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हरियाणा में 1200 कॉलोनियों को वैध करेगी सरकार

हरियाणा में 1200 कॉलोनियों को वैध करेगी सरकार
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  • टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग ने करवाया सर्वे
  • 50 प्रतिशत से अधिक के निर्माण की शर्त भी हटाई

चंडीगढ़। एक्शन इंडिया न्यूज़


हरियाणा सरकार बहुत जल्द प्रदेश के विभिन्न शहरों में एक हजार, 200 से अधिक अवैध कॉलोनियों को वैध करने की तैयारी कर रही है। विधानसभा के हालिया मानसून सत्र में इससे समबंधित विधेयक भी पास हो चुका है। नोटिफिकेशन जारी होने के बाद कॉलोनियों को अधिकृत करने की प्रक्रिया शुरू होगी।

इस बारे में शहरी स्थानीय निकाय मंत्री अनिल विज ने विभाग के आला अधिकारियों को तैयारियां करने के निर्देश जारी कर दिए हैं। सरकार ने कॉलोनियों को अधिकृत करने के लिए तय शर्तों में भी बदलाव किया है।

नई शर्तों के मुताबिक, पहले उन्हीं अनाधिकृत कॉलोनियों को अधिकृत किया जा सकता था, जिनमें पचास प्रतिशत या इससे अधिक मकान बन हुए हैं और बसावट है। बदले हुए नियमों के बाद अगर किसी कॉलोनी में कुछ प्रतिशत ही मकान बने हैं, तो उसे भी वैध किया जा सकेगा। इससे पहले शहरी स्थानीय निकायों-नगर निगम, नगर परिषद एवं नगर पालिकाओं से ही सर्वे करवा कर सरकार ने रिपोर्ट ली थी। इस बार सर्वे का काम निकायों की बजाय टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग से करवाया गया। जिलों में विभाग के अधिकारियों ने संबंधित निकायों से अवैध कालोनियों के एरिया, ले-आउट प्लान, गलियों आदि के बारे में ब्यौरा लिया और इसके बाद विस्तृत रिपोर्ट बनाकर सरकार को भेजी। जिलों से रिपोर्ट आने के बाद ही सरकार ने मानसून सत्र में विधेयक पारित किया। उन्हीं कॉलोनियों को वैध घोषित किया जाएगा, जो सरकार द्वारा तय विकास शुल्क जमा करवा देंगी।

प्रदेश सरकार ने अनाधिकृत कॉलोनियों को नियमित करने के लिए विकास शुल्क तय किए हुए हैं। नगर निगम एरिया में रिहायशी प्रॉपर्टी के लिए 60 रुपये प्रति वर्गमीटर विकास शुल्क तय है। कलेक्टर रेट का पांच प्रतिशत देकर भी कालोनियों को वैध करवाने का विकल्प सरकार ने निगमों में दिया। निगमों के एरिया में कमर्शियल प्रॉपर्टी के लिए 1000 रुपये वर्गमीटर विकास शुल्क तय किया हुआ है।

हरियाणा के स्थानीय निकाय मंत्री अनिल विज के अनुसार प्रदेश में अनाधिकृत कॉलोनियों को वैध करने के लिए सरकार ने मानसून सत्र में विधेयक पास कर दिया है। फिलहाल एक हजार,200 के करीब ऐसी कॉलोनियां पंजीकृत हैं। इनकी संख्या बढ़ भी सकती है। सरकार ने तय किया है कि विकास शुल्क जमा करवाने वाली कॉलोनियों को ही वैध किया जाएगा।

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