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दर्जनों गांवों में ग्रामीणों की खारा पानी पीने की मजबूरी

दर्जनों गांवों में ग्रामीणों की खारा पानी पीने की मजबूरी
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  • पेयजल योजनाओं में करोड़ों की धनराशि खर्च होने के बावजूद ग्रामीणों को मीठे पानी की दरकार

  • अति दुर्गम इलाकों में फ्लोराइड की मात्रा बढऩे से ग्रामीणों को मिल रही बीमारी की भी सौगात

हमीरपुर । एएनएन (Action News Network)

हमीरपुर जिले में दर्जनों गांवों के बाशिन्दे आज भी खारा पानी से प्यास बुझाने को मजबूर है। खारा पानी से प्रभावित सर्वाधिक इलाकों में धरातल पर दौड़ाई गयी करोड़ों की पेयजल योजनायें भी ग्रामीणों को मीठा पानी देने में बोल गयी है। उल्लेखनीय है कि जनपद के मौदहा क्षेत्र के कपसा, बक्छा, गुसियारी, छानी, इचौली, नायकपुरवा, करहिया, खण्डेह, टिकरी, रतौली, भैसमरी सहित अन्य कई गांव खारा पानी से प्रभावित है वहीं कुरारा क्षेत्र के जल्ला, ककरू, शिवनी, जखेला, डामर, मनकी खुर्द, मनकी कला, व उजनेड़ी सहित कई गांवों के हजारों लोग मीठे पानी को तरस रहे है। बैजेमऊ इस्लामपुर व राठ क्षेत्र के तमाम ग्राम भी खारा पानी से प्रभावित है।

मौदहा क्षेत्र के खण्डेह गांव में 3 करोड़ की खण्डेह पेयजल जलनिगम ने कई साल पहले तैयार की थी जिसमें पूरी धनराशि खर्च होने के बाद भी पूरे गांव को खारा पीने से निजात नहीं मिल सका। हालांकि जलनिगम के अभियन्ता की माने तो जिले में ऐसे कोई चार दर्जन से अधिक खारा प्रभावित गांवों में योजनायें शुरू करायी गयी है मगर कई गांवों में अभी खारा पानी की समस्यायें है जिसे आने वाले समय में दूर कर ली जायेगी। सबसे ज्यादा खारा पानी की समस्या से प्रभावित गांव मौदहा क्षेत्र के गांनों में है। इन गांवों में फ्लोराइड (खारा) युक्त पानी पीने के कारण तमाम लोगों के दांत भी खराब हो गये है। पेट सम्बन्धी बीमारी के शिकार हो रहे है। छानी, बक्छा, खैर सहित अन्य खारा पानी प्रभावित गांवों में प्रति लिटर पानी में 0.5 मिलीग्राम से अधिक फ्लोराइड की मात्रा है वहीं नाइट्रेट व आयरन की मात्रा भी पानी में अधिक पायी गयी है।

करोड़ों की लागत की पेयजल योजनाओं से ग्रामों को मिलेगी खारा पानी से निजात

जिले में खारा पानी प्रभावित ग्रामों के लिये जलनिगम ने कई करोड़ की पेयजल योजनायें जमीन पर उतारी है। इनमें कुछ गांवों में तो पेयजल योजनायें ग्रामीणों के लिये वरदान साबित हो रही है जलनिगम के अवर अभियंता रामरतन ने सोमवार को बताया कि जिले के मौदहा क्षेत्र के नायकपुरवा और इचौली के लिये 545.00 लाख रुपये की पेयजल योजना जमीन पर उतारी गयी थी जिसमें नलकूप निर्माण, टंकी और पाइपलाइन के विस्तार सम्बन्धी कार्यों के अलावा नायकपुरवा में दो बोर कराने के साथ ही पाइपलाइनों की टेस्टिंग हो चुकी है। अभी तक 70 प्रतिशत कार्य हो सके है। पानी की टंकी का निर्माण भी अस्सी फीसद हो चुका है। भैंसमरी गांव में 208.00 लाख की पेयजल योजना में सत्तर फीसद कार्य कराये जा चुके है।

अभियंता ने बताया कि विद्युत विभाग ने अभी तक नलकूपों को चालू करने के लिये ट्रांसफार्मर नहीं लगाये है। इसके अलावा खारा प्रभावित कपसा गांव के लिये 305.86 लाख की पेयजल योजना भी रामभरोसे है। यहां खारा पानी से प्रभावित गांव में अभी तक दस प्रतिशत भी ही कार्य हो सके है। दो नलकूपों की बोरिंग करायी जा चुकी है। अभियंता ने बताया कि कपसा गांव में पानी न के बराबर है। ये इलाका डाई श्रेणी में है फिर भी किसी तरह से दो नलकूप बोर कराये गये है। गुसियारी गांव में भी 486.36 लाख की लागत से पेयजल योजना के निर्माण कार्य जारी है।

अभी तक 15 प्रतिशत ही कार्य हो सके है। वहीं खारा पानी प्रभावित भमई गांव में 280.18 लाख रुपये की लागत से पेयजल योजना के निर्माण कार्य कराये गये है। इस पेयजल योजना से फिलहाल गांव के लोगों को शुद्ध पानी मिल रहा है। मौदहा क्षेत्र के मदारपुर गांव में भी खारा पानी की समस्या को लेकर जलनिगम ने 122.53 लाख की पेयजल योजना का निर्माण कराया है। मौदहा क्षेत्र में खारा पानी से प्रभावित छानी, बक्छा और खैर गांव में फिलहाल अभी तक कोई पेयजल योजना तैयार नहीं की जा सकी है। ये गांव खारा पानी से प्रभावित है।

फ्लोराइड युक्त पानी से होती है पेट सम्बन्धी बीमारीरू ए.सीएमओ

हमीरपुर के ए.सीएमओ डा.एमके बल्लभ ने सोमवार को दोपहर बताया कि खारा पानी में फ्लोराइड की मात्रा बढऩे से दांतों में गंभीर समस्या पैदा होती है साथ ही निश्चित मात्रा से अधिक फ्लोराइड युक्त पानी पीने से शरीर की हड्डियां भी कमजोर हो जाती है। उन्होंने बताया कि खारा पानी पीने से लोगों को बचना चाहिये। वरिष्ठ फिजीशियन डा.पीके गुप्ता ने बताया कि प्रति लिटर पानी में 0.5 मिलीग्राम से अधिक फ्लोराइड होने से पेट सम्बन्धी बीमारी होती है। इसलिये खारा पानी प्रभावित इलाकों में लोगों को पानी गर्म करने के बाद छाने फिर उसे पीना चाहिये।

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