ ही सत्तारूढ़ पार्टी तृणमूल कांग्रेस के सांसदों व मंत्रियों का ट्विटर अकाउंट भी कोई और चलाता है और उनकी मर्जी के बगैर वहां से राजनीतिक ट्वीट किए जाते हैं, जिसमें राज्यपाल पर हमले भी शामिल हैं।

मंगलवार को एक्शन इंडिया समाचार को दिए विशेष साक्षात्कार में राज्यपाल धनखड़ ने कई बड़े खुलासे किए हैं। पिछले दिनों राजधानी कोलकाता में मानव शवों को जानवरों की तरह घसीटने के मामले में उन्होंने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को माफी मांगने की नसीहत दी है।

आसन्न विधानसभा और नगर पालिका चुनाव को शांतिपूर्वक संपन्न कराने के लिए अपनी पूरी संवैधानिक ताकत झोंकने की बात भी उन्होंने कही है। पेश है राज्यपाल जगदीप धनखड़ से विशेष संवाददाता ओमप्रकाश सिंह की विस्तृत बातचीत के प्रमुख अंश-
आपने राज्यपाल पद की परिभाषा बदल दी है। सीधे जनता के बीच जाते हैं, संवाद करते हैं। ट्विटर और अन्य सोशल जरिए का भी इस्तेमाल आम जनता से जुड़ने के लिए बखूबी कर रहे हैं। क्या आपको नहीं लगता कि इससे राज्य की सत्तारूढ़ पार्टी खुद को असुरक्षित महसूस कर रही होगी?

मैंने पश्चिम बंगाल के लोगों के हित में काम करने की संवैधानिक शपथ ली है और इसके प्रति मैं प्रतिबद्ध हूं। मैं यह बात स्पष्ट करना चाहूंगा कि मैं किसी की कठपुतली नहीं हूं। ना तो मैं ममता बनर्जी का हुक्म मानूंगा और ना ही दिल्ली के किसी का। मैं अगर किसी का हुक्म मानूंगा तो वह भारत का संविधान है।

संविधान के मुताबिक काम करता रहूंगा। मैं राज्य की जनता का सिपाही हूं। मेरे दिमाग में एक ही बात है कि जनता की सेवा कैसे करूं। जैसे करप्शन जैसे मामले होते हैं। कटमनी जैसे मामले सामने आते हैं अथवा राज्य प्रशासन सत्तारूढ़ पार्टी के लिए काम करने लगती है तो राज्यपाल के तौर पर मैं कैसे चुप रह सकता हूं? राज्य प्रशासन के अधिकारियों को अपना आचरण कानून के दायरे में रखना चाहिए।

बहुत से लोग मुझसे कहते हैं कि सरकार पुलिस के दम पर चल रही है। पूरा प्रशासन सत्तारूढ़ पार्टी के कार्यकर्ता की तरह काम कर रहा है। इसे मैं बर्दाश्त नहीं कर सकता। राज्यपाल के तौर पर भारतीय संविधान ने मुझे जो कुछ भी अधिकार दिए हैं, मैं कभी भी इसके बाहर नहीं गया। मैं सुनूंगा सबकी, लेकिन फैसला अपने हिसाब से विवेकपूर्ण तरीके से लूंगा जिससे राज्य के लोगों का हित हो।
पिछले सप्ताह कोलकाता का एक वीडियो वायरल हुआ था जिसमें शवों को बर्बर तरीके से घसीटा गया था। यह वीडियो ना केवल भारत बल्कि पूरी दुनिया में प्रसारित हुई थी और इससे भारत की छवि धूमिल हुई थी। इस मामले में आपने राज्य गृह विभाग से रिपोर्ट तलब की थी और कोलकाता नगर निगम से भी रिपोर्ट मांगी थी। क्या आप राज्य सरकार के जवाब से संतुष्ट हैं?

पहले तो मैं यह बता दूं कि पश्चिम बंगाल के अधिकारी बहुत योग्य हैं। पूरे देश में सबसे बेहतर कह सकते हैं। लेकिन यहां राजनीति अंकुश लग जाता है और ऐसा अंकुश राजनीति के बाहर की संस्था लगा देती है। यह डेमोक्रेसी पर कुठाराघात की पराकाष्ठा हो जाती है। जब 10 जून को मेरे को यह जानकारी मिली तो मुझे विश्वास नहीं हुआ।

हम लोग मृत शरीर को जबरदस्त सम्मान देते हैं। जैसी बर्बरता की गई वह कल्पना से परे है। वीडियो में तो सिर्फ एक बार शव को घसीटते हुए देखा गया है, लेकिन उन शवों को कई बार घसीटा गया है। जब गाड़ी में डाला गया होगा तब भी घसीटा गया होगा, जब श्मशान घाट में उतारा गया तब भी घसीटा गया।

