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राज्यपाल ने ममता सरकार से मांगा सीएए के खिलाफ अभियानों पर हुए खर्च का ब्यौरा

कोलकाता। एएनएन (Action News Network)

राज्यपाल जगदीप धनखड़ ने राज्य सरकार से नए नागरिकता कानून (सीएए) के खिलाफ विज्ञापन अभियानों पर हुए सार्वजनिक धन के कथित दुरुपयोग पर रिपोर्ट तलब की है। उन अधिकारियों के बारे में भी जानकारी मांगी है जिन्होंने सीएए के खिलाफ विज्ञापन के लिए धनराशि के आवंटन को मंजूरी दी है। शनिवार को राजभवन सूत्रों ने इसकी पुष्टि की।

बताया गया है कि राजभवन से राज्य सरकार के सूचना और सांस्कृतिक मामलों के प्रधान सचिव को चिट्ठी दी गई है। सूत्रों के अनुसार राज्यपाल ने प्रिंट और विजुअल मीडिया में "नो सीएए, नो एनआरसी, नो एनपीआर" वाली टैगलाइन वाले विज्ञापनों पर हुए भारी खर्च का ब्यौरा मांगा है।
राज्यपाल ने सीएए विरोधी अभियान में राज्य के वरिष्ठ प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों की भागीदारी के को लेकर भी चिंता व्यक्त की है।

इन विज्ञापनों में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के साथ कई प्रशासनिक अधिकारियों की भी तस्वीरें लगाई गई थीं। राज्यपाल ने राज्य सरकार को बार-बार आगाह किया था कि एक वैध कानून के खिलाफ प्रचार राज्य के खर्च पर विज्ञापनों के जरिए नहीं किया जा सकता। बाद में कलकत्ता उच्च न्यायालय ने बंगाल सरकार से ऐसे सभी विज्ञापनों को हटाने को कहा था।

सूत्रों के अनुसार ऐसे उदाहरण हैं जब राज्यपालों ने सार्वजनिक धन के दुरुपयोग के लिए मुख्यमंत्रियों पर मुकदमा चलाने की मंजूरी दी है। एआर अंतुले मामले के अलावा, हाल के दिनों में कर्नाटक के राज्यपाल एचआर भारद्वाज ने 2011 में राज्य में लौह अयस्क के अवैध खनन में शामिल होने पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 के तहत कर्नाटक लोकायुक्त द्वारा मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा के खिलाफ मुकदमा चलाने की मंजूरी दी थी। बिहार के राज्यपाल ने चारा घोटाला मामले में लालू प्रसाद यादव के खिलाफ मुकदमा चलाने की मंजूरी दी थी। खबर है कि अगर राज्य सरकार राज्यपाल द्वारा मांगी गई जानकारी देने में आनाकानी करती है तो राज्यपाल सख्त कदम उठा सकते हैं।

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