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लॉक डाउन में आर्थिक संकट से जूझ रहा जूती उद्योग

लॉक डाउन में आर्थिक संकट से जूझ रहा जूती उद्योग
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  • मध्यप्रदेश, राजस्थान, दिल्ली पंजाब सहित तमाम राज्यों में नागरा जूती की बोलती है तूती

  • एक जिला एक उत्पाद योजना में शामिल होने के बाद भी नहीं आये जूती उद्योग के अच्छे दिन

हमीरपुर । एएनएन (Action News Network)

हमीरपुर जिले में नागरा जूती उद्योग यहां आर्थिक मंदी से जूझ रहा है। लॉक डाउन में इन उद्योगों पर ताले पड़ गये हैं। इस उद्योग की जूतियों की तूती यूपी के अलावा मध्यप्रदेश, दिल्ली, राजस्थान, बिहार, पंजाब व अन्य राज्यों में बोलती रही है, लेकिन कोरोना वायरस महामारी के कारण अब ये उद्योग बोल गये हैं।

हमीरपुर शहर से 15 किमी दूर नेशनल हाइवे-34 पर भरुआ सुमेरपुर में जूती उद्योग की शुरुआत वर्ष 1952 से हुयी थी। किसी समय यह उद्योग कुटी के रूप में फैल चुके थे। दो दर्जन से अधिक लोग इस उद्योग को पुश्तैनी कारोबार की तरह चलाते रहे है। मगर उनमें इस समय मायूसी देखी जा रही है। संतोष का कहना है कि यदि जूती उद्योग के लिये अलग मार्केट खुलवाकर इससे जुड़े उद्यमियों को बैंक से आर्थिक मदद मिले तो अत्याधुनिक तरीके से जूती बनायी जा सकती है।
सर्वेश, चन्द्रपाल, वंशगोपाल, दशरथ, बनवारी, श्रवण, अरविन्द, बिन्दा, श्यामबाबू, जियालाल, दिनेश सहित अन्य व्यवसायियों ने बताया कि किराये की एक दुकान में यह उद्योग चलाया गया, जिसमें पांच कारीगर जूती बनाते रहे हैं।

जूती उद्योग के कारोबारी वंश गोपाल ने बताया कि इस साल शादी बारातों में जूतियों की जमकर खरीददारी होती है साथ ही इसकी सप्लाई भी महानगरों में कर अच्छा मुनाफा हासिल किया जाता लेकिन लॉक डाउन के कारण पूरा कारोबार ठप हो गया है। उन्होंने बताया कि लाखों का माल डंप है जिससे कारोबारियों की पूंजी फंस गयी है। लॉक डाउन में दी गयी छूट पर भी जूती उद्योग की दुकानें नहीं खुल पा रही है।

50 ग्राम वजन की जूती पहनकर चलने से निकलती है आवाजें

जूती उद्योग के प्रमुख कारोबारी वंश गोपाल ने बताया कि यहां की नागरा जूती बड़ी ही हल्की होती है जो पचास ग्राम वजन से भी कम होती है। इसे पहनकर चलने में जूती से चर्र-चर्र की आवाज निकलती है। ये जूती हरियाणा और राजस्थान में ज्यादा लोग पसंद करते है। यह जूती राजस्थान की कला से प्रभावित नजर आती है। इसका अगला हिस्सा अंग्रेजी के वी आकार का होता है जबकि जूती का पिछला हिस्सा पान के पत्ते जैसा होता है। जूतियां पूरी तरह से हाथ से ही बनायी जाती है।

बरसात के मौसम में जूती उद्योग का कारोबार पड़ जाता है मंदा

जूती उद्योग चलाने वालों ने साहूकारों के कर्ज से कारोबार शुरू किया था लेकिन लॉक डाउन में कारोबारियों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। वंश गोपाल व संतोष कुमार ने बताया कि किराये की दुकान में जूती बनाने का कारोबार उनके पिता विजय कुमार ने वर्ष 1980 से शुरू किया था। यह कारोबार पुश्तैनी है जिससे रोजाना की पांच सौ आठ सौ रुपये की आमदनी हो जाती है। मगर लॉक डाउन में उद्योगों में ताले पड़ने से भारी नुकसान उठाना पड़ा रहा है। बरसात में तो ये उद्योग मंदे पड़ जाते है।

जूती उद्योगों के शटर नीचे पड़ने से कारीगरों के बुरे दिन शुरू

सुमेरपुर में जूती उद्योग चलाने वाले कारोबारियों ने बताया कि कोरोना वायरस महामारी के कारण पूरा देश लॉक डाउन हो गया तो यहां जूती उद्योगों के शटर भी नीचे गिर गये। संतोष कुमार ने बताया कि प्रदेश के उन्नाव, फतेहपुर, बांदा सहित अन्य जिलों के कारीगर यहां जूती बनाते रहे है। पांच से ग्यारह सौ रुपये में बिकने वाली नागरा जूती की डिमांड बरसात के मौसम में कम होती है। कारोबारियों ने बताया कि जूती उद्योग बंद चलने से दर्जनों कारोबारियों समेत पचास से अधिक कामगार श्रमिक परेशान है।

चर्म शोध केन्द्र खुलने पर जूती उद्योग को लग सकते है पंख

जूती उद्योग चलाने वालों का कहना है कि सरकार यदि इस उद्योग के लिये अलग से मार्केट बनवाकर दुकानें मुहैया करा दें तो इस उद्योग की जूतियां विदेशों में धूम मचा सकती है मगर इसके लिये सम्बन्धित विभाग ध्यान नहीं दे रहा है। वंश गोपाल व संतोष ने बताया कि यहां किसी जमाने में कच्चा माल उपलब्ध कराने के लिये चर्म शोध केन्द्र खोला गया था पर कई सालों से इस केन्द्र से जूती उद्यमियों को कच्चा माल नहीं मिला। एक जिला एक उत्पाद योजना में भी जूती उद्योग को प्रोत्साहन नहीं मिल सका।

वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट में एक कारोबारी को मिली आर्थिक मदद

जिला उद्योग केन्द्र के इंचार्ज महाप्रबंधक भोला प्रसाद गौतम ने गुरुवार को बताया कि सुमेरपुर कस्बे में जूती उद्योग की करीब 35 दुकानें है। इन्हें सरकार ने वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट योजना में लिया था। पिछले साल जूती उद्योग के कारोबारी सुरजीत कुमार को उद्योग को बढ़ावा देने के लिये दो लाख रुपये की ऋण दिलाया गया था। इस वर्ष जूती उद्योग से जुड़े 15 लोगों को ऋण दिलाये जाने की योजना बनाई गयी है। उन्होंने बताया कि उद्योग को नये आयाम देने को हर संभव कदम उठाये जायेंगे।

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