फिर श्मशान घाट से वापस ले जाते हुए घसीटा गया। जैसे ही 10 जून को मुझे यह पता चला। मैंने अपने सचिव के माध्यम से राज्य के गृह सचिव से जवाब मांगा और मुझे जवाब तुरंत मिला। उनका जवाब खुद को बचाने जैसा था। उन्होंने दो बातें कहीं। यह शव कोविड-19 पॉजिटिव लोगों के नहीं हैं। और वीडियो फेक है।

इसके बाद मैंने कहा कि मरने वाले चाहे किसी भी बीमारी से पीड़ित हो, लेकिन लाशों से ऐसी बर्बरता क्यों ? इस पर मुझे जवाब दिया जाए। लेकिन अभी तक राज्य सरकार ने कोई जवाब नहीं दिया है। इस बारे में कोलकाता म्युनिसिपल कारपोरेशन के कमिश्नर विनोद कुमार ने स्पष्टीकरण दिया है।

उनकी बातों से स्पष्ट था कि नगर निगम से बड़ी भारी चूक हुई है। नगर निगम के प्रशासक फिरहाद हकीम को मैंने बुलाया लेकिन आते नहीं हैं, मुगालते में हैं। उन्हें अपनी जिम्मेदारी का एहसास नहीं है। चक्रवात के बाद से लोग आज तक कोलकाता में परेशान है। उन्हें आना ही पड़ेगा। इस मामले में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को माफी मांगनी ही होगी। बिना माफी मांगे इसका कोई समाधान नहीं है।

मैंने कहा है कि आप भी माफी मांगिए और मैं भी राज्य के लोगों से माफी मांगता हूं। तभी इस कलंक को कुछ कम किया जा सकेगा। भारत के मुख्य न्यायाधीश ने इस मामले का स्वत: संज्ञान लिया और शवों के साथ बर्बरता पर जवाब तलब किया है। जिन राज्यों से जवाब मांगा गया है, उसमें बंगाल भी शामिल है।

उन्होंने कहा है कि कोविड-19 से मरने वालों का अंतिम संस्कार भारत सरकार द्वारा दी गई गाइडलाइन के अनुसार होना चाहिए। बंगाल तीन संकट से गुजर रहा है। चक्रवात, कोरोनावायरस व माइग्रेंट वर्कर्स। मुख्यमंत्री ने प्रवासी मजदूरों की ट्रेन को कोविड ट्रेन कह दिया था। उस पर मैंने आपत्ति जताई थी।

बंगाल में विपक्षी पार्टियों के नेताओं पर मुकदमे दर्ज होते हैं। उन्हें संकट के समय भी काम नहीं करने दिया जाता है जबकि सरकार अपनी पार्टी के नेताओं को खुली छूट दे कर रखे हैं। डर के मारे पुलिस कुछ नहीं कर सकती। मैंने पुलिस को चेतावनी दी है कि कानून से ऊपर कोई नहीं है और ऐसा करना मेरे दायित्व का हिस्सा है।

तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा ने अपनी ही पार्टी द्वारा प्रशासित नगरपालिका की कार्यशैली पर सवाल खड़ा किया है। राज्यपाल होने के नाते हर 5 वर्ष में नगरपालिका और पंचायत के कार्यों की समीक्षा करने का अधिकार आपको है। तो क्या आप कुछ माह बाद होने वाले नगर पालिका चुनाव को देखते हुए नगर पालिकाओं के कार्यों की समीक्षा के लिए वित्त आयोग का गठन करेंगे?

मैं यह कतई नहीं चाहता कि प्रजातांत्रिक व्यवस्था में सरकार अथवा राज्यपाल के बीच टकराव हो। क्योंकि यह जनता के हित में नहीं है। मैं किसान का बेटा हूं। किसान सम्मान निधि योजना के तहत बंगाल के किसानों को अब तक मदद नहीं मिली है क्योंकि बंगाल सरकार ने केंद्र को किसानों की जानकारी ही नहीं दी।

यह किसानों के पेट पर लात मारने जैसा है। नगर पालिका जैसे भ्रष्टाचार हर जगह होते हैं और क्या राज्यपाल को इसे बर्दाश्त करना चाहिए? हर मुद्दे पर राजनीति ठीक नहीं, राजनीतिक चश्मे को उतारकर जनहित में काम करना होगा।

संवैधानिक प्रावधानों के मुताबिक आप राज्य सरकार के मार्गदर्शक हैं लेकिन कई बार सत्तारूढ़ पार्टी आप पर समानांतर सरकार चलाने का आरोप लगा चुकी हैं। बंगाल सरकार का 83 हजार करोड़ रुपया केंद्र के पास बकाया है। इस राशि को वापस बंगाल को दिलाने के लिए आपने कोई पहल की या मुख्यमंत्री ने आपसे अनुरोध किया?

