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सात सौ साल पुराने देवसर मंदिर में देश-विदेश से जुटते हैं श्रद्धालु

सात सौ साल पुराने देवसर मंदिर में देश-विदेश से जुटते हैं श्रद्धालु
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भिवानी। एक्शन इंडिया न्यूज़


दिल्ली-पिलानी रोड पर भिवानी से मात्र सात किलोमीटर दूरी पर बसा गांव देवसर धार्मिक आस्था के हिसाब से तो प्रसिद्ध है, साथ ही यहां का मुख्य धाम देवसर धाम पहाड़ी पर बना माता रानी का मंदिर देश विदेश में भी प्रसिद्ध है। ऐसी मान्यता है कि सच्चे मन से मांगी गई मुराद मातारानी अवश्य ही पूरी करती हैं। नवरात्रों में तो इस मंदिर में देश व प्रदेश भर से श्रद्धालु पहुंचकर देवी माता की पूजा-अर्चना व अखंड ज्योति जलाकर परिवार के लिए सुख व समृद्धि की कामना करते है।

गांव के इतिहास की बात करें तो यह गांव करीबन 700 साल से ज्यादा पुराना गांव है। बताया जाता है कि एक जमाने में यह इलाका बंजर हुआ करता था। एक बार बंजारा समूह यहां गाय चराते हुए पहुंच गया। रात को उन्होंने यहां ठहराव किया। सुबह अपनी गायों को ले जाने लगे तो गाय वहां से उठी नहीं। जब वह गाय उठाने के लिए प्रयास कर रहे थे तो अचानक आकाशवाणी हुई कि मां दुर्गा को याद करो। मां तुम्हारी मदद करेगी। यह आवाज सुन बंजारा समूह के लोगों ने वहीं से कंकड़ पत्थर एकत्रित किए और माता रानी छोटी सी मंदिर रूपी जगह बनाई और पूजा अर्चना की।

जैसे ही पूजा-अर्चना की गाय एकाएक उठ गई। इसके बाद जब भी वे यहां आते माता रानी को याद जरूर करते। इसी तरह एक और किवदंती है कि यहां देवसर गांव बसा तो यहां ओछटिया खेड़ा होता था। किन्हीं कारणों से यह खेड़ा उजड़ गया। बड़े बुजुर्गों की माने तो एक दिन मातारानी की आकाशवाणी हुई। इस परिवार के लोग माता रानी की सेवा करेंगे तो यह खेड़ा फिर से आबाद हो जाएगा। मंदिर के बनने से लेकर आजतक ओछटिया परिवार मंदिर में सेवा कार्य कर रहा है। इसके अलावा देवसर धाम मंदिर और परिसर की देखभाल सेवा कार्य चैरिटेबल ट्रस्ट कर रहा है।

मंदिर के पुजारी रमेश व पप्पू ने बताया कि यह मंदिर प्राचीन समय से स्थापित है। इस मंदिर में राजपूत व ब्राह्मण समाज से जुड़े पुजारी पूजा-पाठ करते है। इससे यहां भाईचारा एवं एकता को भी बढ़ावा मिलता है। उन्होंने कहा कि देवसर धाम में गर्मी व सर्दी के दोनों नवरात्रों पर नो दिन तक पूजा-पाठ होती है, जिसमें केवल हरियाणा प्रांत से ही नहीं, बल्कि दूसरे प्रदेशों से भी लोग मन्नत मांगने व पूजा करने के लिए पहुंचते हैं।

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