आपका प्रश्न बहुत अच्छा है, मैं पहले ही कह चुका हूं कि मैं ना तो ममता बनर्जी के मन मुताबिक चलूंगा और नहीं किसी और के। संविधान के मुताबिक जो भी जायज है, वह मैं करूंगा और अभी तक संवैधानिक दायरे में ही काम करता रहा हूं। मेरा कोई भी कदम संविधान के बाहर का नहीं और भविष्य में भी नहीं करूंगा।

जहां तक बात केंद्र सरकार के पास बंगाल की बकाया राशि की है तो मैंने बार-बार मुख्यमंत्री से अनुरोध किया कि इस बारे में मुझे पत्र दीजिए। मुझसे चर्चा करिए, लेकिन आज तक उन्होंने एक पत्र तक नहीं लिखा। बार-बार कहने के बावजूद मुख्यमंत्री बात नहीं करती। चक्रवात के बाद आज भी बंगाल के ग्रामीण क्षेत्रों में हालात बदतर हैं। लोग मुश्किल में हैं। पश्चिम बंगाल सरकार को बाहरी एजेंसी चला रही है।

( उल्लेखनीय है कि राजनीतिक रणनीतिकार प्रशांत किशोर की संस्था मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की सलाहकार है।) राजपाल ने कहा कि बंगाल सरकार को एक्स्ट्रा कांस्टीट्यूशनल अथॉरिटी के हवाले कर दिया गया है। यह ओपन सीक्रेट है। कह दिया गया है कि मंत्री और अधिकारी किसी और को रिपोर्ट करेंगे। बड़े मंत्रियों, सांसदों के टि्वटर हैंडल कोई और चलाता है। इससे बड़ा ह्यूमन राइट वायलेशन नहीं हो सकता। उन सांसदों ने मुझे व्यक्तिगत तौर पर फोन करके माफी मांगी है।

उनका नाम मैं भगवान को ही बताऊंगा। सांसदों ने कहा है कि यह कंटेंट हमारा नहीं है। मुझे गालियां दी जाती हैं। इससे मुझे कोई एतराज नहीं है लेकिन जब सरकारी तंत्र पर कब्जे की कोशिश होती है तब यह खतरे की घंटी है। अगर कोई सोचता है कि मैं डर जाऊंगा तो मुझे फर्क नहीं पड़ता। मैं अपनी मर्यादा को नहीं लांघूगा।

अमूमन, राज्यपाल और सरकार के बीच वार्ता गोपनीय होती है, लेकिन आप हर उस जरिए का इस्तेमाल संवाद के लिए कर रहे हैं जो सार्वजनिक है। जैसे ट्विटर पर आप बहुत ज्यादा सक्रिय रहते हैं और सरकार की आलोचना लगातार करते हैं। इसीलिए शायद आप की भी आलोचना ज्यादा हो रही है। आने वाले वर्षों में जब तक आप बंगाल के राज्यपाल हैं, आप इसी तरह से सरकार पर खुलेआम हमला जारी रखेंगे?

मैं एक बात आपको स्पष्ट तौर पर बताना चाहता हूं कि मेरी आलोचना भाड़े के लोगों से हो रही है। मेरी आलोचना वो लोग कर रहे हैं जिनका टि्वटर हैंडल किसी और के पास है। ऐसे कई लोग मेरे पास आते हैं और अपनी मजबूरी जाहिर करते हैं। अनुरोध करते हैं कि उनका असली नाम नहीं बताएं। आप जगदीप धनखड़ के ट्विटर पर एक पक्ष में कमेंट लिख देंगे तो पुलिस आपके घर पहुंच जाएगी। हम लोग बहुत मुश्किल हालात में रह रहे हैं।

बंगाल में राजनीतिक हिंसा और कदाचार का इतिहास रहा है। आप राज्यपाल होने के नाते ऐसा क्या करना चाहेंगे कि इस पर स्थाई रोक लगे?

चुनाव के समय सौ फीसदी केंद्रीय बलों की तैनाती चुनाव आयोग का अधिकार है। मेरी गुजारिश है कि पारदर्शी और निष्पक्ष चुनाव हो। मेरी कोशिश है कि बंगाल में चुनाव के समय अब तक जो हिंसा होती रही वह इतिहास का हिस्सा बने। आगे जो होगा वह पश्चिम बंगाल के लिए नया इतिहास होगा।

बंगाल की जनता हिंसा नहीं चाहती। चुनाव कोई जीते, ममता बनर्जी या कोई और इससे मुझे कोई सरोकार नहीं है। मैं हिंसा के पक्ष में बिल्कुल नहीं हूं और नहीं बर्दाश्त करूंगा कि मतदाता को इतना डराया जाए कि वह अपने विवेक से मत ना दे सके।

मैंने कह दिया है कि चुनाव पारदर्शी, बिना डर के, असुरक्षित हो। मैं बिल्कुल आशावादी हूं कि इस बार बंगाल में शांतिपूर्वक तरीके से चुनाव होगा। बंगाल का स्थान देश के सिरमौर के तौर पर पहले भी था और आगे भी रहेगा। इसकी मुझे उम्मीद है।

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